कैमूर के भभुआ शहर में UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशंस 2026 के समर्थन में दर्जनों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एक दिवसीय धरना देते हुए पूरे देश में इस रेगुलेशन को लागू करने की मांग की। संगठन के सदस्यों ने बताया कि विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्रों पर हो रहे उत्पीड़न, भेदभाव और मानसिक शोषण को यूजीसी लागू होने से रोका जा सकेगा। उनका मानना है कि इससे समानता का भाव बढ़ेगा और शिक्षा का माहौल बेहतर होगा। ”छात्रों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न आम बात” छात्र राकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न आम बात हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रैक्टिकल में नंबर काटे जाते हैं, जिससे छात्रों को आत्महत्या तक के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने इस आंदोलन के माध्यम से देश भर में भेदभाव रोकने का संदेश देने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि यूजीसी लागू नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रहेंगे। पिछड़ी जातियों और जनजातियों के लोग इस मुद्दे पर सड़कों पर अधिवक्ता मुन्ना प्रसाद ने बताया कि UGC कानून से विशेषकर दलित और अल्पसंख्यक छात्रों के साथ हो रहे शोषण को रोका जा सकेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे लागू नहीं किया था, जिस पर रोक लग गई थी। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों और जनजातियों के लोग इस मुद्दे पर सड़कों पर हैं। जिलाधिकारी के माध्यम से भेजने लेटर भेजने का निर्णय प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम 14 सूत्री मांग पत्र कैमूर जिलाधिकारी के माध्यम से भेजने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि यूजीसी लागू होने से जाति-धर्म आधारित भेदभाव समाप्त होगा और ऐसे मामलों में अपराधियों पर मुकदमा चलाया जा सकेगा। कैमूर के भभुआ शहर में UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशंस 2026 के समर्थन में दर्जनों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एक दिवसीय धरना देते हुए पूरे देश में इस रेगुलेशन को लागू करने की मांग की। संगठन के सदस्यों ने बताया कि विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्रों पर हो रहे उत्पीड़न, भेदभाव और मानसिक शोषण को यूजीसी लागू होने से रोका जा सकेगा। उनका मानना है कि इससे समानता का भाव बढ़ेगा और शिक्षा का माहौल बेहतर होगा। ”छात्रों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न आम बात” छात्र राकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न आम बात हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रैक्टिकल में नंबर काटे जाते हैं, जिससे छात्रों को आत्महत्या तक के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने इस आंदोलन के माध्यम से देश भर में भेदभाव रोकने का संदेश देने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि यूजीसी लागू नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रहेंगे। पिछड़ी जातियों और जनजातियों के लोग इस मुद्दे पर सड़कों पर अधिवक्ता मुन्ना प्रसाद ने बताया कि UGC कानून से विशेषकर दलित और अल्पसंख्यक छात्रों के साथ हो रहे शोषण को रोका जा सकेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे लागू नहीं किया था, जिस पर रोक लग गई थी। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों और जनजातियों के लोग इस मुद्दे पर सड़कों पर हैं। जिलाधिकारी के माध्यम से भेजने लेटर भेजने का निर्णय प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम 14 सूत्री मांग पत्र कैमूर जिलाधिकारी के माध्यम से भेजने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि यूजीसी लागू होने से जाति-धर्म आधारित भेदभाव समाप्त होगा और ऐसे मामलों में अपराधियों पर मुकदमा चलाया जा सकेगा।


