MSME को मिला बजट का बूस्टर डोज, 96 लाख इकाइयों से उठेगी रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई लहर

MSME को मिला बजट का बूस्टर डोज, 96 लाख इकाइयों से उठेगी रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई लहर

UP Budget 2026-27 Boosts MSME Sector: प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को बजट 2026-27 में विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने इस क्षेत्र को केवल अनुदान आधारित सहायता तक सीमित न रखकर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो करीब तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का आधार हैं। ऐसे में यह बजट न केवल औद्योगिक विकास, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान, 19 प्रतिशत वृद्धि

बजट 2026-27 में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकार की दीर्घकालिक औद्योगिक दृष्टि झलकती है। सरकार का लक्ष्य एमएसएमई को प्रदेश की विकास गाथा का केंद्रीय स्तंभ बनाना है। बढ़े हुए बजटीय प्रावधान से नई इकाइयों की स्थापना, तकनीकी उन्नयन, बाजार विस्तार और रोजगार सृजन को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान: नई ऊर्जा का संचार

सरकार ने Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan के तहत 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इसके माध्यम से प्रतिवर्ष एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह लक्ष्य पांच वर्षों तक निरंतर पूरा होता है तो पांच लाख से अधिक नई इकाइयां खड़ी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक नई इकाई औसतन पांच से दस लोगों को रोजगार देती है, तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं रोजगार सृजित करने की प्रेरणा मिलेगी।

ऋण गारंटी और बैंकिंग पहुंच में सुधार

एमएसएमई क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय संसाधनों तक पहुंच है। छोटे उद्यमियों के पास पर्याप्त जमानत (कोलैटरल) न होने के कारण वे बैंक ऋण से वंचित रह जाते हैं। बजट में ऋण गारंटी तंत्र को सुदृढ़ करने और बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इस पहल से बिना बड़ी जमानत के ऋण प्राप्त करना संभव होगा। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में इकाइयां असंगठित क्षेत्र से निकलकर औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होंगी। इससे कर संग्रह बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को बल

सरकार ने क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास को भी प्राथमिकता दी है। Sardar Vallabhbhai Patel Rojgar evam Audyogik Kshetra Yojana के लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। क्लस्टर मॉडल के तहत समूह आधारित औद्योगिक क्षेत्रों में साझा मशीनरी, परीक्षण प्रयोगशालाएं और सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उत्पादन लागत घटेगी और गुणवत्ता में सुधार होगा। छोटे उद्योग बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।

स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान

प्रदेश सरकार की One District One Product योजना को आगे बढ़ाते हुए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्यात प्रोत्साहन से स्थानीय उद्यमियों को बड़ा बाजार मिलेगा। इससे ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से युवाओं को प्रोत्साहन

Mukhyamantri Yuva Swarozgar Yojana के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करेगा। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो सीमित पूंजी के कारण उद्यम शुरू नहीं कर पाते।
सरकार की मंशा है कि युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। इससे प्रदेश में उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

अप्रत्यक्ष समर्थन की मजबूत कड़ी

प्रत्यक्ष योजनाओं के अलावा, बजट में आधारभूत संरचना पर निरंतर निवेश भी एमएसएमई के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लाभकारी है। एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक गलियारे, बेहतर विद्युत आपूर्ति और लॉजिस्टिक सुविधाओं से उत्पादन लागत घटेगी और समयबद्ध आपूर्ति संभव होगी। बेहतर परिवहन व्यवस्था से छोटे उद्योग भी निर्यात बाजार की ओर कदम बढ़ा सकेंगे। व्यापार सुगमता सुधार, एकल खिड़की प्रणाली और ऑनलाइन स्वीकृति प्रक्रिया निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही है।

असंगठित से संगठित अर्थव्यवस्था की ओर

96 लाख इकाइयों का संगठित ढांचे में आना केवल औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की दिशा में भी अहम कदम है। औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने से उद्यमियों को बीमा, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इससे श्रमिकों को भी बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व मिलेगा। तीन करोड़ परिवारों की आजीविका को स्थिर आधार मिलना प्रदेश की सामाजिक संरचना को भी मजबूत करेगा।

गुणवत्ता और उत्पादकता पर जोर

सरकार का लक्ष्य केवल इकाइयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार लाना है। तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से एमएसएमई को आधुनिक बनाया जाएगा। नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी। इससे प्रदेश के उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई दिशा

बजट 2026-27 में एमएसएमई क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार इस क्षेत्र को रोजगार सृजन का सबसे बड़ा इंजन बनाना चाहती है। 3,822 करोड़  रुपये का निवेश, युवा उद्यमिता को बढ़ावा, क्लस्टर विकास और बाजार विस्तार की रणनीति आने वाले वर्षों में औद्योगिक परिदृश्य को बदल सकती है। यदि योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो प्रदेश का एमएसएमई क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा और लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक प्रगति की आधारशिला साबित हो सकता है।

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