सहरसा नगर निगम में करोड़ों रुपए के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला सामने आया है। नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा ने इस संबंध में सदर थाना को औपचारिक पत्र समर्पित करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। मामला इतना गंभीर है कि इसे आपराधिक श्रेणी की कार्रवाई बताते हुए तत्काल जांच की मांग की गई है। यह कार्रवाई नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना के परियोजना पदाधिकारी सह अपर निदेशक द्वारा भेजे गए पत्रांक 465 (दिनांक 11 फरवरी 2026) के निर्देश पर की गई है। शिकायतकर्ता के परिवाद पर बनी त्रि-स्तरीय जांच समिति यह मामला तब प्रकाश में आया जब कोशी कॉलोनी निवासी राहुल कुमार पासवान ने विभाग में एक परिवाद दायर किया था। इसके बाद जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जिसने दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने नगर निगम प्रशासन को हिला दिया है। नगर आयुक्त के अनुसार, पूरी रिपोर्ट आवेदन के साथ संलग्न की गई है। महापौर के निजी सचिव पर गंभीर आरोप जांच प्रतिवेदन के सबसे अहम हिस्से में महापौर के निजी सचिव डेजी झा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समिति के अनुसार उनकी पत्नी के नाम पर संचालित कंपनी नारी शक्ति इन्फोटेक एंड डेवलपमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और इसके साथ जुड़े कॉन्सॉरटीयम, पैंथर यूनिट प्राइवेट लिमिटेड और एम ऑफ पीपुल के बीच करोड़ों रुपए का कथित अवैध हस्तांतरण किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन कंपनियों के बैंक खातों, टेंडर प्रक्रिया और निगम के साथ हुए वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी दर्ज की है। बताया जा रहा है कि पैसे का यह पूरा प्रवाह सरकारी प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं था और कई दस्तावेज संदेहास्पद पाए गए हैं। आपराधिक मामला मानते हुए एफआईआर की सिफारिश नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जांच के आधार पर मामला आपराधिक प्रकृति का प्रतीत होता है। इसी आधार पर उन्होंने निम्नलिखित के खिलाफ FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है। डेजी झा, नारी शक्ति इन्फोटेक एंड डेवलपमेंट सर्विसेज प्रा. लि., एस.के. सिह, निदेशक, पैंथर यूनिट प्रा. लि., एम ऑफ पीपुल के निदेशक नगर आयुक्त ने कहा कि जब सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता मिले और उसके बदले निजी कंपनियों को वरीयता दी जाए तो यह स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध के दायरे में आता है। सरकारी कर्मियों की मिलीभगत पर भी नजर विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इस अवैध ट्रांसफर में किसी नगर निगम कर्मी या सरकारी सेवक की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कहा गया है कि संलिप्तता प्रमाणित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव सीधे विभाग को भेजा जाएगा। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नगर निगम में लंबे समय से फाइल प्रक्रिया, भुगतान और टेंडर से जुड़े कई काम एक सीमित समूह के लोगों के प्रभाव में होते थे। जांच के बाद अब इन्हीं पर शिकंजा कस सकता है। सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया, जांच होगी तेज सहरसा सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार ने पुष्टि की है कि नगर आयुक्त द्वारा भेजे गए आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि—
“जांच के बाद सभी तथ्य साफ होंगे। जिन पर आरोप हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है।” पुलिस ने बताया कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच जरूरी है, इसलिए जांच टीम का विस्तार भी किया जा सकता है। शहर में राजनीतिक हलचल तेज जैसे ही मामले की जानकारी सार्वजनिक हुई, नगर निगम क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर महापौर से सफाई मांग रहे हैं। वहीं नागरिक संगठनों का कहना है कि नगर निगम में वर्षों से व्याप्त भ्रष्टाचार का यह सिर्फ एक नमूना है, पूरे सिस्टम की जांच होनी चाहिए। सहरसा नगर निगम में करोड़ों