हिमाचल में ग्रामीणों ने बनाया ‘आइस स्केटिंग रिंक’:सरकार 10 साल में नहीं बना सकी, 84 बच्चे ट्रेनिंग ले रहे, नेशनल से एशियन तक चमके

हिमाचल में ग्रामीणों ने बनाया ‘आइस स्केटिंग रिंक’:सरकार 10 साल में नहीं बना सकी, 84 बच्चे ट्रेनिंग ले रहे, नेशनल से एशियन तक चमके

हिमाचल की राजधानी में एक दशक से ऑल वेदर आइस स्केटिंग रिंक बनाने के सरकारी दावे आज तक कागजों में सीमित हैं, लेकिन शिमला से सटे चियोग के स्थानीय लोगों ने अपने दम पर वह कर दिखाया, जो सरकार नहीं कर सकी। यहां ग्रामीणों ने अपने आराध्य देवता सोगू की जमीन पर पहाड़ी को समतल कर एक शानदार ‘आइस स्केटिंग रिंक’ तैयार किया है। अब यहां एक-दो नहीं 84 बच्चे स्केटिंग में अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। इस पहल में ध्यान खींचने वाली बात यह है कि रिंक बिना सरकारी मदद के स्थानीय जागरूक लोगों के सामूहिक प्रयास और जुनून से तैयार हुआ है। ग्रामीणों ने पहले पहाड़ी को समतल किया और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड (30×60 मीटर) का आइस स्केटिंग रिंक बनाया। चियोग के इस रिंक में दूर-दूर से बच्चे आइस स्केटिंग सीखने पहुंच रहे हैं। स्केटिंग के प्रति बच्चों में ऐसी दीवानगी है कि सुबह छह-सात बजे, जब लोग ठंड के कारण बिस्तर में दुबके होते हैं, उस समय बच्चे यहां अभ्यास कर रहे होते हैं। ट्रेनिंग सुबह 7 से 10 बजे तक स्केटिंग होती है। दोपहर बाद 4 से 6 बजे तक ऑफ-आइस प्रेक्टिस कराई जाती है। गांव के रिंक से निकल रहे इंटरनेशनल खिलाड़ी इसी का परिणाम है कि कई बच्चे आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इस रिंक से 14 बच्चे इस साल ओपन नेशनल चैंपियनशिप, 6 बच्चे ‘खेलो इंडिया’ में भाग ले चुके हैं, जबकि मात्र 8 साल के रुद्रवीर गांगटा एशियन चैम्पियनशिप में मेडल जीत चुके हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर सही माहौल और मार्गदर्शन मिले, तो गांव के बच्चे भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकते हैं। एशियन चैम्पियनशिप में मेडल जीता: रुद्रवीर शिमला निवासी रुद्रवीर गांगटा ने बताया कि वह एक साल से चियोग रिंक में अभ्यास कर रहे हैं। यहां प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने नेशनल स्तर पर सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि एशियन चैम्पियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया है। चियोग निवासी शुभम ठाकुर ने बताया कि वह दो साल से आइस स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। वह ‘खेलो इंडिया’ और एक नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। वहीं नोर्विन ने बताया कि उन्होंने नेशनल गेम्स में भाग लिया है। वह कोच प्रदीप कंवर और रविंद्र से स्केटिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों के सपनों का केंद्र बना रिंक चियोग का यह रिंक अब केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के सपनों का केंद्र बन चुका है। यहां से निकल रहे खिलाड़ी यह साबित कर रहे हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना चुके कई बच्चे: रोबिन स्थानीय निवासी रोबिन वर्मा ने बताया कि स्थानीय लोगों ने आपस में पैसा इकट्ठा करके आइस स्केटिंग रिंक तैयार किया है। यहां 84 बच्चे रोजाना स्केटिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं और कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि चियोग रिंक में दिसंबर से लगातार स्केटिंग हो रही है। शुरुआत में जब बर्फ नहीं गिरी थी, तो शाम के समय रिंक में पानी डालकर बर्फ जमाई जाती थी। यह प्रक्रिया बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होती है। बढ़ते तापमान के बीच बर्फ तैयार करना आसान नहीं होता। उन्होंने बताया कि कोच प्रदीप कंवर के मार्गदर्शन में बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि कोच रविंद्र भी लगातार बच्चों को स्केटिंग सिखा रहे हैं। दिसंबर से रोजाना ट्रेनिंग करवा रहे: रविंद्र कोच रविंद्र वर्मा ने बताया कि दिसंबर से रोजाना स्केटिंग की ट्रेनिंग करवाई जा रही है। सुबह 7 से 10 बजे तक बच्चे आइस स्केटिंग का अभ्यास करते हैं, जबकि शाम के समय ऑफ-आइस एक्सरसाइज करवाई जाती है, ताकि उनकी फिटनेस और प्रदर्शन बेहतर हो सके।

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