“कुछ दिन पहले बेटे का फोन आया था, बोला मां, यहां काम बहुत खतरनाक है और मालिक पैसे भी नहीं दे रहा। मैंने कहा था बेटा होली में घर आ जाना, पैसे नहीं मिले तो हम भेज देंगे। लेकिन आज फोन आया कि मेरा बेटा नहीं रहा…” यह कहते-कहते सुजांत की मां रोने लगती हैं। राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक इलाके में पटाखा और केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के 6 मजदूरों की जान ले ली। कई शव इतने जल गए कि पहचान मुश्किल हो गई है। गांवों में मातम पसरा हुआ है। मृतकों में सिकारगंज के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, हरसिद्धि के मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश शामिल हैं। मोतिहारी प्रशासन का कहना है कि कई शवों की पहचान अब तक पूरी तरह नहीं हो सकी है, इसके लिए डीएनए और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए पहचान की कोशिश की जा रही है। पहले घटना के दौरान की 2 तस्वीरें देखें… धमाके की सुबह, क्या-क्या हुआ… सोमवार सुबह राजस्थान के भिवाड़ी के खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में रोज की तरह काम चल रहा था। फैक्ट्री के अंदर मजदूर अपने-अपने काम में लगे थे। अचानक करीब साढ़े नौ बजे एक जोरदार धमाका हुआ जिसने पूरे औद्योगिक इलाके को हिला दिया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोग घबराकर बाहर निकल आए। कुछ ही सेकंड में फैक्ट्री से काला धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें आसमान तक पहुंचने लगीं। अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस गश्ती दल ने धुआं उठते देखा और तुरंत मौके पर पहुंच गया। रेस्क्यू शुरू हुआ, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने में घंटों लग गए। जब तक दमकल और रेस्क्यू टीम अंदर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई शव पूरी तरह जल चुके थे, कई जगह शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। रेस्क्यू टीम को बॉडी पार्ट्स तक पॉलीथीन में इकट्ठा करने पड़े। अधिकारियों के मुताबिक धमाका बेहद तेज था और आग ने मजदूरों को पलभर में घेर लिया। पीड़ित परिवारों का दर्द पढ़िए… मौसी से कहा था- होली में घर आऊंगा
सुजांत की मां बताती हैं कि कुछ दिन पहले बेटे ने फोन कर कहा था कि काम बहुत खतरनाक है और मालिक पैसे भी नहीं दे रहा। उन्होंने बेटे से कहा था कि होली में घर आ जाए, पैसा नहीं मिला तो घर से भेज देंगे। बेटे ने घर आने का वादा किया था, लेकिन अब उसकी मौत की खबर आई है। सुजांत की उम्र मात्र 20 साल थी और वह तीन भाइयों में मंझला था। तीन दिन पहले ही उसने मौसी से कहा था कि वह 20 तारीख को होली मनाने घर आएगा। परिवार का गुजारा कैसे होगा, समझ नहीं आ रहा
सुजांत के पिता शिव पासवान का दर्द शब्दों में नहीं समा रहा। वे कहते हैं कि लोग अपने बच्चों को कमाने बाहर भेजते हैं, लेकिन पैसा नहीं आता, उनका शव जरूर लौट आता है। उनका कहना है कि अब परिवार का गुजारा कैसे होगा, यह समझ नहीं आ रहा। मिंटू के घर पर सन्नाटा पसरा
मिंटू की शादी हो चुकी थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं जो अभी स्कूल भी नहीं जाते। परिवार का कहना है कि वह घर का इकलौता सहारा था। अब उसके जाने के बाद पूरा परिवार टूट गया है। परिवार ने बताया कि पिछले दो से तीन साल से वह राजस्थान में काम कर रहा था। पहले वह बोरा फैक्ट्री में काम करता था, लेकिन ज्यादा कमाई की उम्मीद में पटाखा फैक्ट्री में चला गया। उसे मजदूरी कितनी मिलती थी, इसकी पूरी जानकारी घरवालों को नहीं थी, लेकिन अक्सर वे फोन पर कहते थे कि मालिक पैसा नहीं देता। गांवों में शवों का इंतजार हो रहा
