महाशिवरात्रि पर सुबह 2 बजे खुला मंदिर का पट:शिवहर में देकुली धाम से भुवनेश्वरनाथ तक गूंजे जयकारे, श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

महाशिवरात्रि पर सुबह 2 बजे खुला मंदिर का पट:शिवहर में देकुली धाम से भुवनेश्वरनाथ तक गूंजे जयकारे, श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

शिवहर जिले में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव पर जिले भर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देकुली धाम से लेकर बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम तक लाखों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। बागमती नदी तट पर स्थित ऐतिहासिक बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम और देकुली धाम में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। देकुली धाम में मंदिर के पट सुबह 2:00 बजे श्रृंगार पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। देकुली धाम में जलाभिषेक के लिए अरघा की विशेष व्यवस्था की गई थी, जहां प्रति मिनट लगभग 150 श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छ पेयजल की दो बड़ी टंकियां भी लगाई गई थीं। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात जिला प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी, पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा, एसडीएम अविनाश कुणाल, एसडीपीओ सुशील कुमार, बीडीओ आदित्य कुमार और थाना अध्यक्ष उमाकांत सिंह सहित कई दंडाधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद थे। एसडीएम अविनाश कुणाल ने बताया कि विधि-व्यवस्था पूरी तरह से संधारित है और दर्शन-जलाभिषेक शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। 12 करोड़ की लागत से बना था मंदिर मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव संदीप भारती के अनुसार, इस वर्ष लगभग दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सुबह 8 बजे तक करीब 25 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से विकसित भव्य मंदिर परिसर में यह पहला महाशिवरात्रि पर्व है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। इसके अतिरिक्त, रसीदपुर के गौरीशंकर मंदिर, अनुमंडल गेट स्थित मनोकामना पूर्ण मंदिर, रानी पोखर शिवालय, कुशहर गौरीशंकर मंदिर, पिपराही थाना के समीप शिवालय और पवित्र नगर पुराना शिवालय सहित जिले के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में भी भारी भीड़ देखी गई। बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम अपनी अद्वितीय शिल्पकला और पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। जनश्रुति के अनुसार, इस स्थल का विकास द्वापर काल में हुआ था और रामायण काल में भगवान श्रीराम और भगवान शिव का यहां मिलन हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर इस क्षेत्र का नाम शिवहर पड़ा। शिवहर जिले में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव पर जिले भर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देकुली धाम से लेकर बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम तक लाखों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। बागमती नदी तट पर स्थित ऐतिहासिक बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम और देकुली धाम में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। देकुली धाम में मंदिर के पट सुबह 2:00 बजे श्रृंगार पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। देकुली धाम में जलाभिषेक के लिए अरघा की विशेष व्यवस्था की गई थी, जहां प्रति मिनट लगभग 150 श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छ पेयजल की दो बड़ी टंकियां भी लगाई गई थीं। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात जिला प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी, पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा, एसडीएम अविनाश कुणाल, एसडीपीओ सुशील कुमार, बीडीओ आदित्य कुमार और थाना अध्यक्ष उमाकांत सिंह सहित कई दंडाधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद थे। एसडीएम अविनाश कुणाल ने बताया कि विधि-व्यवस्था पूरी तरह से संधारित है और दर्शन-जलाभिषेक शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। 12 करोड़ की लागत से बना था मंदिर मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव संदीप भारती के अनुसार, इस वर्ष लगभग दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सुबह 8 बजे तक करीब 25 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से विकसित भव्य मंदिर परिसर में यह पहला महाशिवरात्रि पर्व है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। इसके अतिरिक्त, रसीदपुर के गौरीशंकर मंदिर, अनुमंडल गेट स्थित मनोकामना पूर्ण मंदिर, रानी पोखर शिवालय, कुशहर गौरीशंकर मंदिर, पिपराही थाना के समीप शिवालय और पवित्र नगर पुराना शिवालय सहित जिले के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में भी भारी भीड़ देखी गई। बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम अपनी अद्वितीय शिल्पकला और पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। जनश्रुति के अनुसार, इस स्थल का विकास द्वापर काल में हुआ था और रामायण काल में भगवान श्रीराम और भगवान शिव का यहां मिलन हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर इस क्षेत्र का नाम शिवहर पड़ा।  

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