Pro League में भारत की लगातार हार से बढ़ी चिंता, विश्व कप से पहले सुधार की जरूरत

Pro League  में भारत की लगातार हार से बढ़ी चिंता, विश्व कप से पहले सुधार की जरूरत

राउरकेला में खेले गए प्रो लीग चरण के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। चार मुकाबलों में चार हार और 19 गोल गंवाना किसी भी शीर्ष टीम के लिए चिंता का विषय माना जाता है। टीम ने इन मैचों में केवल पांच गोल किए, जबकि रक्षापंक्ति बार-बार दबाव में टूटती नजर आई है।बता दें कि FIH Pro League को अक्सर प्रयोगात्मक टूर्नामेंट कहा जाता है, लेकिन घरेलू मैदान पर इस तरह की हार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत को पहले मुकाबले में बेल्जियम से 1-3 से हार का सामना करना पड़ा, जबकि अर्जेंटीना ने 8-0 से करारी शिकस्त दी। इसके बाद भी दोनों टीमों के खिलाफ 2-4 से हार मिली। गौरतलब है कि 8-0 की हार गोल अंतर के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी हारों में शामिल है।मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने स्वीकार किया कि घरेलू हार हमेशा अधिक पीड़ा देती है, क्योंकि अपेक्षाएं ज्यादा होती हैं। पूर्व डिफेंडर वीआर रघुनाथ ने कहा कि टीम ने काउंटर अटैक पर नियंत्रण खो दिया और सामूहिक प्रदर्शन में कमी दिखी।रक्षा पंक्ति में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और जुगराज सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद होने के बावजूद समन्वय की कमी दिखी। अर्जेंटीना ने आठ मिनट के भीतर छह गोल दागे, जिससे टीम की संरचना पर सवाल खड़े हुए। प्राथमिक गोलकीपर कृष्ण पाठक को विश्राम दिए जाने के बाद सूरज कर्केरा और पवन पर जिम्मेदारी आई, लेकिन दोनों 19 गोल रोकने में असफल रहे।मौजूद जानकारी के अनुसार, मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन के बीच तालमेल की कमी भी साफ नजर आई। हार्दिक सिंह और अभिषेक अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। पेनल्टी कॉर्नर पर भी टीम की धार कम दिखी और कई मौके गंवाए गए।गौरतलब है कि अगस्त में होने वाले विश्व कप और सितंबर-अक्टूबर के एशियाई खेलों को देखते हुए कोच फुल्टन 22-24 खिलाड़ियों का मजबूत कोर समूह तैयार करना चाहते हैं। अमनदीप लाकड़ा, मनमीत सिंह और रोशन कुजूर जैसे नए खिलाड़ियों को मौका दिया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर घरेलू लीग संरचना के अभाव में भारतीय खिलाड़ियों को वह अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर नहीं मिल पाता जो यूरोपीय टीमों को मिलता है।भारतीय टीम अब राउरकेला से होबार्ट के लिए रवाना हो चुकी है, जहां 21 से 25 फरवरी के बीच स्पेन और मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले मुकाबले खेले जाएंगे। कोच फुल्टन ने कहा कि टीम अभी विश्व कप और एशियाई खेलों की तैयारी के चरण में है और परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन सुधार की गुंजाइश है। उनका मानना है कि जब सभी पहलू तालमेल में होंगे, तब टीम अपनी वास्तविक क्षमता दिखाएगी। 

राउरकेला में खेले गए प्रो लीग चरण के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। चार मुकाबलों में चार हार और 19 गोल गंवाना किसी भी शीर्ष टीम के लिए चिंता का विषय माना जाता है। टीम ने इन मैचों में केवल पांच गोल किए, जबकि रक्षापंक्ति बार-बार दबाव में टूटती नजर आई है।
बता दें कि FIH Pro League को अक्सर प्रयोगात्मक टूर्नामेंट कहा जाता है, लेकिन घरेलू मैदान पर इस तरह की हार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत को पहले मुकाबले में बेल्जियम से 1-3 से हार का सामना करना पड़ा, जबकि अर्जेंटीना ने 8-0 से करारी शिकस्त दी। इसके बाद भी दोनों टीमों के खिलाफ 2-4 से हार मिली। गौरतलब है कि 8-0 की हार गोल अंतर के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी हारों में शामिल है।
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने स्वीकार किया कि घरेलू हार हमेशा अधिक पीड़ा देती है, क्योंकि अपेक्षाएं ज्यादा होती हैं। पूर्व डिफेंडर वीआर रघुनाथ ने कहा कि टीम ने काउंटर अटैक पर नियंत्रण खो दिया और सामूहिक प्रदर्शन में कमी दिखी।
रक्षा पंक्ति में कप्तान हरमनप्रीत सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और जुगराज सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद होने के बावजूद समन्वय की कमी दिखी। अर्जेंटीना ने आठ मिनट के भीतर छह गोल दागे, जिससे टीम की संरचना पर सवाल खड़े हुए। प्राथमिक गोलकीपर कृष्ण पाठक को विश्राम दिए जाने के बाद सूरज कर्केरा और पवन पर जिम्मेदारी आई, लेकिन दोनों 19 गोल रोकने में असफल रहे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन के बीच तालमेल की कमी भी साफ नजर आई। हार्दिक सिंह और अभिषेक अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। पेनल्टी कॉर्नर पर भी टीम की धार कम दिखी और कई मौके गंवाए गए।
गौरतलब है कि अगस्त में होने वाले विश्व कप और सितंबर-अक्टूबर के एशियाई खेलों को देखते हुए कोच फुल्टन 22-24 खिलाड़ियों का मजबूत कोर समूह तैयार करना चाहते हैं। अमनदीप लाकड़ा, मनमीत सिंह और रोशन कुजूर जैसे नए खिलाड़ियों को मौका दिया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर घरेलू लीग संरचना के अभाव में भारतीय खिलाड़ियों को वह अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर नहीं मिल पाता जो यूरोपीय टीमों को मिलता है।
भारतीय टीम अब राउरकेला से होबार्ट के लिए रवाना हो चुकी है, जहां 21 से 25 फरवरी के बीच स्पेन और मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले मुकाबले खेले जाएंगे। कोच फुल्टन ने कहा कि टीम अभी विश्व कप और एशियाई खेलों की तैयारी के चरण में है और परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन सुधार की गुंजाइश है। उनका मानना है कि जब सभी पहलू तालमेल में होंगे, तब टीम अपनी वास्तविक क्षमता दिखाएगी।

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