मोतिहारी के गांवों में इस समय लोग अपने स्वजनों के शवों का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने बताया है कि शव बुधवार तक पैतृक गांव पहुंच सकते हैं, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांवों में हर घर में मातम पसरा है घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। “कुछ दिन पहले बेटे का फोन आया था, बोला मां, यहां काम बहुत खतरनाक है और मालिक पैसे भी नहीं दे रहा। मैंने कहा था बेटा होली में घर आ जाना, पैसे नहीं मिले तो हम भेज देंगे। लेकिन आज फोन आया कि मेरा बेटा नहीं रहा…” यह कहते-कहते सुजांत की मां रोने लगती हैं। राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक इलाके में पटाखा और केमिकल फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के 6 मजदूरों की जान ले ली। कई शव इतने जल गए कि पहचान मुश्किल हो गई है। गांवों में मातम पसरा हुआ है। मृतकों में सिकारगंज के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, हरसिद्धि के मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश शामिल हैं। मोतिहारी प्रशासन का कहना है कि कई शवों की पहचान अब तक पूरी तरह नहीं हो सकी है, इसके लिए डीएनए और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए पहचान की कोशिश की जा रही है। पहले घटना के दौरान की 2 तस्वीरें देखें… धमाके की सुबह, क्या-क्या हुआ… सोमवार सुबह राजस्थान के भिवाड़ी के खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में रोज की तरह काम चल रहा था। फैक्ट्री के अंदर मजदूर अपने-अपने काम में लगे थे। अचानक करीब साढ़े नौ बजे एक जोरदार धमाका हुआ जिसने पूरे औद्योगिक इलाके को हिला दिया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोग घबराकर बाहर निकल आए। कुछ ही सेकंड में फैक्ट्री से काला धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें आसमान तक पहुंचने लगीं। अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस गश्ती दल ने धुआं उठते देखा और तुरंत मौके पर पहुंच गया। रेस्क्यू शुरू हुआ, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाने में घंटों लग गए। जब तक दमकल और रेस्क्यू टीम अंदर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई शव पूरी तरह जल चुके थे, कई जगह शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। रेस्क्यू टीम को बॉडी पार्ट्स तक पॉलीथीन में इकट्ठा करने पड़े। अधिकारियों के मुताबिक धमाका बेहद तेज था और आग ने मजदूरों को पलभर में घेर लिया। पीड़ित परिवारों का दर्द पढ़िए… मौसी से कहा था- होली में घर आऊंगा
सुजांत की मां बताती हैं कि कुछ दिन पहले बेटे ने फोन कर कहा था कि काम बहुत खतरनाक है और मालिक पैसे भी नहीं दे रहा। उन्होंने बेटे से कहा था कि होली में घर आ जाए, पैसा नहीं मिला तो घर से भेज देंगे। बेटे ने घर आने का वादा किया था, लेकिन अब उसकी मौत की खबर आई है। सुजांत की उम्र मात्र 20 साल थी और वह तीन भाइयों में मंझला था। तीन दिन पहले ही उसने मौसी से कहा था कि वह 20 तारीख को होली मनाने घर आएगा। परिवार का गुजारा कैसे होगा, समझ नहीं आ रहा
सुजांत के पिता शिव पासवान का दर्द शब्दों में नहीं समा रहा। वे कहते हैं कि लोग अपने बच्चों को कमाने बाहर भेजते हैं, लेकिन पैसा नहीं आता, उनका शव जरूर लौट आता है। उनका कहना है कि अब परिवार का गुजारा कैसे होगा, यह समझ नहीं आ रहा। मिंटू के घर पर सन्नाटा पसरा
मिंटू की शादी हो चुकी थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं जो अभी स्कूल भी नहीं जाते। परिवार का कहना है कि वह घर का इकलौता सहारा था। अब उसके जाने के बाद पूरा परिवार टूट गया है। परिवार ने बताया कि पिछले दो से तीन साल से वह राजस्थान में काम कर रहा था। पहले वह बोरा फैक्ट्री में काम करता था, लेकिन ज्यादा कमाई की उम्मीद में पटाखा फैक्ट्री में चला गया। उसे मजदूरी कितनी मिलती थी, इसकी पूरी जानकारी घरवालों को नहीं थी, लेकिन अक्सर वे फोन पर कहते थे कि मालिक पैसा नहीं देता। गांवों में शवों का इंतजार हो रहा
मोतिहारी के गांवों में इस समय लोग अपने स्वजनों के शवों का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने बताया है कि शव बुधवार तक पैतृक गांव पहुंच सकते हैं, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांवों में हर घर में मातम पसरा है घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है।


