Bundi : पेड़ की छांव के साथ खिसकती है आठ कक्षाएं

Bundi : पेड़ की छांव के साथ खिसकती है आठ कक्षाएं

सुवासा. तालेड़ा उपखंड के देलूंदा पंचायत के विनायका गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेंकक्षा कक्ष के अभाव में बच्चे खुले आसमान में पेड़ों के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने को मजबूर है। ग्रामीणों के द्वारा शिक्षा विभाग के अधिकारीयों, उपखंड अधिकारी, जिला कलक्टर विधायक, सांसद से शिकायत के बावजूद भी प्रशासन का भवन उपलब्ध कराने की ओर कोई ध्यान नहीं है, जिसके चलते पढ़ाई करने में असुविधा हो रही है। स्कूल में जब पत्रकार के द्वारा पेड़ के नीचे पढ़ रहे बच्चों के फोटो व स्कूल के फोटो ले रहा था तो इसका संस्था प्रधान के द्वारा विरोध किया गया। बाद में सीबीओ से बात करने के बाद स्कूल के द्वारा फोटो खींचने दिए गए।

पांच कमरों की आवश्यकता
जानकारी अनुसार यहां विनायका गांव में 1999 में प्राइमरी स्कूल खोला गया, जो बाद में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कमोन्नत हुआ। वर्तमान स्कूल में 62 विद्यार्थी अध्यनरत है। और यहां पर आठ अध्यापक नियुक्त है। स्कूल में पांच कमरे बने हुए थे, जिनमें से चार कमरे जमींदोज कर दिए गए। एक कमरा है वह भी बैठने लायक नहीं है। बारिश के समय छत टपकती है। कई बार ग्रामीणों ने इस समस्या को उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया। इस स्कूल में पूर्व में 200 से ज्यादा बच्चे अध्यनरत थे, जो जर्जर भवन के कारण बच्चों की संख्या घटकर 62 रह गई है। कक्षा कक्षों के अभाव में बच्चों को लंबे समय से पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूल में बच्चों को पढऩे के लिए पांच कमरों की आवश्यकता है।

फोटो नहीं ले सकते
स्कूल परिसर में कोई भी पत्रकार बिना संस्था प्रदान की अनुमति के बिना अंदर प्रवेश कर फोटो नहीं ले सकता। यह हमारे क्षेत्र के पीओ साहब के आदेश है। स्कूल परिसर में बने पांच कमरों में से तीन कमरे जमींदोज कर दिए गए हैं। एक कमरा सही है कक्षा कक्ष की कमी के कारण बच्चों को पेड़ के नीचे बैठा कर पढ़ाना पड़ रहा है समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत करा दिया गया है नये कमरे बने के बाद ही समस्या का समाधान हो सकता है।
मनीष पांचाल, प्रधानाध्यापक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, विनायका

नया भवन बने
स्कूल भवन नया बनना चाहिए। प्रशासन के द्वारा जर्जर भवनों को जमींदोज कर दिया गया है। स्कूल में बच्चों को पढ़ने के लिए कक्षा कक्ष का अभाव है। जिसके चलते बच्चे पेड़ों के नीचे बैठ करके पढ़ाई करने को मजबूर है। अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल में भेजना भी कम कर दिया गया है। आधे बच्चे ही स्कूल में पहुंच पा रहे हैं।
दिनेश मीणा, पंचायत प्रशासक, देलूंदा।

नहीं दिए आदेश
हमारे द्वारा विनायका स्कूल की समस्या को उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। समाधान उच्च अधिकारी को ही करना है। पत्रकार स्कूल में संस्था प्रधान की इजाजत के बिना अंदर प्रवेश नहीं कर सकते। इस प्रकार का कोई आदेश मेरे द्वारा नहीं दिया गया है।
मोतीलाल मीणा, पीईओ, देलूंदा।

मुख्यालय को बताया
विनायका गांव के स्कूल में कक्षा कक्ष का अभाव है। इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाएगा। जर्जर भवन की सूचना व कमरे जमींदोज की सूचना जिला मुख्यालय पर दी जा चुकी है।
अर्चना तंवर, सीबीईओ, तालेड़ा

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