भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में रबी की फसल सरसों के साथ कई किसान खरीफ की फसल मक्का भी लेकर आ रहे हैं। इस समय सरसों की रोज 1500 से 2000 बोरी की आवक है। सरसों के किसानों को 5500 से 6400 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। सीजन के दौरान मक्का 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिका, लेकिन किसानों ने बाद में बेचने पर अधिक भाव मिलने की उम्मीद में फसल को रोक लिया और अब बेचने ला रहे, जो 1600 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है। यानि प्रति क्विंटल 400 रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। सीजन में रोज 4 से 5 हजार बोरी मक्का रोज मंडी पहुंचता था, जो घटकर करीब 500 बोरी रह गया है। व्यापारियों का कहना है कि भीलवाड़ा का मक्का पंजाब व हरियाणा पहुंचता है, जहां पोल्ट्री फार्म, पशु आहार और एथेनॉल ऑयल बनाने के काम आ रहा है, लेकिन इस साल अच्छी बारिश से प्रोडक्शन बढ़ने, मांग घटने और बारिश से भीगने से मक्का की क्वालिटी खराब होने से भावों में कमी हुई है। कृषि मंडी में 20 जनवरी बाद मक्का की आवक नगण्य हो जाती है, लेकिन वर्तमान में फ फरवरी आधी बीतने के बावजूद रोज 500 बोरी की आवक है। इस बार रबी की फसलों गेहूं, सरसों व चना की बंपर पैदावार की संभावना है। ऐसे में आमजन को खाद्यान यानि गेहूं के साथ ही सरसों का तेल और चना की दाल भी उचित कीमत पर मिलने की संभावना है। क्वालिटी अच्छी नहीं होने से राजस्थान के मक्का की मांग घटी- मानसून के दौरान बारिश की अधिकता से भीलवाड़ा सहित अन्य जिलों में भीगने से मक्का की क्वालिटी खराब हो गई। खाद्यान व्यापार संघ के पूर्व महासचिव हेमंत बाबेल के अनुसार महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मक्का की क्वालिटी अच्छी होने से पंजाब और हरियाणा की पोल्ट्री फार्म वालों ने राजस्थान के बजाय महाराष्ट्र के मक्का की खरीद को प्राथमिकता दी। ऐसे में हमारे मक्का की डिमांग घटने से भावों में कमी हुई है। हर साल मक्का 20 दिसंबर तक मंडी में आता है, लेकिन इस बार फरवरी आधी बीतने के करीब होने पर भी मंडी में मक्का आ रहा है। मंडी में रबी की फसल सरसों की एक फरवरी से आवक शुरू हो गई। चना की आवक मार्च आखिर तक होने की उम्मीद है।


