बाबा नगरी में महाशिवरात्रि के अवसर पर रविवार को माता पार्वती संग बाबा भोलेनाथ विवाह रचायेंगे. बाबा बैद्यनाथ मंदिर में इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। इससे पहले शनिवार को बाबा मंदिर में पंचशूल की विशेष पूजा तांत्रिक व वैदिक विधि-विधान के साथ हुई। इसके बाद सभी पंचशूल मंदिरों में स्थापित किए गए। आज ब्रह्म मुहूर्त में सरकारी पूजा के लिए बाबा मंदिर के पट खोले गए। सुबह के 3 बजे सरकारी पूजा की गई। इसके बाद 4 बजे से ही आम भक्त बाबा को जल चढ़ाने लगे। महाशिवरात्रि पर बाबा बैद्यनाथ पर जर्लापण के लिए देर रात से ही भक्तों की कतार लगने लगी थी। मंदिर के बाहर करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार बीएड कॉलेज, क्यू कॉम्प्लेक्स, नाथबाड़ी और रूटलाइन तक फैली हुई थी। अनुमान है कि देर शाम तक दो से ढाई लाख भक्तों ने जलार्पण करेंगे। महाशिवरात्रि पर बाबा मंदिर में आलम यह है कि पूरा कैंपस मंत्रोच्चार, अभिषेक और आरती के बीच हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा है। बाबा मंदिर की कुछ तस्वीरें देखें…
आज होगी चतुष्ग्रहर पूजा, निकलेगी पारंपरिक बारात बाबा मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज चतुष्ग्रहर (चार पहर) की विशेष पूजा-अर्चना होगी। साथ ही बाबा मंदिर में पारंपरिक शिव बारात निकाली जाएगी। इसके तैयारी पूरी कर ली गयी है। इसे लेकर बाबा मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। राधाकृष्ण मंदिर, भीतरखंड से लेकर मुख्य निकास द्वार तक विशेष व्यवस्था की गई है। भीतरखंड से मशाल व ढोल-नगाड़े के साथ शिव बारात निकास द्वार तक जाएगा। इसके बाद भस्म, चंदन, बेलपत्र और पुष्पमालाओं से अलंकृत आरती की जाएगी। ढोल-नगाड़ों, डमरू और शंखध्वनि के बीच हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहेगा। परंपरा के अनुसार, चतुष्प्रहर पूजा के लिए ढोल-ढाक के साथ सरदार पंडा सहित अन्य पुजारी पूजन सामग्री के साथ निकास द्वार पर पहुंचेंगे। इसके बाद वे गर्भ गृह में बाबा की पूजा करेंगे। यह अहले सुबह तक चलेगी। इस दिन बाबा की शृंगार पूजा नहीं होगी। देवघर शहर के सजावट की तस्वीरें देखें… रोहिणी का मोउर मुकुट पहन बाबा भोलेनाथ करेंगे विवाह लगभग 600 साल से चली मान्यता के अनुसार आज भी बाबा बैद्यनाथ रोहिणी में बने मोउर मुकुट और पारंपरिक वस्त्र पहन कर पूजा करेंगे। देवघर के रोहिणी स्थित घाटवाल और मालाकार परिवार पूरी श्रद्धा और निष्ठा से बाबा के विवाह के लिए मोउर मुकुट बनाते हैं। परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन घाटवाल परिवार की ओर से बाबा के विवाह के लिए दिए गए वस्त्र व विवाह सामग्री का उपयोग किया जाता है। जानकारी के अनुसार अभी रोहिणी के घाटवाल और मालाकार परिवार के वंशज संजीव कुमार देव व चिरंजीव देव की ओर से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। उन्हीं की ओर से विवाह के लिए पटवासी, सिंदूर, साड़ी, धोती, गंजी, गमछा, लहठी सहित अन्य सामग्री भेजा जाता है। मंदिर से शहर तक सुरक्षा के इंतजाम महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर से लेकर पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी रात दो बजे से ही तैनात रहे। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार और अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार ने मंदिर क्षेत्र और रूटलाइन का लगातार निरीक्षण किया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को अधिक देर प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसके लिए अंतिम होल्डिंग प्वाइंट से कतार को तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पूरे मंदिर प्रांगण को लगभग पांच लाख गेंदा फूलों से सजाया गया है। 