छत्तीसगढ़ के गांवों में पास्टर-एंट्री-बैन वाले होर्डिंग्स पर याचिका खारिज:SC ने हाईकोर्ट आदेश बरकरार रखा, HC ने कहा था- जबरन धर्मांतरण रोक होर्डिंग्स गलत नहीं

छत्तीसगढ़ के गांवों में पास्टर-एंट्री-बैन वाले होर्डिंग्स पर याचिका खारिज:SC ने हाईकोर्ट आदेश बरकरार रखा, HC ने कहा था- जबरन धर्मांतरण रोक होर्डिंग्स गलत नहीं

छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों में पादरियों और कथित धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक संबंधी होर्डिंग्स को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। याचिका में राज्य के कुछ गांवों में लगाए गए उन होर्डिंग्स पर आपत्ति जताई गई थी, जिनमें पादरियों और “धर्मांतरित ईसाइयों” के प्रवेश पर प्रतिबंध का उल्लेख बताया गया था। क्या था हाईकोर्ट का आदेश छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों में पादरियों और कथित धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक संबंधी होर्डिंग्स को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। याचिका में राज्य के कुछ गांवों में लगाए गए उन होर्डिंग्स पर आपत्ति जताई गई थी, जिनमें पादरियों और “धर्मांतरित ईसाइयों” के प्रवेश पर प्रतिबंध का उल्लेख बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए। उन्होंने पादरियों पर कथित हमलों से जुड़े एक अन्य लंबित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुद्दा व्यापक है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट में दायर याचिका का दायरा सीमित था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई नए तथ्य और दस्तावेज जोड़े गए हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। ‘हमारी परंपरा, हमारी विरासत’ प्रस्ताव पर विवाद याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कांकेर जिले में ग्राम पंचायतों को “हमारी परंपरा हमारी विरासत” शीर्षक से प्रस्ताव पारित करने का एक प्रारूप (फॉर्मेट) भेजा गया था। उनका कहना था कि इस प्रारूप का वास्तविक उद्देश्य ग्राम पंचायतों से ऐसा प्रस्ताव पारित करवाना था, जिसमें पादरियों और तथाकथित धर्मांतरित ईसाइयों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाई जाए। याचिका में यह भी दावा किया गया था कि कांकेर जिले के कम से कम आठ गांवों में ऐसे होर्डिंग्स लगाए गए थे, जिनमें इस तरह के प्रतिबंध का उल्लेख था। राज्य का पक्ष क्या रहा राज्य की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं ने केवल आशंका के आधार पर याचिका दायर की है कि होर्डिंग्स सरकारी अधिकारियों के कहने पर लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि यदि याचिकाकर्ताओं को गांव में प्रवेश से रोके जाने या किसी प्रकार के खतरे की आशंका है, तो वे पुलिस से सुरक्षा मांग सकते हैं। साथ ही, अदालत ने पहले वैधानिक उपाय अपनाने की सलाह भी दी थी। कांकेर में 14 गांवों तक फैला था विवाद प्रदेश के कांकेर जिले के 14 गांवों में पहले ही पास्टर और पादरियों के प्रवेश को लेकर विवाद हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, धर्म परिवर्तन की घटनाओं के बाद उन्होंने “परंपरा और संस्कृति की रक्षा” के नाम पर यह कदम उठाया था। जामगांव, जिसकी आबादी करीब 7 हजार है, उन गांवों में शामिल है। यहां 14–15 परिवारों द्वारा अघोषित रूप से ईसाई धर्म अपनाने की बात कही गई थी। इस अभियान की शुरुआत अगस्त 2025 में कुड़ाल गांव से हुई थी, जहां ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर गांव की सीमा पर पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद यह प्रस्ताव परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा सहित कुल 14 गांवों तक फैल गया। इन गांवों की सीमाओं पर लगाए गए बोर्डों में लिखा गया कि यह “बस्तर की परंपरा का गांव” है और पेशा अधिनियम 1996 के तहत ग्राम सभा को अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार है। आमाबेड़ा और बड़े तेवड़ा में भड़की थी हिंसा इसी घटनाक्रम के दौरान आमाबेड़ा और बड़े तेवड़ा क्षेत्र में हिंसा भी भड़की थी। बड़े तेवड़ा गांव में सरपंच द्वारा अपने पिता के शव को बाड़ी में दफनाने के बाद विवाद ने उग्र रूप ले लिया था। करीब तीन दिनों तक चले तनाव में आदिवासी और मसीही समुदाय आमने-सामने आ गए। आमाबेड़ा और बड़े तेवड़ा इलाके में बने तीन चर्च और प्रार्थना भवनों में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। हालात काबू करने पहुंची पुलिस भी हिंसा की चपेट में आ गई थी। इस दौरान एडिशनल एसपी, डीआईजी, एसआई और एएसआई समेत 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

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