रुपए के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला सामने आया है। नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा ने इस संबंध में सदर थाना को औपचारिक पत्र समर्पित करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। मामला इतना गंभीर है कि इसे आपराधिक श्रेणी की कार्रवाई बताते हुए तत्काल जांच की मांग की गई है। यह कार्रवाई नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना के परियोजना पदाधिकारी सह अपर निदेशक द्वारा भेजे गए पत्रांक 465 (दिनांक 11 फरवरी 2026) के निर्देश पर की गई है। शिकायतकर्ता के परिवाद पर बनी त्रि-स्तरीय जांच समिति यह मामला तब प्रकाश में आया जब कोशी कॉलोनी निवासी राहुल कुमार पासवान ने विभाग में एक परिवाद दायर किया था। इसके बाद जिला स्तर पर त्रि-स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जिसने दस्तावेजों और लेन-देन की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने नगर निगम प्रशासन को हिला दिया है। नगर आयुक्त के अनुसार, पूरी रिपोर्ट आवेदन के साथ संलग्न की गई है। महापौर के निजी सचिव पर गंभीर आरोप जांच प्रतिवेदन के सबसे अहम हिस्से में महापौर के निजी सचिव डेजी झा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समिति के अनुसार उनकी पत्नी के नाम पर संचालित कंपनी नारी शक्ति इन्फोटेक एंड डेवलपमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और इसके साथ जुड़े कॉन्सॉरटीयम, पैंथर यूनिट प्राइवेट लिमिटेड और एम ऑफ पीपुल के बीच करोड़ों रुपए का कथित अवैध हस्तांतरण किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन कंपनियों के बैंक खातों, टेंडर प्रक्रिया और निगम के साथ हुए वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जानकारी दर्ज की है। बताया जा रहा है कि पैसे का यह पूरा प्रवाह सरकारी प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं था और कई दस्तावेज संदेहास्पद पाए गए हैं। आपराधिक मामला मानते हुए एफआईआर की सिफारिश नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जांच के आधार पर मामला आपराधिक प्रकृति का प्रतीत होता है। इसी आधार पर उन्होंने निम्नलिखित के खिलाफ FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है। डेजी झा, नारी शक्ति इन्फोटेक एंड डेवलपमेंट सर्विसेज प्रा. लि., एस.के. सिह, निदेशक, पैंथर यूनिट प्रा. लि., एम ऑफ पीपुल के निदेशक नगर आयुक्त ने कहा कि जब सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता मिले और उसके बदले निजी कंपनियों को वरीयता दी जाए तो यह स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध के दायरे में आता है। सरकारी कर्मियों की मिलीभगत पर भी नजर विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इस अवैध ट्रांसफर में किसी नगर निगम कर्मी या सरकारी सेवक की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कहा गया है कि संलिप्तता प्रमाणित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव सीधे विभाग को भेजा जाएगा। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नगर निगम में लंबे समय से फाइल प्रक्रिया, भुगतान और टेंडर से जुड़े कई काम एक सीमित समूह के लोगों के प्रभाव में होते थे। जांच के बाद अब इन्हीं पर शिकंजा कस सकता है। सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया, जांच होगी तेज सहरसा सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार ने पुष्टि की है कि नगर आयुक्त द्वारा भेजे गए आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि—
“जांच के बाद सभी तथ्य साफ होंगे। जिन पर आरोप हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है।” पुलिस ने बताया कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच जरूरी है, इसलिए जांच टीम का विस्तार भी किया जा सकता है। शहर में राजनीतिक हलचल तेज जैसे ही मामले की जानकारी सार्वजनिक हुई, नगर निगम क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर महापौर से सफाई मांग रहे हैं। वहीं नागरिक संगठनों का कहना है कि नगर निगम में वर्षों से व्याप्त भ्रष्टाचार का यह सिर्फ एक नमूना है, पूरे सिस्टम की जांच होनी चाहिए।


