बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान सरकार और पाक सेना की हवा टाइट कर रखी है। एक ऑपेरशन के दौरान विद्रोही सेना ने 350 पाक जवानों को मार गिराया है। वहीं, कई जवानों को बंधक बना लिया है।
अब बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मीडिया विंग हक्कल की तरफ से नया बयान जारी किया गया है। बीएलए के स्पोक्सपर्सन जीयंद बलूच ने दावा किया है कि ग्रुप ने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे फेज के दौरान पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स के 17 सदस्यों को हिरासत में लिया है।
10 लोगों को किया गया रिहा
ग्रुप का यह भी दावा है कि बंधक बनाए गए लोगों में से दस को रिहा कर दिया गया है, जबकि सात को हिरासत में रखा गया है और उनकी किस्मत को संभावित कैदी एक्सचेंज पर निर्भर कर दिया है।
बीएलए के मुताबिक, रिहा किए गए लोगों की पहचान एथनिक बलूच के तौर पर हुई है जो लोकल पुलिसिंग स्ट्रक्चर से जुड़े थे, जिसमें लेवी के लोग भी शामिल थे।
ग्रुप ने कहा कि उन्हें वॉर्निंग के बाद जाने दिया गया, यह तर्क देते हुए कि यह कदम जमीनी हकीकत और बलूच आबादी के बड़े हितों को दिखाता है।
बाकी बंदियों के बारे में क्या कहा गया?
बाकी बंदियों को बीएलए ने पाकिस्तान आर्मी की रेगुलर यूनिट्स का सदस्य बताया है। आर्म्ड ग्रुप का कहना है कि पाक सेना के जवान आम लोगों के खिलाफ एक्शन में शामिल रहे। उन्होंने लोगों को जबरन गायब किया और उनका नरसंहार किया।
हक्कल का कहना है कि बलोच अदालत में सुनवाई के दौरान, बंधक बनाए गए लोगों को आरोपों का जवाब देने दिया गया, सबूत पेश किए गए और दोषी ठहराए जाने से पहले बयान दर्ज किए गए।
सजा की घोषणा के बावजूद अदला-बदली को तैयार
सजा की घोषणा के बावजूद, बीएलए लीडरशिप का कहना है कि उसने इस्लामाबाद को युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए औपचारिक रूप से तैयार होने का संकेत देने के लिए सात दिन का समय दिया है। अगर समय-सीमा के अंदर ऐसी इच्छा दिखाई जाती है, तो ग्रुप का दावा है कि सात बंदियों को बलूच कैदियों से बदला जा सकता है।
पिछले ऑफर पर पाक ने नहीं दिखाई रुचि
बयान में आगे आरोप लगाया गया है कि अदला-बदली के पिछले ऑफर पर आगे नहीं बढ़ा गया। साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों पर अपने लोगों की जान को प्राथमिकता देने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा, बलोच की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि अगर एक हफ्ते के अंदर कोई प्रैक्टिकल प्रोग्रेस नहीं हुई तो सजाओं को लागू किया जाएगा। इस पर फिलहाल पाक सेना या सरकार की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।


