महादेव की बारात में शामिल हुए नर-नारी व किन्नर, काशी ने दिया ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश

महादेव की बारात में शामिल हुए नर-नारी व किन्नर, काशी ने दिया ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश

Mahadev Wedding Varanasi: बाबा भोलेनाथ की नगरी कही जाने वाली काशी में महाशिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसे में कई स्थानों से शिव बारात निकाली गई और इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु शामिल हुए। बाबा की अद्भुत बारात का हिस्सा काशीवासियों के साथ ही इस नगरी में आने वाला हर शख्स बनना चाहता है। बाराती के रूप में नर, नारी और किन्नर इसमें शामिल हुए।

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भोले की नगरी काशी में निकली शिव बारात में बतौर बाराती देवी-देवताओ का रूप धरे श्रद्धालुओं ने पुरे हर्षोल्लास के साथ हिस्सा लिया है। भूत-प्रेत और पिशाच का रूप धारण किए इन श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महाशिवरात्रि काशी में जगह-जगह शिवालयों से शिव बारात निकालने की परम्परा है। बाबा की बारात में भूत, प्रेत, दानव, असुर, अड़भंगी, साधू-सन्यासी और यहां तक कि देवी-देवता भी बाराती बने रहते हैं।

मैदागिन चौराहे से चंद मीटर दूर स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर से निकली बाबा की बारात आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस बारात में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कहा जाता है कि भगवान शिव और मां पार्वती का महाशिवरात्रि के दिन ही विवाह हुआ था। इसके बाद काशी में शिव बारात निकालने की यह परंपरा शुरू हुई। बताया जाता है कि यह बारात 44 सालों से निकाली जाती है और बाबा विश्वनाथ के मंदिर होते हुए गोदौलिया चौराहे पर इसका समापन होता है।

भगवान भोलेनाथ की निकली इस बारात में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इसमें शामिल हुए बारातियों के गले में सर्प की माला तो कोई स्वयं भगवान शिव का रूप धारण किए नजर आ रहा था। इस बारात में भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान गणेश समेत तमाम देवी और देवताओं का रूप धारण किए भी लोग नजर आए।

शिव बारात के संरक्षक डॉक्टर अमरेश दत्त पांडे ने बताया कि यहां से सन 1982 से शिव बारात निकाली जाती है। उन्होंने बताया कि भगवान शंकर की आराधना और पूरे देश को एकता में जोड़ने के लिए यह बारात भव्यता से निकल जाती है। इस शिव बारात में हिंदू मुस्लिम और सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं।

इस बारात का मुख्य उद्देश्य देश का विकास, उत्थान और सामाजिक प्रगति की और अग्रसर करना है। भगवान भोलेनाथ की इस बारात की अलग ही माया है और अलग ही लीला है इसलिए भगवान भोलेनाथ की इस बारात में स्वयं देवता भी प्रकट होते हैं। इस बारात का संदेश वसुधैव कुटुंबकम का है।

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