NEET छात्रा रेप-मौत,CBI ने 2 घंटे की SI से पूछताछ:मां-पिता से पूछा-बयान बदलने के लिए किसने कहा; SIT से सवाल-मनीष रंजन को रिमांड पर क्यों नहीं लिया

NEET छात्रा रेप-मौत मामले को टेकओवर किए सीबीआई को चार दिन हो गए हैं। सीबीआई ने अब तक शंभू गर्ल्स हॉस्टल, जहानाबाद में मां-पिता और भाई से 5 घंटे तक पूछताछ की। मंगलवार को SIT की ओर से CCTV फुटेज और उसकी DVR की जांच CID की फोरेंसिक टीम से कराई गई। रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी गई है। नीट छात्रा मामले में सीबीआई 48 घंटे में दूसरी बार जहानाबाद स्थित उसके घर पहुंची। टीम ने छात्रा के भाई से 3 घंटे पूछताछ की। फिर उसका मोबाइल मांगा। भाई ने बताया कि मोबाइल मखदुमपुर में बनवाने के लिए दिया गया है। CBI उसे साथ लेकर मखदुमपुर गई। मंगलवार को दुकान बंद थी। मोबाइल बनाने वाले ने उसे बगल की पान दुकान में रखवा दिया था। सीबीआई ने मोबाइल बरामद कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, जांच एजेंसी ने थाने की एक एसआई को बुलाकर 2 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान सीबीआई ने माता-पिता से भी तीखे सवाल किए, जबकि एसआईटी से भी हार्ड क्वेश्चन किए हैं। माता-पिता से पूछा- आपके ऊपर बयान बदलने या केस वापस लेने का दबाव कौन बना रहा था? टीम ने एसआईटी से पूछा है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को रिमांड पर क्यों नहीं लिया। सीबीआई की जांच अब तक कहां पहुंची? एसआईटी से क्या सवाल हुए और जहानाबाद में मां-बाप से क्या क्या पूछा? जिस थाना क्षेत्र में मामला था, उसके एसआई से क्या बातचीत हुई? पढ़िए रिपोर्ट सबसे पहले जानिए सीबीआई ने एसआईटी और एसआई से क्या पूछा? सीबीआई की जांच का आज चौथा दिन है। सबसे पहले सीबीआई ने एसआईटी से पूरी रिपोर्ट ली है। एसआईटी से ये सवाल किए गए कि परिवार आपकी जांच से संतुष्ट क्यों नहीं है? जांच के बड़े लूप होल्स क्या हैं? सबसे पहले बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के पुलिस टीम ने रेप न होने की बात किस आधार पर कह दी? यही नहीं सीबीआई ने यह भी पूछा कि अभी तक मनीष रंजन की रिमांड लेकर उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई? इसके बाद सोमवार को चित्रगुप्त नगर थाना में पोस्टेड महिला सब इंस्पेक्टर रीना कुमारी को बुलाया गया। करीब दो घंटे तक उनसे इस केस के बारे में सवाल-जवाब किए गए। वो इस केस को लेकर क्या जानती हैं? क्या जांच टीम में वो शामिल थीं? अगर शामिल थीं तो वो कौन-कौन से जगह पर जांच करने गईं? उस दौरान उनके सामने कौन से तथ्य आए थे? पुलिस जांच में लापरवाही बरतने और आरोपियों को बचाने के लगाए गए परिवार के आरोप कितने सही हैं? ऐसे कई सवाल थे, जिनका जवाब सीबीआई की टीम जानना चाहती है। यह सिलसिला अभी चलता रहेगा। सीबीआई एक-एक करके थाने अन्य पुलिस अधिकारयों से अलग-अलग पूछताछ करेगी। जांच-पड़ताल की कुछ तस्वीरें देखें… अब जानिए पिता से क्या क्या सवाल किए गए पटना से घर क्यों लाए और फिर वापस कब भेजा? रविवार को सीबीआई की टीम पीड़ित परिवार के घर गई थी। लंबे वक्त करीब 5 घंटे तक वहां रही। परिवार के लोगों से कई सवाल पूछे। इस बारे में पिता ने बताया कि बेटी पढ़ाई के दबाव और शारीरिक कमजोरी की शिकायत कर रही थी, इसलिए कुछ दिन के लिए उसे घर लाया गया। घर पर रहने के दौरान वह सही थी, हालांकि कभी-कभी तनाव में दिखती थी। उन्होंने कहा, कोई बड़ा पारिवारिक विवाद नहीं था। बाद में बेटी ने खुद पटना लौटकर पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई। CBI ने यात्रा की सटीक तारीख, समय, साधन और साथ रहे