धार. मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरुप को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट इंदौर में होने वाली सुनवाई फिलहाल टल गई है। सोमवार 16 फरवरी को हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका के बाद एएसआइ द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट खोलने पर सुनवाई होनाा थी। लेकिन वकीलों के न्यायालयीन कार्य से विरत रहने के कारण अब 18 फरवरी को सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि वकीलों की हड़ताल के कारण सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। मालूम हो कि, राजा भोज द्वारा निर्मित केन्द्रीय पुरातत्व विभाग अधीन स्मारक भोजशाला के धार्मिक स्वरुप को लेकर दायर याचिका में एक साल बाद फिर से सुनवाई शुरू होना है, सोमवार 16 फरवरी को हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता धार के आशीष गोयल सहित अन्य की और से दायर मुकदमें में कोर्ट के समक्ष एएसआई द्वारा प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट खुलना थी। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर स्मारक का धार्मिक स्वरुप तय होगा। हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की डबल बैंच में मुकदमा सुनवाई के लिए नियत किया गया। प्रकरण 62वें नंबर पर था, मामले में एचएफएफजे की और से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और उच्च न्यायालय के अभिभाषक विनय जोशी सुनवाई के दौरान मौजूद रहते।
98 दिन चला था सर्वे
भोजशाल के धार्मिक स्वरुप एवं अन्य विषयों को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की और से याचिका दायर की गई थीं। इस मामले में कोर्ट के निर्देश पर केन्द्रीय पुरातत्व विभाग की टीम ने हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के प्रमुख लोगों की मौजूदगी में करीब 98 दिनों तक भोजशाला में सर्वे किया था। इसमें हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की और से आशीष गोयल और बाबा कमाल मौलान वेलफेयर सोसायटी की और से अब्दुल समद पूरे सवा तीन महीने सर्वे के दौरान मौजूद रहे। प्रात: से संध्या तक सर्वे कार्य किया गया था। इस दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। एएसआई द्वारा 15 जुलाई 2024 को सर्वे रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी। इस मुकदमें को लेकर मुस्लिम पक्ष से अब्दुल समद ने कोर्ट में सर्वे को लेकर याचिका दायर की थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट को खोलने और फैसला सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के बगैर देने पर रोक लगा दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुनवाई
23 जनवरी 2026 को भोजशाला में शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी तिथि आने पर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की और से सुप्रीम कोर्ट में निर्विघ्न पूजा को लेकर एक आवेदन दिया था। इस आवेदन पर 22 जनवरी को कोर्ट ने पूजा और नमाज को लेकर एक आदेश पारित किया था। इसी आदेश में हाईकोर्ट में लंबित हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के मुकदमे पर पुन: जल्द सुनवाई करने के लिए कहा था। इस दौरान कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट खोलने एवं इसकी प्रतिया दोनों पक्षों को उपलब्ध कराने के लिए कहा था। 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली तारीख 16 फरवरी की लगी है और संभावना है कि सोमवार को सर्वे रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष खोल दी जाएगी। इससे सर्वे में क्या-क्या पाया गया यह पता चल जाएगा।
सन् 1034 में हुआ था निर्माण
भोजशाला पुरा महत्व की धरोहर होने के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ एक स्मारक है। इसका निर्माण सन् 1034 में महाराजा भोज द्वारा सरस्वती कंठाभरण स्थल के रुप में करवाया गया था। यह एक ज्ञानशाला थी। इसे मां वाग्देवी का प्राकट्य स्थल भी कहा जाता है। इसका शुभारंभ वसंत पंचमी उत्सव मनाकर किया गया था। कहा जाता है कि राजा भोज को मां वाग्देवी ने दर्शन दिए थे। उनके आशीर्वाद से राजा भोज ने 84 अलग-अलग विद्याओं के ग्रंथों की रचना की थी। उनके शासन काल में निर्मित अधोसंरचना के काम अद्भूत इंजीनियरिंग का एक अनुपम उदाहरण रहे है। इनमें से कई तालाबों एवं इमारतों के रुप में अभी भी मौजूद है।


