India-US Trade Deal का बड़ा असर, Piyush Goyal बोले- अब प्रतिस्पर्धी दाम पर मिलेगा Crude Oil

India-US Trade Deal का बड़ा असर, Piyush Goyal बोले- अब प्रतिस्पर्धी दाम पर मिलेगा Crude Oil

 वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत एवं अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम व्यापार समझौता देश की ऊर्जा जरूरतों को भी शामिल करेगा और इससे भारत को कच्चा तेल अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर हासिल करने में मदद मिलेगी।
गोयल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत और अमेरिका ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है और सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयासरत है।

 500 अरब डॉलर में कच्चा तेल, एलएनजी और रसोई गैस जरुरते शामिल

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के व्यापार में कच्चा तेल, एलएनजी और रसोई गैस जैसी भारत की ऊर्जा जरूरतें भी शामिल होंगी।
गोयल ने कहा, “भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और इसकी ऊर्जा मांग प्रतिवर्ष लगभग सात प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। आयात बढ़ाने और आपूर्तिकर्ताओं की संख्या अधिक होने से कच्चा तेल अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर प्राप्त किया जा सकेगा।”
भारत और अमेरिका ने पिछले सप्ताह एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति की घोषणा की थी, जिसके तहत कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में कटौती कर द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा।

समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जबकि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक व्यापक शृंखला पर आयात शुल्क खत्म कर देगा या उसमें कटौती करेगा।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में करीब 14 करोड़ टन इस्पात का वार्षिक उत्पादन करता है और आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की उम्मीद है। इसके लिए देश को इस्पात निर्माण में प्रयुक्त विशेष कोयला कोकिंग कोल की जरूरत होगी, जिसका आयात फिलहाल लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये का है और इसके तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

 आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी

उन्होंने कहा कि भारत कोकिंग कोल के आयात के लिए दो-तीन देशों पर निर्भर है और आपूर्तिकर्ताओं की संख्या बढ़ने से प्रतिस्पर्धी मूल्य और आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
गोयल ने कहा कि अमेरिका बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और वितरण से जुड़े उत्पादों में मजबूत है और भारत इन क्षेत्रों में अधिक पहुंच चाहता है ताकि डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया जा सके।
उन्होंने बताया कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) निर्यात फिलहाल करीब 200 अरब डॉलर (करीब 18 लाख करोड़ रुपये) है और उन्नत अमेरिकी उपकरणों तक पहुंच से इस क्षेत्र में और बढ़ोतरी होगी। इस तरह आईटी निर्यात लगभग 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

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