व्यापार मुनाफे के लिए ही कोई सौदा करता है। क्योंकि लोगों का उद्देश्य पैसा कमाना है। चूंकि सोना और चांदी के रेट अचानक बढ़े और फिर थोड़े बहुत अंतराल से बढ़ते-घटते रहे। अंतत: चांदी और सोना अपने तत्कालीन रेट से ऊपर जाकर स्थिर हो गए। ऐसे में निवेशकों ने अपना पैसा इनमें लगा दिया। इसका प्रत्यक्ष असर रियल एस्टेट कारोबार पर दिखाई दे रहा है। दरअसल सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न होने से सरकारी सेक्टर में काम करने वालों को पूरा भुगतान नहीं मिल पा रहा है। फसलों की स्थिति भी प्रकृति की मार से बहुत अच्छी नहीं है। इससे मनी सर्कुलेशन लगभग चौपट हो गया है। ऐसे कारणों से रियल एस्टेट कारोबार में मार्च माह के आस-पास जो उछाल आता था, वहइसबार नहीं दिख रहा है। पहले लोग शेयर बाजार में गए फिर क्रिप्टो और उसके बाद सोना-चांदी में निवेश के कारण बाजार का पूरा पैसा इन्हीं सेक्टरों में चला गया। सोने-चांदी के हालात तो यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में खेती किसानी का काम करने वाले भी इसमें निवेश की सलाह मांग रहे हैं। इसका मतलब यह है कि इन मेटल्स में उछाल को लेकर जो मैसेज है, वह नीचे तक है। इसके अलावा अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री कराने पर रोक संबंधी आदेश और वैध कॉलोनियों में इन्वेस्टमेंट के लिए महंगी दरों पर रजिस्ट्री होना भी महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनकी वजह से निवेशकों ने भूमि में निवेश से दूरी बना ली है। अभी तक जो लोग संपत्ति में निवेश कर रहे थे अब उनका रुख सोना-चांदी की तरफ है। कारण सोना-चांदी में निवेश उन्हें संपत्ति से कम समय में ज्यादा फायदा दे रहा है। इसी कारण रजिस्ट्री कम हो गई हैं और फरवरी के दूसरे सप्ताह में भी पंजीयन दफ्तर सूना-सूना है। भास्कर एक्सपर्ट – आशीष पारिख,सीए
रजिस्ट्री घटने से इनकम पर असर
वरिष्ठ जिला पंजीयक अशोक शर्मा ने कहा कि इस बार दस्तावेज पंजीयन कम हुए हैं। कारण सोना-चांदी में निवेश के अलावा अन्य भी हैं। उन्होंने कहा कि इस बार 1050 करोड़ रुपए के राजस्व वसूली का लक्ष्य जिले को मिला है। दो दिन पहले तक 617 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। शुक्रवार को वृत-1 व 2 में कुल 219 रजिस्ट्री हुईं थी। वरिष्ठ उप पंजीयक केएन वर्मा ने कहा कि अभी पहले जैसी भीड़ नहीं है। काम कम है। वहीं अभिभाषक मनीष मंगल ने कहा कि शुक्रवार को उसी दिन रजिस्ट्री का स्लॉट बुक हो रहा था। उन्होंने कहा कि अभी स्लॉट को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, तत्काल मिल रहा है।


