नमस्कार विधानसभा में विधायकजी को लगा कि राम के भजन गाएंगे तो सत्ता पक्ष मांगों पर गौर फरमाएगा। फलोदी में 35 हजार की नौकरी करने वाले बीकानेर के सरकारी कर्मचारी के पास अकूत संपत्ति निकली। बाड़मेर में SDM ने सरकारी स्कूल का मिड-डे मील चखकर पूछा- इसमें आलू, प्याज, मटर कहां है? राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. विधानसभा में विधायकजी का माइक बंद किया विधानसभा चल रही है। माननीय विविध विधियों से अपनी बात सदन के पटल पर रख रहे हैं। एक माननीय ने तो ऐसे संकेत के माध्यम से अपनी बात दूसरे माननीय तक पहुंचाई कि न बता सकते हैं, न दिखा सकते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। इशारा अश्लील था। लेकिन हम बात करेंगे राम जी के भजन की। राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से कांग्रेस विधायक मांगेलाल मीणा अपनी मांगें रख रहे थे। कह रहे थे कि सरकार मेरी मांगों को बजट का जवाब देते वक्त समावेशित करे। लेकिन सभापति महोदय ने इसी बीच छगन सिंह राजपुरोहित का नाम ले लिया। अपनी बात कटती देख मांगेलाल भजन गाने लगे- म्हारी काया का सैलानी भंवरा राम सुमर ले रे.. फिर बोले-राम की बात करने वाले विघ्न नहीं डालते। विध्न डालने वालों को क्या कहते हैं, आप सब जानते हैं। सभापति जी ने उनका माइक बंद कर दिया। 2. बीकानेर के जूनियर असिस्टेंट की ‘जादूगरी’ जादूगर वैसे ही बदनाम हैं। बेचारा जादूगर ज्यादा से ज्यादा क्या कर सकता है? टोपी से कबूतर निकाल सकता है, बस। लेकिन असली जादूगर तो बीकानेर का शुभकरण परिहार निकला। फलोदी की एक ग्राम पंचायत में जूनियर असिस्टेंट की मामूली नौकरी। एसीबी ने छापा मारा तो सवा 2 करोड़ का तो सोना ही निकल आया। लाखों की चांदी। पांच सौ के नोटों की गड्डियां देख टीम ने मशीन मंगवाई। गिने तो 76 लाख निकले। इतना ही नहीं, पांच मकान और 65 बीघा जमीन का मालिक निकला। ये महाशय पत्नी को गिफ्ट में मकान और प्लॉट देते हैं। अब आप सोचिए, 35 हजार के मासिक वेतन में क्या जोड़ा जा सकता है। आधा वेतन तो दूध-सब्जी की भेंट चढ़ जाता है। अभी तो टीमें खंगाल रही हैं। जादूगरी के और भी जलवे सामने आ सकते हैं। 3. SDM पहुंचे सरकारी स्कूल, चखा मिड-डे मील सुदूर रेगिस्तानी जिले बाड़मेर का गडरा रोड इलाका। इलाके में एक सरकारी स्कूल। दोपहर का वक्त था। एसडीएम साहब अचानक पधार गए। वही एसडीएम जो धोती-कमीज और सिंधी टोपी वाली रील में वायरल हुए थे। बरामदे में बैठकर बच्चे मिड डे मील खा रहे थे। एसडीएम साहब ने आदेश दिया- एक थाली में भोजन ले आओ। थाली लाई गई। साहब ने एक कौर खाया, फिर बच्चों से पूछा- स्वाद कैसा है बेटा? एक बच्चे की आवाज आई- मस्त है। एसडीएम ने फिर पूछा- मस्त है? तो इसमें प्याज कहां है? आलू कहां है? मटर कहां है? मिर्ची कहां है? कुछ नहीं है। इसके बाद एसडीएम साहब रसोईघर में पहुंचे जहां कुक और हेल्पर नाम की दो महिलाएं अपराधी की तरह खड़ी थीं। एसडीएम बोले- अपने घर में जो बनता है वैसा बनाओ। बच्चे कोई दूसरे तो हैं नहीं। अपने घर के बच्चे हैं। बच्चे तो घर के हैं, लेकिन मिड-डे मिल के लिए हर बच्चे के हिसाब से करीब साढ़े 6 रुपए मिलते हैं। 2200 रुपए मंथली में कुक-हेल्पर आहार बनाती हैं। स्वाद कैसे आएगा? किसी भामाशाह के जरिए स्वाद की व्यवस्था कर भी दी जाए तो ‘बीकानेर वाले जादूगर’ हर जगह बैठे हैं। जो कुछ भी गायब कर सकते हैं। 4. चलते-चलते.. अजमेर में केकड़ी इलाके के एक गांव में हेरिटेज रिसॉर्ट है। हवेली टाइप रिसॉर्ट का मुख्य द्वार ग्रामीण मोहल्ले में खुलता है। वहां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब घूम रहा है। रिसॉर्ट में ठहरे विदेशी पर्यटकों के साथ गांव के बच्चे मस्ती में डांस कर रहे हैं। बैकग्राउंड में तेज आवाज में देसी म्यूजिक बज रहा है। बोल कुछ इस प्रकार हैं- बालम नई फॉर्च्युनर लाया है, जिसमें सवार बींदणी की चोटी रफ्तार के कारण हिल रही है और गाड़ी जयपुर से अजमेर तक इसी तरह चलेगी। गाने के बोल से न बच्चों को कुछ लेना-देना, न उनके साथ नाच रहे युवा पर्यटक को। बच्चों के साथ बच्चा बनकर विदेशी युवक खूब नाच रहा है। दल के साथ की महिलाएं खुश होकर अपने मोबाइल में यह दृश्य कैद कर रही हैं। बच्चे और पर्यटक एक-दूसरे की भाषा नहीं समझ रहे। लेकिन संगीत इन्हें ऐसे जोड़ा कि अब सोशल मीडिया पर जलवे हैं। इनपुट सहयोग- ऋषभ सैनी (जयपुर), अनुराग हर्ष (बीकानेर), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..


