दक्षिण भारत से उठी हिंदी सेवा की मजबूत आवाज, साहित्येंदु अंतरराष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत हुए प्रोफेसर मंजुनाथ अंबिग

दक्षिण भारत से उठी हिंदी सेवा की मजबूत आवाज, साहित्येंदु अंतरराष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत हुए प्रोफेसर मंजुनाथ अंबिग

भाषाई विविधता के बीच हिंदी सेतु निर्माण के प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान
प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट द्वारा फिरोजाबाद में आयोजित सप्तम अंतरराष्ट्रीय प्रज्ञा सम्मान-2025 समारोह में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास के उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान के कुलसचिव प्रोफेसर (डॉ.) मंजुनाथ एन. अंबिग को हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित श्री भरतलाल अग्रवाल स्मृति साहित्येंदु अलंकरण-2025 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विशेष रूप से अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी भाषा के शिक्षण, शोध, साहित्यिक गतिविधियों तथा विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि जागृत करने के उनके दीर्घकालीन प्रयासों की सराहना स्वरूप प्रदान किया गया।

हिंदी के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता
समारोह के दौरान उन्हें 11 हजार रुपए की सम्मान राशि, शाल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों और हिंदी सेवियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामय बना दिया। यह सम्मान न केवल प्रो. अंबिग की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता और सम्मान का भी प्रतीक माना जा रहा है।

हजारों विद्यार्थियों और शोधार्थियों को हिंदी से जोड़ा
विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण भारत जैसे अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना राष्ट्रीय एकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. अंबिग ने अपने कार्यकाल में हिंदी अध्ययन, शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों और शोधार्थियों को हिंदी से जोड़ा है।

विविध संस्कृतियों को जोडऩे वाला संवाद सेतु
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृतियों को जोडऩे वाला संवाद सेतु है। ऐसे सम्मान उन शिक्षाविदों और साहित्यकारों के लिए प्रेरणा बनते हैं, जो भाषाई सीमाओं से परे राष्ट्रीय समन्वय की भावना को मजबूत कर रहे हैं।

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