सुपौल में मनरेगा के PRS अमित विक्रम सेवा से मुक्त:DM सावन कुमार के निर्देश पर DDC ने की कार्रवाई, कार्यों में लापरवाही का आरोप

सुपौल में मनरेगा के PRS अमित विक्रम सेवा से मुक्त:DM सावन कुमार के निर्देश पर DDC ने की कार्रवाई, कार्यों में लापरवाही का आरोप

सुपौल में जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर पंचायत रोजगार सेवक अमित विक्रम को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। जिले में लगातार हो रही कार्रवाई से विभिन्न विभागों में हड़कंप है। यह कार्रवाई जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल द्वारा की गई, जिसका आदेश उप विकास आयुक्त सारा अशरफ के हस्ताक्षर से 14 फरवरी 2026 को जारी हुआ। जारी आदेश के अनुसार अमित विक्रम, जो पहले ग्राम पंचायत श्रीपुर तथा वर्तमान में गोविन्दपुर (प्रखंड प्रतापगंज) में पदस्थापित थे, इन पर मनरेगा योजना एवं अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप सिद्ध पाए गए। 6 दिन कार्य क्षेत्र से रहे अनुपस्थित कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा, प्रतापगंज ने पत्रांक 99 दिनांक 05.07.2025 के माध्यम से उनकी कार्यशैली पर प्रतिवेदन भेजा था। जांच में सामने आया कि अमित विक्रम 30 जून 2025 से 5 जुलाई 2025 तक लगातार बिना अनुमति अपने कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति के कारण वृक्षारोपण अभियान सहित कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए। मनरेगा के अंतर्गत चल रही योजनाओं की प्रगति भी बाधित हुई तथा मजदूरों के लंबित भुगतान में देरी हुई। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान-2025 का काम भी प्रभावित पाया गया। स्पष्टीकरण का समय पर नहीं दिया जवाब इन आरोपों पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल ने 10 जुलाई 2025 को उनसे स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसे उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना गया। इसके अलावा हालिया समीक्षा में यह भी पाया गया कि फार्मर रजिस्ट्री और मनरेगा मजदूरों के e-KYC कार्य में उनकी उपलब्धि प्रखंड प्रतापगंज में सबसे कम रही। प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी के संयुक्त प्रतिवेदन (पत्रांक 149, दिनांक 12.02.2026) में कहा गया कि उन्होंने इन कार्यों में अपेक्षित सहयोग और रुचि नहीं दिखाई। 30 दिनों के अंदर दायर कर सकते हैं अपील प्राधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि अमित विक्रम ने अपने दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है, जो मनरेगा मार्गदर्शिका और बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के अनुशासनिक प्रावधानों के प्रतिकूल है। इसी आधार पर बीआरडीएस के नियमों के तहत उनका अनुबंध रद्द करते हुए सेवा समाप्त करने की सजा दी गई। आदेश में यह भी उल्लेख है कि अमित विक्रम चाहें तो आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर जिलाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। सुपौल में जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर पंचायत रोजगार सेवक अमित विक्रम को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। जिले में लगातार हो रही कार्रवाई से विभिन्न विभागों में हड़कंप है। यह कार्रवाई जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल द्वारा की गई, जिसका आदेश उप विकास आयुक्त सारा अशरफ के हस्ताक्षर से 14 फरवरी 2026 को जारी हुआ। जारी आदेश के अनुसार अमित विक्रम, जो पहले ग्राम पंचायत श्रीपुर तथा वर्तमान में गोविन्दपुर (प्रखंड प्रतापगंज) में पदस्थापित थे, इन पर मनरेगा योजना एवं अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप सिद्ध पाए गए। 6 दिन कार्य क्षेत्र से रहे अनुपस्थित कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा, प्रतापगंज ने पत्रांक 99 दिनांक 05.07.2025 के माध्यम से उनकी कार्यशैली पर प्रतिवेदन भेजा था। जांच में सामने आया कि अमित विक्रम 30 जून 2025 से 5 जुलाई 2025 तक लगातार बिना अनुमति अपने कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति के कारण वृक्षारोपण अभियान सहित कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए। मनरेगा के अंतर्गत चल रही योजनाओं की प्रगति भी बाधित हुई तथा मजदूरों के लंबित भुगतान में देरी हुई। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान-2025 का काम भी प्रभावित पाया गया। स्पष्टीकरण का समय पर नहीं दिया जवाब इन आरोपों पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल ने 10 जुलाई 2025 को उनसे स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसे उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना गया। इसके अलावा हालिया समीक्षा में यह भी पाया गया कि फार्मर रजिस्ट्री और मनरेगा मजदूरों के e-KYC कार्य में उनकी उपलब्धि प्रखंड प्रतापगंज में सबसे कम रही। प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी के संयुक्त प्रतिवेदन (पत्रांक 149, दिनांक 12.02.2026) में कहा गया कि उन्होंने इन कार्यों में अपेक्षित सहयोग और रुचि नहीं दिखाई। 30 दिनों के अंदर दायर कर सकते हैं अपील प्राधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि अमित विक्रम ने अपने दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है, जो मनरेगा मार्गदर्शिका और बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के अनुशासनिक प्रावधानों के प्रतिकूल है। इसी आधार पर बीआरडीएस के नियमों के तहत उनका अनुबंध रद्द करते हुए सेवा समाप्त करने की सजा दी गई। आदेश में यह भी उल्लेख है कि अमित विक्रम चाहें तो आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर जिलाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।  

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