पूर्णिया में महाशिवरात्रि को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा चित्रवाणी सेवा समिति की ओर से भट्टा टीओपी शिव मंदिर से निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में महिला और कुमारी कन्या शामिल रही। बड़ी संख्या में पुरुष कलश यात्रा में शरीक हुए। मंदिर परिसर से कुमारी कन्याओं और महिलाओं ने सिर पर कलश लिए शोभायात्रा संग निकली। कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण किए अनेक महिलाएं सिर पर कलश लेकर मंगल गायन करती दिखाई दी। भक्ति गीतों पर महिलाएं और बालिकाएं जयकारे लगाती कलश यात्रा को आगे बढ़ा रही थी। ‘काल हर, कष्ट हर, नमः पार्वती पतये नमः’ के नारों से पूरा शहर शिवमय हो गया है।
कलश यात्रा देखने के लिए सड़कों पर लगी भीड़ गाजे-बाजे और डीजे के साथ निकली कलश यात्रा शिव मंदिर से शुरू होकर, झंडा चौक, भट्टा कालीबाड़ी चौक, भट्टा बाजार आरएन शाह चौक, टैक्सी स्टैंड, जेल रोड, आस्था मंदिर रोड, जिला स्कूल रोड, खीरू चौक, भट्टा बाजार सब्जी मंडी, लखन चौक होते हुए शिव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। भव्य कलश यात्रा जिस रास्ते से होकर गुजरी, इसे देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं में इस धार्मिक आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, इससे पहले के.नगर के भोजराहा गांव में महाशिवरात्रि के मौके पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। NH 107 स्थित नवनिर्मित हरिहरनाथ महादेव मंदिर में शिवलिंग, माता पार्वती, नंदी और बजरंगबली की प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर कलश यात्रा निकली । इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। कारी कोसी तट पर जल भरा मंदिर परिसर से 551 कुमारी कन्याओं और महिलाओं ने सिर पर कलश लिए शोभायात्रा संग निकली। गाजे-बाजे, डीजे और घोड़ों के साथ निकली ये यात्रा कारी कोसी तट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरा। ये भव्य कलश यात्रा विभिन्न मार्गों और गांव का भ्रमण करते हुए यात्रा वापस मंदिर परिसर लौटी, जहां जलाभिषेक किया गया। स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं में इस धार्मिक आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
अंतिम दिन 48 घंटे का अखंड त्रिकुंज संकीर्तन समिति के सदस्यों और गणमान्य व्यक्तियों समाजसेवी मनोज झा, पप्पू ठाकुर, बमबम ठाकुर, कुक्कू ठाकुर, नीरज झा, अंकित झा, कुमुद झा, आमोद झा, समिति सदस्य प्रतिनिधि रविंद्र यादव और पूर्व मुखिया मनोज यादव ने बताया कि काशी और सहरसा से आएं विद्वान पंडितों की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सभी प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई जाएगी। पहले दिन भव्य कलश यात्रा और जलाभिषेक, दूसरे दिन अधिवास और नगर भ्रमण और तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम जबकि अंतिम दिन 48 घंटे का अखंड त्रिकुंज संकीर्तन है। पूर्णिया में महाशिवरात्रि को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा चित्रवाणी सेवा समिति की ओर से भट्टा टीओपी शिव मंदिर से निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में महिला और कुमारी कन्या शामिल रही। बड़ी संख्या में पुरुष कलश यात्रा में शरीक हुए। मंदिर परिसर से कुमारी कन्याओं और महिलाओं ने सिर पर कलश लिए शोभायात्रा संग निकली। कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण किए अनेक महिलाएं सिर पर कलश लेकर मंगल गायन करती दिखाई दी। भक्ति गीतों पर महिलाएं और बालिकाएं जयकारे लगाती कलश यात्रा को आगे बढ़ा रही थी। ‘काल हर, कष्ट हर, नमः पार्वती पतये नमः’ के नारों से पूरा शहर शिवमय हो गया है।
कलश यात्रा देखने के लिए सड़कों पर लगी भीड़ गाजे-बाजे और डीजे के साथ निकली कलश यात्रा शिव मंदिर से शुरू होकर, झंडा चौक, भट्टा कालीबाड़ी चौक, भट्टा बाजार आरएन शाह चौक, टैक्सी स्टैंड, जेल रोड, आस्था मंदिर रोड, जिला स्कूल रोड, खीरू चौक, भट्टा बाजार सब्जी मंडी, लखन चौक होते हुए शिव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। भव्य कलश यात्रा जिस रास्ते से होकर गुजरी, इसे देखने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं में इस धार्मिक आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, इससे पहले के.नगर के भोजराहा गांव में महाशिवरात्रि के मौके पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। NH 107 स्थित नवनिर्मित हरिहरनाथ महादेव मंदिर में शिवलिंग, माता पार्वती, नंदी और बजरंगबली की प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर कलश यात्रा निकली । इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। कारी कोसी तट पर जल भरा मंदिर परिसर से 551 कुमारी कन्याओं और महिलाओं ने सिर पर कलश लिए शोभायात्रा संग निकली। गाजे-बाजे, डीजे और घोड़ों के साथ निकली ये यात्रा कारी कोसी तट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरा। ये भव्य कलश यात्रा विभिन्न मार्गों और गांव का भ्रमण करते हुए यात्रा वापस मंदिर परिसर लौटी, जहां जलाभिषेक किया गया। स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं में इस धार्मिक आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
अंतिम दिन 48 घंटे का अखंड त्रिकुंज संकीर्तन समिति के सदस्यों और गणमान्य व्यक्तियों समाजसेवी मनोज झा, पप्पू ठाकुर, बमबम ठाकुर, कुक्कू ठाकुर, नीरज झा, अंकित झा, कुमुद झा, आमोद झा, समिति सदस्य प्रतिनिधि रविंद्र यादव और पूर्व मुखिया मनोज यादव ने बताया कि काशी और सहरसा से आएं विद्वान पंडितों की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सभी प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई जाएगी। पहले दिन भव्य कलश यात्रा और जलाभिषेक, दूसरे दिन अधिवास और नगर भ्रमण और तीसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम जबकि अंतिम दिन 48 घंटे का अखंड त्रिकुंज संकीर्तन है।