व्यक्ति का विवरण भी मांगा। पिता के अनुसार, घर से भेजते समय उन्हें किसी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। अगर कोई गंभीर बात होती तो बेटी जरूर बताती। पटना पहुंचने के बाद आखिरी कॉल में क्या बात हुई? पिता ने कहा, पटना पहुंचने के बाद बेटी ने फोन कर बताया कि वह हॉस्टल पहुंच गई है। बातचीत थोड़ी देर ही हुई थी और उसने “सब ठीक” कहा। CBI ने पूछा कि क्या उसने किसी व्यक्ति का नाम लिया या डर जताया। पिता ने कहा कि उसने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया। उन्होंने कॉल की टाइमिंग साझा करने की बात कही ताकि एजेंसी रिकॉर्ड से मिलान कर सके। सीबीआई ने यह भी पूछा कि आपके घर के दो मोबाइल टूटे क्यों? अस्पताल में पहुंचने पर उसकी हालत कैसी थी? पिता के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर बेटी बेहोश थी और डॉक्टर इलाज में जुटे थे। उन्होंने कहा कि उस समय कारण स्पष्ट नहीं चल पा रहा था। उसने इशारों में बताया कि उसके साथ गलत हुआ है। कपड़ों और उसकी हालत को देखकर हमें भी संदेह हुआ कि मेरी बेटी के साथ कुछ तो हुआ है। CBI ने पूछा कि सूचना मिलने और अस्पताल पहुंचने के बीच कितना समय लगा। पिता ने कहा कि जैसे ही खबर मिली वे तुरंत रवाना हुए। बाद में पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से उनकी आशंका सही साबित हुई। दोनों में रेप की बात कही गई, लेकिन पुलिस मानने को तैयार ही नहीं हुई। SIT ने आप पर दबाव बनाया या बयान बदलने को कहा? पिता ने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में पुलिस और एसआईटी दोनों ही आत्महत्या साबित करने में लग गए। उनसे बार-बार एक ही जैसे सवाल पूछे जा रहे थे। आपकी बेटी का कोई ब्वॉयफ्रेंड तो नहीं है? वो किससे बात करती थी? उसकी तबियत कैसे खराब हुई? उन्होंने कहा कि उन्हें लगा जैसे परिवार पर संदेह किया जा रहा हो। CBI ने तारीख-वार मुलाकातों और पूछताछ के तरीके की जानकारी भी ली। कुछ गलत होने की आशंका किन आधारों पर हुई? पिता ने बताया कि अस्पताल में बच्ची की हालत, कपड़ों की स्थिति और शरीर पर चोट के निशान से ही लग गया था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि उसके साथ गलत काम किया गया। उन्होंने कहा कि बेटी का स्वभाव ऐसा नहीं था कि वह अचानक सुसाइड जैसा कदम उठाए। CBI ने पूछा कि क्या किसी खास व्यक्ति पर संदेह है। पिता ने कहा कि वे एजेंसी पर भरोसा रखते हैं, पर निष्पक्ष जांच चाहते हैं। मां से CBI के 3 सवाल अबॉर्शन दवा की बात कैसे सामने आई? मां ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बेटी को कोई गर्भपात संबंधी दवा नहीं दी थी। उनके अनुसार, यह बात बाद में अफवाहों से फैली। घर में ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं थी। CBI ने पूछा कि क्या किसी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी गई थी। मां ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी खरीद की जानकारी नहीं है। यह बात सिर्फ पुलिस हमसे कह रही थी कि आपकी बेटी को ब्लीडिंग हो रही थी, क्या कोई दवा दी थी क्या? क्या उसने हॉस्टल या किसी व्यक्ति को लेकर डर जताया था? मां के अनुसार, बेटी खुलकर हर बात साझा नहीं करती थी, लेकिन उसने सीधे तौर पर किसी खतरे की बात नहीं कही। CBI ने पूछा कि क्या उसने किसी नाम या घटना का जिक्र किया। मां ने कहा कि यदि ऐसा होता तो वे उसे वापस न भेजतीं। आगे क्या? CBI अब परिवार के बयानों, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, मेडिकल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिलान करेगी। जरूरत पड़ने पर