मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार शाम को कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उपाधीक्षक/प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। डीएम ने सभी सूचकांकों में प्राप्त उपलब्धि के आधार पर सबसे नीचे प्रदर्शन करने वाले तीन प्रखंडों – फुलपरास, पंडौल और राजनगर – के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक से कारण पृच्छा करने का निर्देश दिया। बैठक में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने चतुर्थ एएनसी और संस्थागत प्रसव की समीक्षा करने तथा दोषी आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्य नहीं करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को नियमानुसार चयन मुक्त करने को कहा गया। उन्होंने एएनसी प्राप्त लाभार्थियों के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव न कराने के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्देश दिया, ताकि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल सके। जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं के लिए प्रत्येक प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक को प्रतिदिन ऐसी महिलाओं की सूची तैयार कर दूरभाष के माध्यम से फॉलो-अप करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना और प्लान्ड सी-सेक्शन को बढ़ावा देना है। अनुमंडलीय अस्पतालों में तत्काल प्रतिमाह कम से कम 10 सी-सेक्शन कराने का भी निर्देश दिया गया। डीएम ने भव्या पोर्टल पर सभी प्रकार की गतिविधियों की प्रविष्टि सुनिश्चित करने और Vitals की नियम संगत प्रविष्टि का अनुश्रवण करने को कहा। उन्होंने ई-टेलीकम्युनिकेशन को अधिक से अधिक कराने और 50 प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले चिकित्सा पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को कुपोषित बच्चों को एनआरसी अनुमंडलीय अस्पताल, जयनगर भेजने का निर्देश दिया गया। एनसीडी उपचार का कार्य अधिक से अधिक कराते हुए लक्ष्य के अनुरूप स्क्रीनिंग और उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निजी एम्बुलेंस, पैथोलॉजी, आशा या अन्य कर्मियों की मिलीभगत से मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों में न भेजा जाए। अंत में, अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड, नर्सिंग होम और क्लीनिक आदि की लगातार जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा की अध्यक्षता में शनिवार शाम को कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उपाधीक्षक/प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। डीएम ने सभी सूचकांकों में प्राप्त उपलब्धि के आधार पर सबसे नीचे प्रदर्शन करने वाले तीन प्रखंडों – फुलपरास, पंडौल और राजनगर – के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक से कारण पृच्छा करने का निर्देश दिया। बैठक में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने चतुर्थ एएनसी और संस्थागत प्रसव की समीक्षा करने तथा दोषी आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और बिचौलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्य नहीं करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को नियमानुसार चयन मुक्त करने को कहा गया। उन्होंने एएनसी प्राप्त लाभार्थियों के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव न कराने के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्देश दिया, ताकि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल सके। जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं के लिए प्रत्येक प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक को प्रतिदिन ऐसी महिलाओं की सूची तैयार कर दूरभाष के माध्यम से फॉलो-अप करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना और प्लान्ड सी-सेक्शन को बढ़ावा देना है। अनुमंडलीय अस्पतालों में तत्काल प्रतिमाह कम से कम 10 सी-सेक्शन कराने का भी निर्देश दिया गया। डीएम ने भव्या पोर्टल पर सभी प्रकार की गतिविधियों की प्रविष्टि सुनिश्चित करने और Vitals की नियम संगत प्रविष्टि का अनुश्रवण करने को कहा। उन्होंने ई-टेलीकम्युनिकेशन को अधिक से अधिक कराने और 50 प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले चिकित्सा पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को कुपोषित बच्चों को एनआरसी अनुमंडलीय अस्पताल, जयनगर भेजने का निर्देश दिया गया। एनसीडी उपचार का कार्य अधिक से अधिक कराते हुए लक्ष्य के अनुरूप स्क्रीनिंग और उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निजी एम्बुलेंस, पैथोलॉजी, आशा या अन्य कर्मियों की मिलीभगत से मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों में न भेजा जाए। अंत में, अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड, नर्सिंग होम और क्लीनिक आदि की लगातार जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।


