वार्षिक परीक्षाओं के साथ ही अनेक विद्यार्थियों में परिणाम को लेकर तनाव और चिंता बढऩे लगती है, जबकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा को लेकर अनावश्यक दबाव लेने के बजाय इसे सीखने और आगे बढऩे के अवसर के रूप में देखना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी में सफलता प्राप्त करने की क्षमता मौजूद है और सही दिशा में नियमित प्रयास उसे मंजिल तक अवश्य पहुँचाता है।
परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। हर सुबह नया अवसर लेकर आती है और प्रतिदिन की मेहनत भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है। विद्यार्थियों को लक्ष्य स्पष्ट रखते हुए समय का सम्मान करना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। फरवरी-मार्च का समय वार्षिक परीक्षाओं का होता है, जिसमें कर्नाटक राज्य पाठ्यक्रम की एसएसएलसी परीक्षा में हर वर्ष लगभग 8 से 9 लाख विद्यार्थी भाग लेते हैं। परीक्षा बोर्ड का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक अंक प्राप्त करना अच्छा है, लेकिन असली सफलता उन विद्यार्थियों की होती है जो मेहनत और धैर्य से आगे बढ़ते हैं तथा असफलता के डर को पीछे छोड़ देते हैं।
लगातार प्रयास से ही मिलती है सफलता
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ पढ़ाई करने, मॉडल प्रश्नपत्र हल करने, छोटे नोट्स तैयार करने और समयबद्ध अभ्यास करने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और हल्का व्यायाम मानसिक संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं। समूह अध्ययन और उत्तर लिखने का नियमित अभ्यास भी आत्मविश्वास बढ़ाता है। हिंदी विषय को अपेक्षाकृत सरल बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि नियमित अभ्यास से विद्यार्थी अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। प्रश्नपत्र विद्यार्थी के अनुकूल होता है, जिसमें व्याकरण, गद्य-पद्य, अनुवाद, निबंध और पत्र लेखन जैसे भाग शामिल रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असफलता को चुनौती के रूप में स्वीकार कर सुधार की दिशा में प्रयास करना चाहिए, क्योंकि लगातार प्रयास करने वालों को अंतत: सफलता मिलती ही है।
अंकों का अनावश्यक दबाव नहीं बनाएं अभिभावक
एस.आर.एस. कर्नाटक पब्लिक स्कूल रायनाल की प्रभारी उप-प्राचार्या डॉ. रेणुकाताई कहती है, विद्यार्थियों को परीक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का तनाव नहीं पालना चाहिए। शांत मन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच के साथ की गई तैयारी हमेशा बेहतर परिणाम देती है। परीक्षा केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। विद्यार्थियों और अभिभावकों से भी अनुरोध है कि अंकों का अनावश्यक दबाव न बनाएं। आत्मविश्वास, अनुशासन और संतुलित दिनचर्या के साथ पढ़ाई करने वाला हर विद्यार्थी सफलता की ओर निश्चित रूप से आगे बढ़ता है।


