बक्सर नगर परिषद के सफाई कर्मचारी मजदूरी में अनियमितता और लिखित आश्वासन के बावजूद वृद्धि न होने के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर कूड़े का अंबार लग गया है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। बड़ी संख्या में सफाई कर्मी नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर इकट्ठा हुए और जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार अपनी मांगों के लिए हड़ताल का सहारा लेना पड़ता है। बढ़ोतरी अब तक लागू नहीं की गई कर्मियों के अनुसार, साल 2025 में उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया था कि जनवरी 2026 से उनकी दैनिक मजदूरी में 100 रुपए की वृद्धि की जाएगी। हालांकि, यह बढ़ोतरी अब तक लागू नहीं की गई है। हड़ताली सफाई कर्मियों ने बताया कि 11 दिसंबर को एक निर्णय लिया गया था, जिसके तहत सफाई कर्मियों और सुपरवाइजरों के दैनिक पारिश्रमिक में श्रम संसाधन विभाग के न्यूनतम दैनिक पारिश्रमिक के अनुरूप 100 रुपये की वृद्धि जनवरी 2026 के भुगतान से की जानी थी। यह बात लिखित रूप में दी गई थी। पुरानी दर से ही भुगतान करने का दावा इसके बावजूद, उन्हें पुरानी दर से ही भुगतान किया जा रहा है। कुछ कर्मियों को प्रतिदिन 350 रुपये तो कुछ को 400 रुपये मजदूरी मिल रही थी, जिसमें 100 रुपये बढ़ाने का वादा किया गया था। सफाई कर्मी पवन कुमार ने कहा, “हमलोग सिर्फ नियम के अनुसार तय मजदूरी की मांग कर रहे हैं। लिखित देने के बाद भी पैसा नहीं बढ़ाया गया। कई मजदूरों को तीन-तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली है।” एक अन्य कर्मी तन्नू कुमार ने बताया कि उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे किराया और परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। ”एनजीओ मनमाने तरीके से काम करा रही” सफाई कर्मियों का आरोप है कि सफाई कार्य देख रही एनजीओ मनमाने तरीके से काम करा रही है और भुगतान में पारदर्शिता का अभाव है। मौके पर मौजूद नगर परिषद के कर्मियों ने मजदूरों को समझा-बुझाकर काम पर लौटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। बक्सर नगर परिषद के सफाई कर्मचारी मजदूरी में अनियमितता और लिखित आश्वासन के बावजूद वृद्धि न होने के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर कूड़े का अंबार लग गया है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। बड़ी संख्या में सफाई कर्मी नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर इकट्ठा हुए और जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि उन्हें बार-बार अपनी मांगों के लिए हड़ताल का सहारा लेना पड़ता है। बढ़ोतरी अब तक लागू नहीं की गई कर्मियों के अनुसार, साल 2025 में उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया था कि जनवरी 2026 से उनकी दैनिक मजदूरी में 100 रुपए की वृद्धि की जाएगी। हालांकि, यह बढ़ोतरी अब तक लागू नहीं की गई है। हड़ताली सफाई कर्मियों ने बताया कि 11 दिसंबर को एक निर्णय लिया गया था, जिसके तहत सफाई कर्मियों और सुपरवाइजरों के दैनिक पारिश्रमिक में श्रम संसाधन विभाग के न्यूनतम दैनिक पारिश्रमिक के अनुरूप 100 रुपये की वृद्धि जनवरी 2026 के भुगतान से की जानी थी। यह बात लिखित रूप में दी गई थी। पुरानी दर से ही भुगतान करने का दावा इसके बावजूद, उन्हें पुरानी दर से ही भुगतान किया जा रहा है। कुछ कर्मियों को प्रतिदिन 350 रुपये तो कुछ को 400 रुपये मजदूरी मिल रही थी, जिसमें 100 रुपये बढ़ाने का वादा किया गया था। सफाई कर्मी पवन कुमार ने कहा, “हमलोग सिर्फ नियम के अनुसार तय मजदूरी की मांग कर रहे हैं। लिखित देने के बाद भी पैसा नहीं बढ़ाया गया। कई मजदूरों को तीन-तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली है।” एक अन्य कर्मी तन्नू कुमार ने बताया कि उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे किराया और परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। ”एनजीओ मनमाने तरीके से काम करा रही” सफाई कर्मियों का आरोप है कि सफाई कार्य देख रही एनजीओ मनमाने तरीके से काम करा रही है और भुगतान में पारदर्शिता का अभाव है। मौके पर मौजूद नगर परिषद के कर्मियों ने मजदूरों को समझा-बुझाकर काम पर लौटाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।


