नगर निगम उदयपुर सहित प्रदेशभर में नगर निकाय चुनाव अप्रैल में प्रस्तावित हैं। परिसीमन के बाद नगर निगम उदयपुर में 70 की जगह 80 वार्डों में मतदान होगा। वार्ड बढ़ने से सियासी समीकरण बदले हैं। भाजपा-कांग्रेस तैयारियों में जुट गई हैं। 1994 से लगातार छह चुनाव जीतकर निगम बोर्ड पर काबिज भाजपा इस बार आंतरिक असंतोष के कारण दबाव में है। हाल ही में पार्टी के एक पूर्व पार्षद के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ है। पुलिस जांच जारी है। वहीं भाजपा से जुड़े एक अधिवक्ता की गिरफ्तारी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी हलकों में पुलिस कार्रवाई की गति और प्राथमिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी मामलों में विधिसम्मत कार्रवाई हो रही है। इन घटनाओं के बीच अब शहर कांग्रेस ने भाजपा नेता की गिरफ्तारी और कथित एकतरफा कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन की घोषणा की है। भाजपा : एक साल से जारी है संगठनात्मक असंतोष
भाजपा में एक वर्ष से अंतर्कलह की स्थिति है। शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ की कार्यकारिणी में कुछ वरिष्ठ नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों को स्थान नहीं मिलने से असंतोष है। हाल के सार्वजनिक आयोजनों और उच्च पदस्थ नेताओं के शहर आगमन के दौरान भी संगठनात्मक एकजुटता नहीं दिखी। इससे पार्टी की एकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस : संगठन विस्तार चल रहा, राठौड़ को फिर कमान
प्रदेश नेतृत्व ने हाल ही फतहसिंह राठौड़ को फिर से शहर कांग्रेस की कमान सौंपी है। राठौड़ ने नई कार्यकारिणी के लिए नाम प्रदेश नेतृत्व को भेजने की पुष्टि की है। हालांकि औपचारिक घोषणा बाकी है। कांग्रेस का कहना है कि वह भाजपा के छह चुनावों से बने गढ़ को इस बार चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। बदले समीकरण 80 वार्डों में चुनाव होने से नए चेहरे और स्थानीय समीकरण अहम होंगे। भाजपा अपना गढ़ बचाने की चुनौती से जूझ रही है, कांग्रेस संगठनात्मक पुनर्संरचना व मुद्दा-आधारित रणनीति के सहारे चुनावी मैदान में उतरेगी। आगामी हफ्तों में उम्मीदवार चयन, संगठनात्मक एकजुटता जैसे कारक चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।


