विश्व प्रसिद्ध नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा कुछ ही घंटों में शुरू होने वाली है। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, परिक्रमार्थियों की राह आसान नहीं दिख रही है। इस बार रामादल को बरौली, गोवर्धनपुर और वाजीदपुर के रास्ते नंगे पैर गिट्टियों और बजरी से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे श्रद्धालुओं को बड़ी परेशानी हो सकती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण के लिए महीनों पहले सड़क के दोनों ओर गिट्टियां डाली गई थीं। इन्हें अब तक व्यवस्थित नहीं किया गया है। साधु-संत और श्रद्धालु यह यात्रा नंगे पैर पूरी करते हैं, ऐसे में इन नुकीली गिट्टियों पर चलना उनके लिए कष्टकारी होगा। उप जिलाधिकारी सदर सुशील मिश्रा ने निरीक्षण के दौरान बताया कि झाड़ियों की सफाई और अतिक्रमण हटाने का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने प्रतापनगर चौराहा मार्ग पर गड्ढों को भरने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, विख्यात कथावाचक पीठाधीश्वर अनिल शास्त्री ने व्यवस्थाओं पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार स्थितियां अधिक चुनौतीपूर्ण हैं। शास्त्री ने बताया कि वे परिक्रमा के दौरान सभी पड़ाव स्थलों पर रुककर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस मार्ग को अस्थायी की जगह स्थायी रूप से दुरुस्त कराने की मांग करेंगे।


