बालोद जिला मुख्यालय में जब खेल के लिए मैदान नहीं था, तब तत्कालीन पूर्व विधायक स्व. लोकेंद्र यादव एवं अरमान अश्क ने नगर के अग्रवाल परिवार से खेल मैदान के लिए जमीन मांगी। उस समय धर्म प्रकाश अग्रवाल ने खेल मैदान के लिए लगभग 4 एकड़ जमीन दान कर दी। साल 1990 के बाद से स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। 2006 में स्टेडियम का लोकार्पण किया गया। अग्रवाल परिवार की ही देन के कारण बालोद शहर को इतना बड़ा स्टेडियम मिला और यहां शहर के बच्चे अभ्यास करते हैं। लेकिन कुछ वर्षों से यह स्टेडियम सिर्फ बार-बार मरम्मत व खर्च करने का स्टेडियम बन गया है। दस साल में लगभग 2 करोड़ से भी ज्यादा की राशि खर्च की जा चुकी है। इसके बाद भी स्टेडियम को संवारा नहीं जा सका।
टूटा पैवेलियन, ड्रेसिंग रूम भी बदहाल
स्टेडियम के जीर्णोद्धार व मरम्मत के लिए भी नगर पालिका समय समय पर लाखों रुपए खर्च करती है। सच यह है कि नगर पालिका ने इस खेल मैदान की देखभाल की कोई योजना नहीं बनाई है। पैवेलियन एवं शेड टूटा हुआ है। ड्रेसिंग रूम का हाल बेहाल है।
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नाली टूटी, नेट प्रेक्टिस की जगह भी खराब
नगर पालिका के पार्षद व बालोद प्रीमियर लीग के चेयरमैन विनोद शर्मा ने कहा कि यह शहर का एकमात्र स्टेडियम है। इसे खेल के लायक बनाते तो अच्छा रहता। पालिका के आलावा जिला प्रशासन से भी मांग कर चुके हैं कि हर हाल में सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम को खेल के लायक बनाएं, लेकिन प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है।
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लाखों की घास लगाई थी, अब मैदान में बजरी गिट्टी फैली
तीन साल पहले ही स्टेडियम में घास लगाई गई थी, लेकिन मैदान में राष्ट्रीय पर्व पर बजरी गिट्टी डालना जरुरी रहता है। इसके तहत घास के ऊपर ही बजरी गिट्टी डाल दी गई, जिससे घास गायब है। बजरी गिट्टी जरूर दिखाई दे रही है। आखिर स्टेडियम की दशा कब सुधरेगी।
राज्य स्तरीय खेल का आयोजन नहीं
स्कूली खेल विभाग की एथलेटिक्स गेम की मेजबानी जिला मुख्यालय में नहीं हुई। दल्लीराजहरा में ही ज्यादा खेल के आयोजन हुए। दरअसल बालोद स्थिति सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम की मिट्टी तो पथरीली है। बजरी गिट्टी डाल कर इस जमीन को ठोस कर दिया है। यही वजह हैं खिलाड़ी यहां खेलने से हिचकते हैं।


