भारत-अमेरिका कृषि समझौते के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन:कहा-इससे आर्थिक बर्बादी आएगी, समझौता रद्द करने मांग, आंदोलन की चेतावनी

भारत-अमेरिका कृषि समझौते के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन:कहा-इससे आर्थिक बर्बादी आएगी, समझौता रद्द करने मांग, आंदोलन की चेतावनी

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए कृषि उत्पादों व अन्य वस्तुओं के व्यापार समझौते को लेकर किसानों में भारी रोष है। रविवार को नारनौंद के हांसी रोड पर बड़ी संख्या में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि यह समझौता वापस नहीं लिया गया, तो पहले हुए किसान आंदोलन से भी बड़ा संघर्ष छेड़ा जाएगा। प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं बलवान लोहान, शीलू लोहान, बजे सिंह जंगी लोहान, सुनील, बलवान बैरागी, विजयपाल, दिलबाग माजरा, बाली, भूपेंद्र, अनिल, ओम, राजवीर, इंद्र, काजल, राजेंद्र, सुंदर टेका और बिंद्र सहित अनेक किसानों ने इस समझौते को किसान विरोधी बताया। उनका कहना है कि यह समझौता कृषि उत्पादन, डेयरी, पोल्ट्री, दूध तथा खेती से संबंधित अन्य वस्तुओं को प्रभावित करेगा। किसानों का आरोप है कि इस समझौते से देश का किसान आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएगा। किसानों ने कहा-अमेरिका के उत्पाद बाजार में आएंगे उन्होंने बताया कि भारत ने अमेरिका में उत्पादित कृषि फसलों पर शून्य टैरिफ कर दिया है, जबकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 3 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ा दिया है। किसानों का आरोप है कि यह समझौता एकतरफा है और इससे भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने आशंका जताई कि विदेशी कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों की उपज के दाम गिरेंगे और उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा। डेयरी सेक्टर पर असर पड़ेगा डेयरी क्षेत्र को लेकर भी किसानों ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि अमेरिका का दूध भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं है, क्योंकि वहां पशुओं को मांसाहारी आहार दिया जाता है, जिससे दूध की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। किसानों ने यह भी कहा कि इतनी लंबी दूरी तय कर दूध का भारत तक पहुंचना व्यावहारिक नहीं है। यदि यह पहुंचता भी है, तो उसमें रसायन या संरक्षक तत्व हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होंगे।

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