पिता 3 दिन तक नवजात को लेकर भटके:बच्चे को ब्लड इन्फेक्शन, फेफड़े-आंत में समस्या; पटना के अस्पतालों में बेड-वेंटिलेटर नहीं मिले, हालत गंभीर

पिता 3 दिन तक नवजात को लेकर भटके:बच्चे को ब्लड इन्फेक्शन, फेफड़े-आंत में समस्या; पटना के अस्पतालों में बेड-वेंटिलेटर नहीं मिले, हालत गंभीर

गया के फतेहपुर कांटी निवासी राहुल कुमार अपने दो माह के बीमार नवजात बच्चे को लेकर पिछले तीन दिन और दो रात से पटना के प्रमुख अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। बच्चे को फेफड़े, आंत और ब्लड इन्फेक्शन है। परिजनों का आरोप है कि समय पर बेड और वेंटिलेटर न मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही है। परिजनों के अनुसार, गया के चिकित्सकों ने बच्चे की नाजुक हालत देखते हुए उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पटना रेफर किया था। हालांकि, एम्स में बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर उन्हें इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) जाने की सलाह दी गई। आईजीआईएमएस में नहीं मिला वेंटिलेटर आईजीआईएमएस पहुंचने पर भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद पिता नवजात को लेकर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) पहुंचे। वहां भी बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर बताते हुए उन्हें दोबारा एम्स जाने की सलाह दी गई। पिता राहुल कुमार ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही है और खून में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई अस्पतालों में गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां आपात स्थिति में भी नवजात शिशुओं को समय पर आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया एम्स प्रशासन मामला मीडिया में प्रकाशित होने के बाद एम्स प्रशासन ने परिजनों से संपर्क किया। मंगलवार दोपहर नवजात को एम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। एम्स पटना का स्पष्टीकरण,आईसीयू बेड सीमित, मानक प्रक्रिया के तहत किया गया रेफर एम्स पटना प्रशासन ने मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी कर अपना पक्ष रखा।संस्थान के अनुसार,शिशु जन्म से ही गंभीर जन्मजात समस्या (एक फेफड़े का न होना) से पीड़ित था। उसे सांस लेने में तकलीफ के साथ इमरजेंसी में लाया गया, जहां तत्काल निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार दिया गया। उस समय आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उच्च स्तरीय सुविधा वाले अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी गई। इंट्यूबेशन और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता के बारे में परिजनों को बताया गया, लेकिन उस समय सहमति नहीं मिली। शिशु को इमरजेंसी में छोड़कर परिजन अन्यत्र बेड की तलाश में चले गए थे, जिस कारण सुरक्षा कर्मियों को सूचित किया गया। पुलिस बल के माध्यम से हटाने जैसी कोई मंशा नहीं थी। एम्स प्रशासन ने मीडिया से तथ्यों की पुष्टि के बाद ही खबर प्रकाशित करने की अपील की है। बड़ा सवाल,दावों और धरातल के बीच कितनी दूरी? राजधानी के तीन प्रमुख अस्पतालों के बीच 3 दिन तक भटकता एक पिता और वेंटिलेटर की तलाश में जूझता नवजात यह मामला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। फिलहाल मासूम की हालत गंभीर है। परिवार को अब भी उम्मीद है कि समय रहते बेहतर इलाज मिले और उनका बच्चा जिंदगी की जंग जीत सके। केस स्टडी- पटना ऐम्स में बेड का अभाव, मरीज लौटने के लिए मजबूर दरभंगा निवासी राजू कुमार शाह मंगलवार को अपने जीजा के इलाज करवाने के लिए पटना AIIMS पहुंचा, राजू शाह ने बताया कि जीजा को चलने काफी परेशानी है, नस में काफी दर्द है, जिसके बाद आज दरभंगा से पटना AIIMS पहुंचे हैं, लेकिन यहां इलाज संभव नहीं हो सका और न ही एडमिट लिया गया ,AIIMS में बेड खाली नहीं होने की वजह से इलाज नहीं हो सका। जिसके बाद अब इलाज की आश में पीएमसीएच जा रहा हूं। वहीं मुजफ्फरपुर के रहने वाले कमल ठाकुर ने बताया की सुबह 10 बजे अपनी पत्नी आभा देवी को लेकर पटना ऐम्स पहुंचा हूं , नेफ्रोलॉजी में किडनी संबंधित इलाज के लिए भर्ती करवाना था, लेकिन