Collectors Transfers: मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र के ठीक तीन दिन पहले शुक्रवार आधी को सरकार द्वारा की प्रशासनिक सर्जरी अभी अधूरी है, जो सत्र खत्म होने के बाद पूरी होगी। इसमें 12 से 20 फीसद जिलों के कलेक्टरों का तबादला लगभग तय है। ये बदलाव केंद्र व राज्य की जनता से जुड़ी महत्वकांक्षी योजनाओं व परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर तय होने वाले जिलों के परफार्मेंस के आधार पर की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव कार्यालय ने जिलों के परफार्मेस से जुड़ा एक रोडमैप तैयार कर लिया है। (MP News)
आगे बदलाव के ये हो सकते हैं आधार
- केंद्र की योजना प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी व ग्रामीण, परिवार कल्याण से जुड़ी केंद्रीय योजनाएं, धरती आबा ग्राम उत्कृष्ट अभियान जैसी योजनाओं व अभियानों में कई जिलों ने बेहतर काम नहीं किया है। जबकि केंद्र अपनी सभी योजनाओं व अभियानों की सीधे निगरानी कर रहा है। कुछ काम तो पीएम प्रगति पर भी निगरानी में है।
- राज्य की महत्वकांक्षी योजनाएंः मातृ व शिशु मृत्युदर में अभी भी कई जिले पिछड़े हैं। इनके कारण राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति खराब होना। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला, किसान और गरीबों के कल्याण के की योजनाओं में 40 से 50% जिलों में नामांतरण व बंटवारे के काम बहुत अटके हुए हैं। मुख्य सचिव कार्यालय में सभी जिलों का परफार्मेस तैयार है।
इन कमियों से बिगड़ी परफार्मेंस रिपोर्ट
खाद संकट- रबी व खरीफ सीजन में रीवा, भिंड, दतिया, नर्मदापुरम व रायसेन जैसे कई जिलों में वितरण व्यवस्था ठीक नहीं थी। किसानों को परेशान होना पड़ा।
स्कूलों में गिरता पंजीयन- स्कूल शिक्षा पर बेहतर काम के दावे के बीच कई जिलों में सरकारी स्कूलों में बच्चों के पंजीयन तेजी से कम हो रहे हैं।
अतिक्रमण- सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ी है तो कुछ जिलों में वन भूमि पर भी अतिक्रमण के मामले पूर्व की तुलना में बढ़ गए हैं।
घटना-दुर्घटनाओं घटना में इजाफा- सड़क दुर्घटना व प्रशासनिक अनदेखियों में होने वाली घटनाएं, इनमें कई लोगों की जाने जा रही है। इसे कई जिले रोक नहीं पा रहे हैं।
प्रशासनिक व राजनीतिक तालमेल की कमी- जिलों में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल नहीं है। इससे विकास काम प्रभावित हो रहे। कई जिलों से शिकायतें मिलीं।
प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ बढ़ती शिकायतें- कई जिलों में अवैध खनन रुक नहीं रहा। (MP News)


