Tamanna Kanwar Burqa Sambhal: बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने और जलाभिषेक करने को लेकर चर्चा में आई तमन्ना मलिक के मामले पर जियाउर्रहमान बर्क ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से बड़ा बनाना सही नहीं है।
सांसद बर्क ने कहा कि समाज में पहले से ही संवेदनशील माहौल है और ऐसे मामलों को जरूरत से ज्यादा उछालने से आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है। उनका कहना था कि किसी एक व्यक्ति के फैसले को सामूहिक धार्मिक विमर्श का विषय बनाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे समुदायों के बीच गलतफहमी पैदा होती है।
निजी जीवन को धार्मिक विवाद में घसीटना गलत
सांसद बर्क ने स्पष्ट किया कि तमन्ना दूसरे धर्म में विवाह कर चुकी हैं और ऐसे में उनके निजी जीवन के निर्णय को लेकर सार्वजनिक स्तर पर बहस छेड़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार है और किसी की निजी आस्था या आचरण को राजनीतिक या सांप्रदायिक बहस का मुद्दा बनाना समाज को बांटने जैसा है। उनका कहना था कि समाज को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए, न कि उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए।
आस्था का सम्मान जरूरी
सांसद ने यह भी कहा कि हर नागरिक को अपने समाज और परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि ऐसा कोई कार्य न हो जिससे किसी दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत हों या उनके अधिकारों का उल्लंघन हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि धार्मिक परंपराएं संवेदनशील होती हैं और किसी भी प्रतीकात्मक गतिविधि को सार्वजनिक मंच पर करने से पहले उसके सामाजिक प्रभाव को समझना जरूरी है।
तमन्ना कोई धार्मिक नेता नहीं, उनका अनुसरण जरूरी नहीं
बर्क ने कहा कि तमन्ना मलिक कोई धर्मगुरु या धार्मिक नेता नहीं हैं, जिन्हें देखकर लोग अपनी धार्मिक मान्यताएं तय करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अधूरी जानकारी और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के चलते पहले भी कई बार ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिनसे समाज में भ्रम और अविश्वास फैला है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर मामले को सच मानकर प्रतिक्रिया न दें, बल्कि सोच-समझकर राय बनाएं।
मोहम्मद दीपक से तुलना को बताया अनुचित
सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने तमन्ना के मामले की तुलना मोहम्मद दीपक से किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मोहम्मद दीपक का मामला किसी धार्मिक स्थल पर जाकर धार्मिक क्रिया करने से जुड़ा नहीं था, बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से संबंधित था। ऐसे में दोनों घटनाओं को एक ही नजरिए से देखना और तुलना करना न सिर्फ गलत है, बल्कि तथ्यों के साथ अन्याय भी है।
भारत-पाक मैच पर उम्मीद और संवेदनशीलता की अपील
भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद बर्क ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि भारत की जीत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि खेल को खेल की भावना से देखना चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ किसी प्रकार की नकारात्मक भावना या विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच संबंध संवेदनशील रहे हैं, इसलिए ऐसे मौकों पर संतुलित और जिम्मेदार रवैया अपनाना जरूरी है, ताकि खेल के जरिए नफरत नहीं बल्कि सकारात्मक संदेश जाए।