बेड के अभाव में भर्ती नहीं किया गया। अब मजबूर होकर पीएमसीएच जा रहा है। शायद पीएमसीएच में इसका इलाज संभव हो पाए। गया के फतेहपुर कांटी निवासी राहुल कुमार अपने दो माह के बीमार नवजात बच्चे को लेकर पिछले तीन दिन और दो रात से पटना के प्रमुख अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। बच्चे को फेफड़े, आंत और ब्लड इन्फेक्शन है। परिजनों का आरोप है कि समय पर बेड और वेंटिलेटर न मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही है। परिजनों के अनुसार, गया के चिकित्सकों ने बच्चे की नाजुक हालत देखते हुए उसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पटना रेफर किया था। हालांकि, एम्स में बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर उन्हें इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) जाने की सलाह दी गई। आईजीआईएमएस में नहीं मिला वेंटिलेटर आईजीआईएमएस पहुंचने पर भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद पिता नवजात को लेकर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) पहुंचे। वहां भी बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर बताते हुए उन्हें दोबारा एम्स जाने की सलाह दी गई। पिता राहुल कुमार ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही है और खून में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई अस्पतालों में गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां आपात स्थिति में भी नवजात शिशुओं को समय पर आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया एम्स प्रशासन मामला मीडिया में प्रकाशित होने के बाद एम्स प्रशासन ने परिजनों से संपर्क किया। मंगलवार दोपहर नवजात को एम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। एम्स पटना का स्पष्टीकरण,आईसीयू बेड सीमित, मानक प्रक्रिया के तहत किया गया रेफर एम्स पटना प्रशासन ने मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी कर अपना पक्ष रखा।संस्थान के अनुसार,शिशु जन्म से ही गंभीर जन्मजात समस्या (एक फेफड़े का न होना) से पीड़ित था। उसे सांस लेने में तकलीफ के साथ इमरजेंसी में लाया गया, जहां तत्काल निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार दिया गया। उस समय आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उच्च स्तरीय सुविधा वाले अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी गई। इंट्यूबेशन और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता के बारे में परिजनों को बताया गया, लेकिन उस समय सहमति नहीं मिली। शिशु को इमरजेंसी में छोड़कर परिजन अन्यत्र बेड की तलाश में चले गए थे, जिस कारण सुरक्षा कर्मियों को सूचित किया गया। पुलिस बल के माध्यम से हटाने जैसी कोई मंशा नहीं थी। एम्स प्रशासन ने मीडिया से तथ्यों की पुष्टि के बाद ही खबर प्रकाशित करने की अपील की है। बड़ा सवाल,दावों और धरातल के बीच कितनी दूरी? राजधानी के तीन प्रमुख अस्पतालों के बीच 3 दिन तक भटकता एक पिता और वेंटिलेटर की तलाश में जूझता नवजात यह मामला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। फिलहाल मासूम की हालत गंभीर है। परिवार को अब भी उम्मीद है कि समय रहते बेहतर इलाज मिले और उनका बच्चा जिंदगी की जंग जीत सके। केस स्टडी- पटना ऐम्स में बेड का अभाव, मरीज लौटने के लिए मजबूर दरभंगा निवासी राजू कुमार शाह मंगलवार को अपने जीजा के इलाज करवाने के लिए पटना AIIMS पहुंचा, राजू शाह ने बताया कि जीजा को चलने काफी परेशानी है, नस में काफी दर्द है, जिसके बाद आज दरभंगा से पटना AIIMS पहुंचे हैं, लेकिन यहां इलाज संभव नहीं हो सका और न ही एडमिट लिया गया ,AIIMS में बेड खाली नहीं होने की वजह से इलाज नहीं हो सका। जिसके बाद अब इलाज की आश में पीएमसीएच जा रहा हूं। वहीं मुजफ्फरपुर के रहने वाले कमल ठाकुर ने बताया की सुबह 10 बजे अपनी पत्नी आभा देवी को लेकर पटना ऐम्स पहुंचा हूं , नेफ्रोलॉजी में किडनी संबंधित इलाज के लिए भर्ती करवाना था, लेकिन बेड के अभाव में भर्ती नहीं किया गया। अब मजबूर होकर पीएमसीएच जा रहा है। शायद पीएमसीएच में इसका इलाज संभव हो पाए।  

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