आमने-सामने पूछताछ और दोबारा सैंपल जांच हो सकती है। NEET छात्रा रेप-मौत मामले को टेकओवर किए सीबीआई को चार दिन हो गए हैं। सीबीआई ने अब तक शंभू गर्ल्स हॉस्टल, जहानाबाद में मां-पिता और भाई से 5 घंटे तक पूछताछ की। मंगलवार को SIT की ओर से CCTV फुटेज और उसकी DVR की जांच CID की फोरेंसिक टीम से कराई गई। रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी गई है। नीट छात्रा मामले में सीबीआई 48 घंटे में दूसरी बार जहानाबाद स्थित उसके घर पहुंची। टीम ने छात्रा के भाई से 3 घंटे पूछताछ की। फिर उसका मोबाइल मांगा। भाई ने बताया कि मोबाइल मखदुमपुर में बनवाने के लिए दिया गया है। CBI उसे साथ लेकर मखदुमपुर गई। मंगलवार को दुकान बंद थी। मोबाइल बनाने वाले ने उसे बगल की पान दुकान में रखवा दिया था। सीबीआई ने मोबाइल बरामद कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, जांच एजेंसी ने थाने की एक एसआई को बुलाकर 2 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान सीबीआई ने माता-पिता से भी तीखे सवाल किए, जबकि एसआईटी से भी हार्ड क्वेश्चन किए हैं। माता-पिता से पूछा- आपके ऊपर बयान बदलने या केस वापस लेने का दबाव कौन बना रहा था? टीम ने एसआईटी से पूछा है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को रिमांड पर क्यों नहीं लिया। सीबीआई की जांच अब तक कहां पहुंची? एसआईटी से क्या सवाल हुए और जहानाबाद में मां-बाप से क्या क्या पूछा? जिस थाना क्षेत्र में मामला था, उसके एसआई से क्या बातचीत हुई? पढ़िए रिपोर्ट सबसे पहले जानिए सीबीआई ने एसआईटी और एसआई से क्या पूछा? सीबीआई की जांच का आज चौथा दिन है। सबसे पहले सीबीआई ने एसआईटी से पूरी रिपोर्ट ली है। एसआईटी से ये सवाल किए गए कि परिवार आपकी जांच से संतुष्ट क्यों नहीं है? जांच के बड़े लूप होल्स क्या हैं? सबसे पहले बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के पुलिस टीम ने रेप न होने की बात किस आधार पर कह दी? यही नहीं सीबीआई ने यह भी पूछा कि अभी तक मनीष रंजन की रिमांड लेकर उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई? इसके बाद सोमवार को चित्रगुप्त नगर थाना में पोस्टेड महिला सब इंस्पेक्टर रीना कुमारी को बुलाया गया। करीब दो घंटे तक उनसे इस केस के बारे में सवाल-जवाब किए गए। वो इस केस को लेकर क्या जानती हैं? क्या जांच टीम में वो शामिल थीं? अगर शामिल थीं तो वो कौन-कौन से जगह पर जांच करने गईं? उस दौरान उनके सामने कौन से तथ्य आए थे? पुलिस जांच में लापरवाही बरतने और आरोपियों को बचाने के लगाए गए परिवार के आरोप कितने सही हैं? ऐसे कई सवाल थे, जिनका जवाब सीबीआई की टीम जानना चाहती है। यह सिलसिला अभी चलता रहेगा। सीबीआई एक-एक करके थाने अन्य पुलिस अधिकारयों से अलग-अलग पूछताछ करेगी। जांच-पड़ताल की कुछ तस्वीरें देखें… अब जानिए पिता से क्या क्या सवाल किए गए पटना से घर क्यों लाए और फिर वापस कब भेजा? रविवार को सीबीआई की टीम पीड़ित परिवार के घर गई थी। लंबे वक्त करीब 5 घंटे तक वहां रही। परिवार के लोगों से कई सवाल पूछे। इस बारे में पिता ने बताया कि बेटी पढ़ाई के दबाव और शारीरिक कमजोरी की शिकायत कर रही थी, इसलिए कुछ दिन के लिए उसे घर लाया गया। घर पर रहने के दौरान वह सही थी, हालांकि कभी-कभी तनाव में दिखती थी। उन्होंने कहा, कोई बड़ा पारिवारिक विवाद नहीं था। बाद में बेटी ने खुद पटना लौटकर पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई। CBI ने यात्रा की सटीक तारीख, समय, साधन और साथ रहे व्यक्ति का विवरण भी मांगा। पिता के अनुसार, घर से भेजते समय उन्हें किसी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। अगर