नवजात की तबीयत बिगड़ने पर छठी मंजिल तक ले जाने को लिफ्ट का सहारा, सीढ़ियां तो बनी हैं, लेकिन स्ट्रेचर के साथ ले जाना मुश्किल

नवजात की तबीयत बिगड़ने पर छठी मंजिल तक ले जाने को लिफ्ट का सहारा, सीढ़ियां तो बनी हैं, लेकिन स्ट्रेचर के साथ ले जाना मुश्किल

राजन गोसाईं | अमृतसर गुरु नानक देव अस्पताल में जच्चा-बच्चा के लिए बनाए गए बेबे नानकी वार्ड व्यवस्था में खामियां सामने आ रही हैं। वार्ड में नवजात शिशुओं की इमरजेंसी 6वीं मंजिल पर है, जबकि लेबर रूम पहली मंजिल पर बनाया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि पूरी बिल्डिंग में कहीं भी रैम्प की व्यवस्था नहीं है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित और तेजी से शिफ्ट करने में भारी दिक्कतें आती हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जीएनडीएच की इमरजेंसी वार्ड के रैंप बेबे नानकी वार्ड के साथ जोड़े गए हैं, लेकिन आपात स्थिति में लोग सीढ़ियों का उपयोग कर हांफने लग जाते हैं। 50 साल के बाली राम का कहना है कि रिश्तेदार के यहां एक नवजात शिशु का जन्म हुआ है जो बेबे नानकी के वार्ड नंबर 4 नंबर में दाखिल है। वहीं लिफ्ट कई बार तो बंद हो जाती है। छठी मंजिल से नीचे से ऊपर जाने में परेशानी हुई। इसी तरह शंकर नामक युवक ने बताया कि उनके घर बच्चे ने जन्म लिया है और गायनी वार्ड नंबर 5 में दाखिल है। उन्हें भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की इमरजेंसी वार्ड ग्राउंड फ्लोर पर हो । सुनीता और उनकी रिश्तेदार हरजिंदर का कहना कि वार्ड 5 में दाखिल थी। दाखिल होने से छुट्टी तक उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एक मरीज की अडेंटेंड कविता ने कहना इमरजेंसी ग्राउंड फ्लोर पर बनाया जाना चाहिए। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कर्मजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर में 8 नई वार्डों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इन वार्डों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं और इन्हें जल्द ही शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नवजात शिशुओं की इमरजेंसी को बेबे नानकी वार्ड की ग्राउंड फ्लोर पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। डॉ. सिंह के मुताबिक नई 8 वार्डों में से 4 वार्ड आर्थो वार्ड को दी जाएंगी। जबकि शेष 4 में से 1 वार्ड पोस्ट सर्जरी आईसीयू, 1 वार्ड डिपार्टमेंट ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन, 1 वार्ड मेडिसिन विभाग को, 1 वार्ड किडनी डायलसिस विभाग को दी जाएगी। बेबे नानकी वार्ड में रोजाना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि अचानक नवजात की तबीयत बिगड़ जाए तो उसे छठी मंजिल तक ले जाने के लिए केवल लिफ्ट का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल परिसर में सीढ़ियां तो बनी हैं, लेकिन स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के साथ सीढ़ियों का इस्तेमाल करना मुश्किल है। यदि किसी कारणवश लिफ्ट खराब हो जाए या बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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