कटिहार के कुर्सेला मुख्य बाजार (हटिया) में 15 फरवरी रविवार शाम हुए भीषण अग्निकांड के दो दिन बाद भी पीड़ितों को राहत नहीं मिल पाई है। आग से 300 से अधिक परिवारों की दुकानें जल गईं, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। सोमवार सुबह 7 बजे से ही बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार मुआवजे की उम्मीद में अपने दस्तावेजों के साथ कुर्सेला डाक बंगला पहुंचे। वे घंटों तक भूखे-प्यासे प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। “दो दिन हो गए, घर में किसी ने खाना नहीं खाया” पीड़िता आयशा खातून ने अपने जले हुए सामान के दस्तावेज दिखाते हुए बताया, “दो दिन हो गए, घर में किसी ने खाना नहीं खाया है। मुआवजा मिलना तो दूर, अब तक शासन का कोई नुमाइंदा यह पूछने भी नहीं आया कि हम जीवित हैं या नहीं। सुबह 7 बजे से हम यहाँ कागजात व्यवस्थित करने में लगे हैं, ताकि शायद कुछ मदद मिल जाए।” उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई जानबूझकर अपनी दुकान जलाता है, और आज उनके बच्चे दाने-दाने को तरस रहे हैं। ”चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले नेता आज विपदा की घड़ी में गायब” पीड़ित नीरज कुमार ने प्रशासन की व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आग लगने के समय बाजार में एक भी चापाकल चालू नहीं था, जिससे आग पर काबू पाया जा सके। उन्होंने कहा, “हमारी उम्र भर की पूंजी जलकर राख हो गई और अब हम कागजात लेकर भटक रहे हैं। चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले नेता आज विपदा की घड़ी में गायब हैं।” दीपक कुमार चौधरी ने नेताओं की बेरुखी पर टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आज चुनाव का समय होता, तो कुर्सेला में बड़े-बड़े नेताओं और मुख्यमंत्री का तांता लग गया होता।” उन्होंने बताया कि उन्होंने जीविका और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर दुकान शुरू की थी, और अब किश्त मांगने वाले घर आ रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि घर चलाएं या कर्ज चुकाएं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, बरारी विधायक विजय सिंह घटना के दो दिन बाद घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ितों से मिलकर उन्हें आश्वासन दिया। कटिहार के कुर्सेला मुख्य बाजार (हटिया) में 15 फरवरी रविवार शाम हुए भीषण अग्निकांड के दो दिन बाद भी पीड़ितों को राहत नहीं मिल पाई है। आग से 300 से अधिक परिवारों की दुकानें जल गईं, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। सोमवार सुबह 7 बजे से ही बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार मुआवजे की उम्मीद में अपने दस्तावेजों के साथ कुर्सेला डाक बंगला पहुंचे। वे घंटों तक भूखे-प्यासे प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। “दो दिन हो गए, घर में किसी ने खाना नहीं खाया” पीड़िता आयशा खातून ने अपने जले हुए सामान के दस्तावेज दिखाते हुए बताया, “दो दिन हो गए, घर में किसी ने खाना नहीं खाया है। मुआवजा मिलना तो दूर, अब तक शासन का कोई नुमाइंदा यह पूछने भी नहीं आया कि हम जीवित हैं या नहीं। सुबह 7 बजे से हम यहाँ कागजात व्यवस्थित करने में लगे हैं, ताकि शायद कुछ मदद मिल जाए।” उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई जानबूझकर अपनी दुकान जलाता है, और आज उनके बच्चे दाने-दाने को तरस रहे हैं। ”चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले नेता आज विपदा की घड़ी में गायब” पीड़ित नीरज कुमार ने प्रशासन की व्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आग लगने के समय बाजार में एक भी चापाकल चालू नहीं था, जिससे आग पर काबू पाया जा सके। उन्होंने कहा, “हमारी उम्र भर की पूंजी जलकर राख हो गई और अब हम कागजात लेकर भटक रहे हैं। चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले नेता आज विपदा की घड़ी में गायब हैं।” दीपक कुमार चौधरी ने नेताओं की बेरुखी पर टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आज चुनाव का समय होता, तो कुर्सेला में बड़े-बड़े नेताओं और मुख्यमंत्री का तांता लग गया होता।” उन्होंने बताया कि उन्होंने जीविका और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेकर दुकान शुरू की थी, और अब किश्त मांगने वाले घर आ रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि घर चलाएं या कर्ज चुकाएं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, बरारी विधायक विजय सिंह घटना के दो दिन बाद घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ितों से मिलकर उन्हें आश्वासन दिया।


