शरीर का ये अदृश्य अंग है ‘शुगर की फैक्ट्री, क्या यही है डायबिटीज का हाई रिस्क?’

शरीर का ये अदृश्य अंग है ‘शुगर की फैक्ट्री, क्या यही है डायबिटीज का हाई रिस्क?’

MP News Diabetes Reversal: अक्सर हम डायबिटीज की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान इंसुलिन और पैन्क्रियाज पर होता है। लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस ने अब एक और बड़ा खुलासा किया है। जिसके मुताबिक आपकी सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन कोई और है… क्या आप जानना चाहते हैं कि इस विलेन का नाम क्या है? आखिर कौन है ये नया दुश्मन… डायबिटीज का क्या है इससे सीधा कनेक्शन? पढ़ें Diabetes Reversal सीरीज का Episode 6… संजना कुमार की इस रिपोर्ट को पढ़कर खुल जाएंगी आंखें…

आपकी सेहत का असली विलेन है आपका लीवर…। मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में आज एक बहुत बड़ी आबादी फैटी लीवर की समस्या से जूझ रही है। आजकल अलकॉहलिक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि नॉन-अलकॉहलिक फैटी लीवर डिजीज बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरी है। आप शराब पिएं या न पिएं अगर आपका लीवर फैटी है, तो आप जल्द ही टाइप 2 डायबिटीज समेत कई गंभीर बीमारियों के चक्रव्यूह में फंस चुके हैं।

लीवर का काम क्या है?

लीवर का काम है खून में शुगर के स्तर को मैनेज करना। जब हम खाना खाते हैं, तो लीवर अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करता है। लेकिन जब हमारी डाइट में फ्रुक्टोज (कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड) और मैदा बढ़ जाता है, तो लीवर के पास जगह कम पड़ जाती है। नतीजा? लीवर इस तरह की अतिरिक्त ऊर्जा को फैट (चर्बी) बनाकर अपने ही ऊपर लपेटने लगता है।

एम्स और लैंसेट की रिपोर्ट्स का बड़ा खुलासा

एम्स की हालिया स्टडी बताती है कि भारत में 38% से ज्यादा बच्चों में फैटी लीवर की समस्या पाई गई है। जबकि कुल संख्या के मुताबिक 70 फीसदी लोग इसके शिकार है। वहीं द लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों में ‘विसेरल फैट’ (अंगों के आसपास की चर्बी) ज्यादा होती है।

कई लोग बाहर से पतले दिखते हैं, लेकिन उनका लीवर फैटी होता है। इसे लीन डायबिटीज कहा जाता है। यानी, अगर आपकी कमर का घेरा बढ़ रहा है, तो समझ लीजिए कि आपके लीवर में शुगर से संबंधित समस्याएं शुरू हो चुकी हैं।

फ्रुक्टोज का खतरनाक खेल

मीठा जहर चीनी (सुक्रोज) दो चीजों से बनी है, ग्लूकोज और फ्रुक्टोज। ग्लूकोज को पूरा शरीर इस्तेमाल कर लेता है। लेकिन फ्रुक्टोज का प्रोसेस करने की जिम्मेदारी सिर्फ लीवर की है। जब आप एक कैन कोल्ड ड्रिंक या एनर्जी ड्रिंक पीते हैं, तो वह सीधा लीवर पर हमला करती है। लीवर इसे तुरंत फैट में बदल देता है। यह फैट लीवर में सूजन पैदा कर देती है, जो आगे चलकर टाइप टू डायबिटीज और फिर सिरोसिस का कारण बनती है।

फैटी लीवर और बढ़ती शुगर शरीर कैसे करता है अलर्ट?

फैटी लीवर और शुगर का अलर्ट बेहद खामोश से होता है, आपको खुद पहचानना होगा कि आपके शरीर में क्या बदलाव आ रहे हैं?

-पेट का घेरा(central obesity) अगर आपके हाथ-पैर पतले हैं, लेकिन सिर्फ पेट निकला हुआ है। तो अलर्ट हो जाएं।

-अकेंथोसिस निगरिकन्स, गर्दन, बगल या कोहनियों पर गहरा कालापन। यह इस बात का सबूत है कि आपका लीवर फैट का शिकार हो चुका है। अब इंसुलिन काम नहीं कर पा रहा।

-दोपहर की थकान खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा सुस्ती महसूस होना फैटी लीवर का बड़ा लक्षण है।

-दाहिने हिस्से में भारीपन पसलियों के ठीक नीचे हल्का भारीपन महसूस होना। हल्का या तेज दर्द होना।

फैटी लीवर के बाद डायबिटीज का हाई रिस्क किसे?

अगर आपके परिवार में पहले से ही शुगर की हिस्ट्री रही है, तो फैटी लीवर के बाद आपको डायबिटीज का खतरा दोगुना है। वहीं एक बार फैटी लीवर होने और समय पर ट्रीटमेंट शुरू न किया जाए तो 5 साल में प्री-डायबिटीक और 10 साल में डायबिटीज आपको अपने शिकंजे में ले सकती है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई स्क्रीनिंग में करीब 1.29 लोगों में फैटी लीवर के लक्षण पाए गए, उनकी जांच की गई और जरूरी सलाह दी गई। वहीं भारत में यह बीमारी तेजी से बढ़ी है। 35-40 फीसदी वयस्क फैटी लीवर(NAFLD) से जूझ रहे हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में फैटी लीवर के मामले 40-50 करोड़ हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। डॉ. अल्पेश गोयल कहते हैं कि फैटी लीवर बेहद गंभीर बीमारी है, जो अपने साथ सौ बीमारियां साथ लेकर आती है। जिनमें डायबिटीज का हाई रिस्क भी शामिल है। उनका कहना है कि अपनी लाइफस्टाइल सुधारकर और अपने घर की डाइट के आधार पर ही कैलोरीज में बदलाव करते हुए फैटी लीवर और डायबिटीज से बचा सकता है।

फैक्ट
फैटी लीवर यानी नॉन एल्कॉहलिक फैटी लीवर डिजीज अक्सर इंसुलिन रेजिज्टेंस से जुड़ा होता है। अगर शरीर लंबे समय तक इंसुलिन बनाता रहता है, तो पैंक्रियाज थकने लगता है और वहीं से शुगर स्थायी रूप से बढ़ने लगती है।

आज डायबिटीज रिवर्सल के एपिसोड 6 में आपने जाना कि कैसे फैटी लीवर शुगर का हाई रिस्क बढ़ाता है। लेकिन आपको ध्यान रखना चाहिए कि ये केवल एक रिस्क फैक्टर है, गारंटी नहीं। इसलिए समय पर फैटी लीवर का इलाज कराएं और स्वस्थ रहें। अगले एपिसोड में हम आपको बताएंगे शुगर टेस्ट से रिलेटेड उन सभी सवालों के जवाब जो आप जानना चाहते हैं। पढ़ने के लिए जुड़े रहिए हेल्थ के इस सफर में patrika.com के साथ…

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