धार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ अन्याय और वादाखिलाफी के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार दिनेश कुमार उइके को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह प्रदर्शन किसानों के साथ हो रहे अन्याय, सरकार की वादाखिलाफी और विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात के विरोध में किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि भारत सरकार द्वारा कृषि बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोलना भारतीय किसानों के साथ धोखा है। इससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को भी नुकसान पहुंच रहा है। बोले- आयात से उन्हें भारी नुकसान होगा
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि विदेशों से दुग्ध उत्पादों का आयात देश के दुग्ध उत्पादक किसानों की आजीविका पर सीधा हमला है। किसानों को पहले से ही अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में आयात से उन्हें भारी नुकसान होगा। यह कदम धार्मिक आस्था पर भी चोट करता है, क्योंकि विदेशों में गायों को मांसाहार कराया जाता है, जो सनातन परंपरा और भावी पीढ़ियों के संस्कारों के लिए घातक है। आरोप- सरकार अपने वादों से मुकर रही
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसानों ने अपनी जान गंवाई थी। उस समय केंद्र सरकार ने किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का वादा किया था। हालांकि, अब सरकार उसी वादे से मुकर रही है, जिसे किसानों के साथ विश्वासघात बताया गया है। कांग्रेसियों ने मध्यप्रदेश सरकार से किसानों से किए गए वादे को पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गेहूं की खरीदी ₹3000 प्रति क्विंटल की दर से सुनिश्चित की जाए। साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को बीमा कंपनियों के माध्यम से तत्काल और पूर्ण मुआवजा प्रदान किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