22 मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। रात्रि में विवाहोत्सव और सिंदूरदान की परंपरा निभाई जाएगी। आज की विशेष पूजा के बाद सोमवार सुबह 8:10 बजे मंदिर के पट पुनः खोले जाएंगे। बाबा नगरी में महाशिवरात्रि के अवसर पर रविवार को माता पार्वती संग बाबा भोलेनाथ विवाह रचायेंगे. बाबा बैद्यनाथ मंदिर में इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। इससे पहले शनिवार को बाबा मंदिर में पंचशूल की विशेष पूजा तांत्रिक व वैदिक विधि-विधान के साथ हुई। इसके बाद सभी पंचशूल मंदिरों में स्थापित किए गए। आज ब्रह्म मुहूर्त में सरकारी पूजा के लिए बाबा मंदिर के पट खोले गए। सुबह के 3 बजे सरकारी पूजा की गई। इसके बाद 4 बजे से ही आम भक्त बाबा को जल चढ़ाने लगे। महाशिवरात्रि पर बाबा बैद्यनाथ पर जर्लापण के लिए देर रात से ही भक्तों की कतार लगने लगी थी। मंदिर के बाहर करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार बीएड कॉलेज, क्यू कॉम्प्लेक्स, नाथबाड़ी और रूटलाइन तक फैली हुई थी। अनुमान है कि देर शाम तक दो से ढाई लाख भक्तों ने जलार्पण करेंगे। महाशिवरात्रि पर बाबा मंदिर में आलम यह है कि पूरा कैंपस मंत्रोच्चार, अभिषेक और आरती के बीच हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा है। बाबा मंदिर की कुछ तस्वीरें देखें…
आज होगी चतुष्ग्रहर पूजा, निकलेगी पारंपरिक बारात बाबा मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आज चतुष्ग्रहर (चार पहर) की विशेष पूजा-अर्चना होगी। साथ ही बाबा मंदिर में पारंपरिक शिव बारात निकाली जाएगी। इसके तैयारी पूरी कर ली गयी है। इसे लेकर बाबा मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। राधाकृष्ण मंदिर, भीतरखंड से लेकर मुख्य निकास द्वार तक विशेष व्यवस्था की गई है। भीतरखंड से मशाल व ढोल-नगाड़े के साथ शिव बारात निकास द्वार तक जाएगा। इसके बाद भस्म, चंदन, बेलपत्र और पुष्पमालाओं से अलंकृत आरती की जाएगी। ढोल-नगाड़ों, डमरू और शंखध्वनि के बीच हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहेगा। परंपरा के अनुसार, चतुष्प्रहर पूजा के लिए ढोल-ढाक के साथ सरदार पंडा सहित अन्य पुजारी पूजन सामग्री के साथ निकास द्वार पर पहुंचेंगे। इसके बाद वे गर्भ गृह में बाबा की पूजा करेंगे। यह अहले सुबह तक चलेगी। इस दिन बाबा की शृंगार पूजा नहीं होगी। देवघर शहर के सजावट की तस्वीरें देखें… रोहिणी का मोउर मुकुट पहन बाबा भोलेनाथ करेंगे विवाह लगभग 600 साल से चली मान्यता के अनुसार आज भी बाबा बैद्यनाथ रोहिणी में बने मोउर मुकुट और पारंपरिक वस्त्र पहन कर पूजा करेंगे। देवघर के रोहिणी स्थित घाटवाल और मालाकार परिवार पूरी श्रद्धा और निष्ठा से बाबा के विवाह के लिए मोउर मुकुट बनाते हैं। परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन घाटवाल परिवार की ओर से बाबा के विवाह के लिए दिए गए वस्त्र व विवाह सामग्री का उपयोग किया जाता है। जानकारी के अनुसार अभी रोहिणी के घाटवाल और मालाकार परिवार के वंशज संजीव कुमार देव व चिरंजीव देव की ओर से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। उन्हीं की ओर से विवाह के लिए पटवासी, सिंदूर, साड़ी, धोती, गंजी, गमछा, लहठी सहित अन्य सामग्री भेजा जाता है। मंदिर से शहर तक सुरक्षा के इंतजाम महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर से लेकर पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी रात दो बजे से ही तैनात रहे। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार और अनुमंडल पदाधिकारी रवि कुमार ने मंदिर क्षेत्र और रूटलाइन का लगातार निरीक्षण किया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को अधिक देर प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसके लिए अंतिम होल्डिंग प्वाइंट से कतार को तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पूरे मंदिर प्रांगण को लगभग पांच लाख गेंदा फूलों से सजाया गया है। 22 मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। रात्रि में विवाहोत्सव और सिंदूरदान की परंपरा निभाई जाएगी। आज की विशेष पूजा के बाद सोमवार सुबह 8:10 बजे मंदिर के पट पुनः खोले जाएंगे।