कोई गंभीर बात होती तो बेटी जरूर बताती। पटना पहुंचने के बाद आखिरी कॉल में क्या बात हुई? पिता ने कहा, पटना पहुंचने के बाद बेटी ने फोन कर बताया कि वह हॉस्टल पहुंच गई है। बातचीत थोड़ी देर ही हुई थी और उसने “सब ठीक” कहा। CBI ने पूछा कि क्या उसने किसी व्यक्ति का नाम लिया या डर जताया। पिता ने कहा कि उसने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया। उन्होंने कॉल की टाइमिंग साझा करने की बात कही ताकि एजेंसी रिकॉर्ड से मिलान कर सके। सीबीआई ने यह भी पूछा कि आपके घर के दो मोबाइल टूटे क्यों? अस्पताल में पहुंचने पर उसकी हालत कैसी थी? पिता के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर बेटी बेहोश थी और डॉक्टर इलाज में जुटे थे। उन्होंने कहा कि उस समय कारण स्पष्ट नहीं चल पा रहा था। उसने इशारों में बताया कि उसके साथ गलत हुआ है। कपड़ों और उसकी हालत को देखकर हमें भी संदेह हुआ कि मेरी बेटी के साथ कुछ तो हुआ है। CBI ने पूछा कि सूचना मिलने और अस्पताल पहुंचने के बीच कितना समय लगा। पिता ने कहा कि जैसे ही खबर मिली वे तुरंत रवाना हुए। बाद में पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से उनकी आशंका सही साबित हुई। दोनों में रेप की बात कही गई, लेकिन पुलिस मानने को तैयार ही नहीं हुई। SIT ने आप पर दबाव बनाया या बयान बदलने को कहा? पिता ने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में पुलिस और एसआईटी दोनों ही आत्महत्या साबित करने में लग गए। उनसे बार-बार एक ही जैसे सवाल पूछे जा रहे थे। आपकी बेटी का कोई ब्वॉयफ्रेंड तो नहीं है? वो किससे बात करती थी? उसकी तबियत कैसे खराब हुई? उन्होंने कहा कि उन्हें लगा जैसे परिवार पर संदेह किया जा रहा हो। CBI ने तारीख-वार मुलाकातों और पूछताछ के तरीके की जानकारी भी ली। कुछ गलत होने की आशंका किन आधारों पर हुई? पिता ने बताया कि अस्पताल में बच्ची की हालत, कपड़ों की स्थिति और शरीर पर चोट के निशान से ही लग गया था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि उसके साथ गलत काम किया गया। उन्होंने कहा कि बेटी का स्वभाव ऐसा नहीं था कि वह अचानक सुसाइड जैसा कदम उठाए। CBI ने पूछा कि क्या किसी खास व्यक्ति पर संदेह है। पिता ने कहा कि वे एजेंसी पर भरोसा रखते हैं, पर निष्पक्ष जांच चाहते हैं। मां से CBI के 3 सवाल अबॉर्शन दवा की बात कैसे सामने आई? मां ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बेटी को कोई गर्भपात संबंधी दवा नहीं दी थी। उनके अनुसार, यह बात बाद में अफवाहों से फैली। घर में ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं थी। CBI ने पूछा कि क्या किसी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी गई थी। मां ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी खरीद की जानकारी नहीं है। यह बात सिर्फ पुलिस हमसे कह रही थी कि आपकी बेटी को ब्लीडिंग हो रही थी, क्या कोई दवा दी थी क्या? क्या उसने हॉस्टल या किसी व्यक्ति को लेकर डर जताया था? मां के अनुसार, बेटी खुलकर हर बात साझा नहीं करती थी, लेकिन उसने सीधे तौर पर किसी खतरे की बात नहीं कही। CBI ने पूछा कि क्या उसने किसी नाम या घटना का जिक्र किया। मां ने कहा कि यदि ऐसा होता तो वे उसे वापस न भेजतीं। आगे क्या? CBI अब परिवार के बयानों, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, मेडिकल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिलान करेगी। जरूरत पड़ने पर आमने-सामने पूछताछ और दोबारा सैंपल जांच हो सकती है।  

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