इंदौर के हर वार्ड में क्या सच में विकास हो रहा है और जनता उसे कैसे देखती है? इसी का जवाब तलाशने के लिए दैनिक भास्कर ने खास सीरीज ‘वार्ड टॉक’ शुरू की है। इसमें हम पार्षदों के दावों के साथ जनता की राय, अधूरे काम और आगे की जरूरतों को सामने रखते हैं। आज के एपिसोड में हम वार्ड 54 पहुंचे हैं, जहां से महेश बसवाल पार्षद हैं। यहां कौन-से काम पूरे हुए, कौन-से बाकी हैं? जनता 10 में से कितने नंबर देती है। ‘आज का पार्षद’ में देखिए काम का पूरा हिसाब। सवाल: आपके वार्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि कौन-सी है? जवाब: जब मैं जनप्रतिनिधि के रूप में चुना गया, तब वार्ड की सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। करीब 70 प्रतिशत हिस्सा बस्तियों का होने से ड्रेनेज, पानी और सड़कों की समस्या सबसे ज्यादा थी। अब स्थिति काफी बदली है। लगभग 60 प्रतिशत नई ड्रेनेज लाइनें बिछा दी गई हैं। एलएनटी के जो कनेक्शन लंबित थे, उन्हें पूरा कर पानी की सप्लाई सुचारु कर दी गई है। अधिकांश क्षेत्रों में सड़कें भी बन चुकी हैं, हालांकि कुछ इलाके अभी बाकी हैं।
सवाल: कौन सा काम अधूरा है और क्यों? जवाब: मेरी पीड़ा यह है कि जब मैं जनप्रतिनिधि बनकर आया, तब हमारे वार्ड की सबसे बड़ी बस्ती आदिवासी भील कॉलोनी और भील पल्टन की स्थिति बेहद खराब थी। यहां सरकारी स्कूल तो था, लेकिन उसकी हालत बहुत जर्जर और दयनीय थी। हमने नया प्रस्ताव बनाकर स्मार्ट स्कूल की योजना स्वीकृत कराई, लेकिन आज तीन साल बीत जाने के बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। नए एसओआर के कारण पूरा काम लंबित हो गया है। यह मेरे लिए बेहद पीड़ादायक है, इसलिए मैं इस कार्य को जल्द पूरा कराने के लिए सभी से सहयोग की अपील करता हूं। सवाल: जनता की सबसे आम शिकायत क्या आती है? जवाब: जनता की सबसे ज्यादा शिकायतें ड्रेनेज और पानी को लेकर आती हैं। यहां चार टंकियों से पानी की सप्लाई होती है, लेकिन इसके बावजूद बस्ती क्षेत्रों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इसका मुख्य कारण यह है कि टंकियां पूरी क्षमता तक नहीं भरतीं। जहां उन्हें लगभग साढ़े 5 मीटर तक भरना चाहिए, वहां कभी चार मीटर तो कभी साढ़े तीन मीटर ही भर पाती हैं। इसी वजह से पानी की किल्लत बनी रहती है और शिकायतें बढ़ती हैं। ड्रेनेज की समस्या भी आम है। ईदरीश नगर ऐसा क्षेत्र है जहां अभी ड्रेनेज का काम नहीं हो सका है, धीरे-धीरे वहां ड्रेनेज लाइन डालकर ड्रेनेज की समस्या से मुक्ति दिलाएंगे। सवाल: किसी नए प्रयोग से क्या बदलाव हुआ? जवाब: हमारे वार्ड का बड़ा हिस्सा बस्ती क्षेत्र है, जहां पहले लोग घरों के बाहर या खाली मैदानों में कचरा फेंक देते थे और जगह-जगह ढेर लग जाते थे। स्थिति संभालने के लिए हर सप्ताह या कभी-कभी दो बार जेसीबी से कचरा उठवाकर डंपर भरवाने पड़ते थे। अब हालात बदल गए हैं। डोर-टू-डोर कचरा वाहन नियमित रूप से पहुंच रहे हैं और हर घर से कचरा संग्रह किया जा रहा है। एनजीओ के सहयोग से जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। मैं स्वयं वार्ड में जाकर लोगों से मिलकर उन्हें समझाता हूं कि कचरा खुले में न डालें। इसका असर यह हुआ है कि अब कचरा सीधे घरों से गाड़ियों में जा रहा है और सफाई व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। सवाल: किन इलाकों में काम नहीं हो पाया है? जवाब: हमारे वार्ड का सबसे बड़ा क्षेत्र ईदरीश नगर है, जहां अभी कुछ काम अधूरा है। इसी तरह हरिओम पन्ना क्षेत्र में भी थोड़ा कार्य शेष है, जबकि बाकी अधिकांश जगहों पर काम पूरा किया जा चुका है। मयूर नगर में बैकलाइन की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह काफी बड़ी कॉलोनी है, जो 19 गलियों में दो हिस्सों में विभाजित है। इनमें से आधी बैकलाइन को पक्का किया जा चुका है, जबकि शेष काम बाकी है। बैकलाइन पूरी तरह पक्की होने के बाद यहां की एक बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा। सवाल: आपके यहां पानी की शिकायत आई है क्या? जवाब: हमारे क्षेत्र में पानी की शिकायतें सामने आती रहती हैं, जिनमें कुछ स्थानों पर गंदे पानी की समस्या भी शामिल है। पहले स्थिति यह थी कि 15 से 20 मिनट तक लगातार गंदा पानी आता था, लेकिन लगातार प्रयासों से इसमें सुधार हुआ है। अब कुछ जगहों पर शुरुआती 1–2 मिनट गंदा पानी आता है, उसके बाद साफ पानी मिलने लगता है। हम अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से समस्या वाले स्थानों को चिन्हित कर रहे हैं और जल्द ही इसे पूरी तरह दूर करने का प्रयास करेंगे। सवाल: अगले 6 महीने का रोडमैप क्या है? जवाब: मूसाखेड़ी क्षेत्र में एक ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है और प्रयास है कि इसे जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, क्योंकि इसका पूर्ण होना क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि होगी। इसके साथ ही इलाके में पर्याप्त पानी की आपूर्ति, ड्रेनेज की सुचारू व्यवस्था और सड़कों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेरा मानना है कि यदि ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त हो जाए, साफ पानी मिलने लगे, सड़कें अच्छी बन जाएं और घर-घर से रोजाना कचरा उठने लगे, तो किसी पार्षद के लिए इससे बड़ी उपलब्धि नहीं हो सकती।


