पटना | आईजीआईएमएस में कैंसर मरीजों को जल्द ही अत्याधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में साइबर नाइफ मशीन लगाई जाएगी। साइबर नाइफ दुनिया की पहली और एकमात्र ऐसी रोबोटिक रेडियो सर्जरी प्रणाली है, जिससे शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर और गैर-कैंसर वाले ट्यूमर को बिना चीरा लगाए निकाला जा सकेगा। साथ ही इस मशीन की मदद से बिना चीरा लगाए दिमाग के पिछले हिस्से में बने ट्यूमर का इलाज हो सकेगा। इस तकनीक के कारण इलाज अपेक्षाकृत किफायती है। वहीं कई मामलों में मरीज को एक ही दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल सकेगी। सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीने में यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी। अभी बिहार आैर आसपास के राज्यों के मरीजों को इस तकनीक से इलाज कराने के लिए दिल्ली या मुंबई जाना पड़ता है, जहां निजी अस्पतालों में 3 से 5 लाख रुपए तक खर्च आता है। ब्रेन कैंसर और बिनाइन ट्यूमर का इलाज संभव : आईजीआईएमएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि साइबर नाइफ तकनीक में रोबोटिक आर्म से जुड़े लीनियर एक्सेलरेटर द्वारा सैकड़ों कोणों से विकिरण दिया जाता है, जिससे ट्यूमर पर सटीक असर होता है और मस्तिष्क के स्वस्थ हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचता है। करीब 3.5 सेंटीमीटर तक के ट्यूमर की रेडियो सर्जरी की जा सकती है। शुरुआती स्टेज के ब्रेन कैंसर और बिनाइन ट्यूमर के इलाज में यह कारगर है। ओपन सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी में भी यह तकनीक मददगार साबित होगी। साइबर नाइफ की कार्यप्रणाली | थ्रीडी इमेजिंग : सर्जरी से पहले मरीज के ट्यूमर की सटीक जानकारी मिलेगी। रोबोटिक आर्म : ट्यूमर के चारों ओर अलग-अलग कोणों से विकिरण दी जाती है। { रियल टाइम ट्रैकिंग : इलाज के दौरान रियल टाइम ट्रैकिंग संभव है। पटना | आईजीआईएमएस में कैंसर मरीजों को जल्द ही अत्याधुनिक इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। संस्थान के रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट में साइबर नाइफ मशीन लगाई जाएगी। साइबर नाइफ दुनिया की पहली और एकमात्र ऐसी रोबोटिक रेडियो सर्जरी प्रणाली है, जिससे शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर और गैर-कैंसर वाले ट्यूमर को बिना चीरा लगाए निकाला जा सकेगा। साथ ही इस मशीन की मदद से बिना चीरा लगाए दिमाग के पिछले हिस्से में बने ट्यूमर का इलाज हो सकेगा। इस तकनीक के कारण इलाज अपेक्षाकृत किफायती है। वहीं कई मामलों में मरीज को एक ही दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल सकेगी। सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीने में यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी। अभी बिहार आैर आसपास के राज्यों के मरीजों को इस तकनीक से इलाज कराने के लिए दिल्ली या मुंबई जाना पड़ता है, जहां निजी अस्पतालों में 3 से 5 लाख रुपए तक खर्च आता है। ब्रेन कैंसर और बिनाइन ट्यूमर का इलाज संभव : आईजीआईएमएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि साइबर नाइफ तकनीक में रोबोटिक आर्म से जुड़े लीनियर एक्सेलरेटर द्वारा सैकड़ों कोणों से विकिरण दिया जाता है, जिससे ट्यूमर पर सटीक असर होता है और मस्तिष्क के स्वस्थ हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचता है। करीब 3.5 सेंटीमीटर तक के ट्यूमर की रेडियो सर्जरी की जा सकती है। शुरुआती स्टेज के ब्रेन कैंसर और बिनाइन ट्यूमर के इलाज में यह कारगर है। ओपन सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी में भी यह तकनीक मददगार साबित होगी। साइबर नाइफ की कार्यप्रणाली | थ्रीडी इमेजिंग : सर्जरी से पहले मरीज के ट्यूमर की सटीक जानकारी मिलेगी। रोबोटिक आर्म : ट्यूमर के चारों ओर अलग-अलग कोणों से विकिरण दी जाती है। { रियल टाइम ट्रैकिंग : इलाज के दौरान रियल टाइम ट्रैकिंग संभव है।


