मुंगेर विश्वविद्यालय में सीनेट बैठक के दौरान कुलपति प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव घनश्याम राय द्वारा राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र संगठनों ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर चूक बताते हुए दोनों अधिकारियों से सार्वजनिक माफी और कार्रवाई की मांग की है। ABVP ने किया विरोध, कहा- जहां हुआ अपमान, वहीं करेंगे सम्मान सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय मुख्य द्वार के समीप सैकड़ों की संख्या में जुटकर सामूहिक राष्ट्रगान गाया। यह कार्यक्रम जहां हुआ राष्ट्रगान का अपमान, वहीं करेंगे हम उसका सम्मान शीर्षक से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में परिषद के राष्ट्रीय कला मंच के नगर प्रमुख राज अभिजीत कुमार के नेतृत्व में शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और छात्राओं ने पूरी नियमावली के साथ राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया। ABVP से जुड़े छात्रों ने कहा कि सीनेट बैठक में कुलपति और कुलसचिव द्वारा राष्ट्रगान के प्रति लापरवाही और असम्मान दिखाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हमारे विरोध को बदनाम करने का प्रयास न करें- ABVP छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी आवाज को दबाने और आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। ABVP नेताओं ने कहा, कुलपति और कुलसचिव का कृत्य छात्र संगठनों के आंदोलन से जोड़ने का प्रयास पूरी तरह असफल और भ्रामक है। हमने पहले ही 12 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सीनेट बैठक के विरोध की घोषणा कर दी थी। ABVP का आरोप है कि कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अकादमिक शिथिलता और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। सिंडिकेट सदस्य ने कोडिंग टेंडर में अनियमितता का लगाया आरोप सिंडिकेट सदस्य भारत सिंह जोशी ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक सम्मानित सीनेटर ने पेमेंट गेटवे द्वारा अधिक शुल्क वसूले जाने और मूल्यांकन के लिए परीक्षा पुस्तिका की कोडिंग के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान की अनियमितता का मामला उजागर किया है। उन्होंने कुलपति से पूछा, कोडिंग के लिए हुए टेंडर की पूरी प्रक्रिया के दस्तावेज उपलब्ध कराएं। क्या आप प्रमाणित कर सकते हैं कि इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है? कुलसचिव ने खुद पर धूल फिंकवाकर विरोध को बदनाम किया- आरोप भारत सिंह जोशी ने कुलसचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, कुलसचिव यह साबित नहीं कर सकते कि उन पर धूल फेंकने का काम ABVP के छात्रों ने किया। उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने एक व्यक्तिगत छात्र से स्वयं पर धूल फिंकवाया, ताकि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को बदनाम किया जा सके।’ उन्होंने साफ कहा कि धूल फेंकने वाले युवक का परिषद से कोई संबंध नहीं है। माफी और कार्रवाई की मांग तेज, प्रशासन पर बढ़ा दबाव छात्र संगठनों और सिंडिकेट सदस्यों के लगातार विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
ABVP ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कुलपति और कुलसचिव सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और राष्ट्रगान के अनादर के लिए ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन मौन, छात्रों में नाराजगी घटना के 48 घंटे बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
छात्रों का कहना है कि राष्ट्रगान का अपमान राष्ट्रीय भावनाओं से खिलवाड़ है, और विश्वविद्यालय प्रशासन का मौन रहना संदेह पैदा करता है। मुंगेर विश्वविद्यालय में सीनेट बैठक के दौरान कुलपति प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव घनश्याम राय द्वारा राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र संगठनों ने इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर चूक बताते हुए दोनों अधिकारियों से सार्वजनिक माफी और कार्रवाई की मांग की है। ABVP ने किया विरोध, कहा- जहां हुआ अपमान, वहीं करेंगे सम्मान सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय मुख्य द्वार के समीप सैकड़ों की संख्या में जुटकर सामूहिक राष्ट्रगान गाया। यह कार्यक्रम जहां हुआ राष्ट्रगान का अपमान, वहीं करेंगे हम उसका सम्मान शीर्षक से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में परिषद के राष्ट्रीय कला मंच के नगर प्रमुख राज अभिजीत कुमार के नेतृत्व में शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और छात्राओं ने पूरी नियमावली के साथ राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया। ABVP से जुड़े छात्रों ने कहा कि सीनेट बैठक में कुलपति और कुलसचिव द्वारा राष्ट्रगान के प्रति लापरवाही और असम्मान दिखाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हमारे विरोध को बदनाम करने का प्रयास न करें- ABVP छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी आवाज को दबाने और आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। ABVP नेताओं ने कहा, कुलपति और कुलसचिव का कृत्य छात्र संगठनों के आंदोलन से जोड़ने का प्रयास पूरी तरह असफल और भ्रामक है। हमने पहले ही 12 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सीनेट बैठक के विरोध की घोषणा कर दी थी। ABVP का आरोप है कि कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अकादमिक शिथिलता और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। सिंडिकेट सदस्य ने कोडिंग टेंडर में अनियमितता का लगाया आरोप सिंडिकेट सदस्य भारत सिंह जोशी ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक सम्मानित सीनेटर ने पेमेंट गेटवे द्वारा अधिक शुल्क वसूले जाने और मूल्यांकन के लिए परीक्षा पुस्तिका की कोडिंग के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान की अनियमितता का मामला उजागर किया है। उन्होंने कुलपति से पूछा, कोडिंग के लिए हुए टेंडर की पूरी प्रक्रिया के दस्तावेज उपलब्ध कराएं। क्या आप प्रमाणित कर सकते हैं कि इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है? कुलसचिव ने खुद पर धूल फिंकवाकर विरोध को बदनाम किया- आरोप भारत सिंह जोशी ने कुलसचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, कुलसचिव यह साबित नहीं कर सकते कि उन पर धूल फेंकने का काम ABVP के छात्रों ने किया। उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने एक व्यक्तिगत छात्र से स्वयं पर धूल फिंकवाया, ताकि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को बदनाम किया जा सके।’ उन्होंने साफ कहा कि धूल फेंकने वाले युवक का परिषद से कोई संबंध नहीं है। माफी और कार्रवाई की मांग तेज, प्रशासन पर बढ़ा दबाव छात्र संगठनों और सिंडिकेट सदस्यों के लगातार विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
ABVP ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कुलपति और कुलसचिव सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और राष्ट्रगान के अनादर के लिए ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन मौन, छात्रों में नाराजगी घटना के 48 घंटे बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
छात्रों का कहना है कि राष्ट्रगान का अपमान राष्ट्रीय भावनाओं से खिलवाड़ है, और विश्वविद्यालय प्रशासन का मौन रहना संदेह पैदा करता है।


