लखनऊ में एसटीएफ को बीते कुछ दिनों से विभिन्न राज्यों से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले शातिर गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिल रही थी। इस पर एसटीएफ की विभिन्न इकाइयों को अभिसूचना संकलन और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एसटीएफ लखनऊ टीम लगातार इनपुट पर काम कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि उड़ीसा (ओडिशा) के मलखानगिरी से बड़ी मात्रा में गांजा लादकर एक ट्रक लखनऊ आने वाला है। आगे-आगे चलती थी बिना नंबर की स्कॉर्पियो सूचना के अनुसार ट्रक नंबर NL-01-AA-0511 सुल्तानपुर के रास्ते लखनऊ पहुंचने वाला था। ट्रक के आगे बिना नंबर की काले रंग की स्कॉर्पियो चलती थी, जिसमें बैठे लोग पुलिस चेकिंग की सूचना ट्रक चालक को देते रहते थे। योजना के मुताबिक शालीमार बंधा रोड पर गांजे का बंटवारा होना था। एसटीएफ टीम ने मौके पर पहुंचकर सक्षम अधिकारी की मौजूदगी में ट्रक और स्कॉर्पियो की तलाशी ली। जांच में भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। इसके बाद मौके से कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रेलर की चेसिस में बनाई थी गुप्त कैविटी पूछताछ में ट्रक चालक कुलदीप यादव ने बताया कि वह जीतू श्रीवास्तव के कहने पर उड़ीसा से गांजा लाता था। गांजा लाने के लिए बिना बॉडी वाले ट्रेलर ट्रक का इस्तेमाल किया जाता था। ट्रेलर की चेसिस के ऊपर बने प्लेटफॉर्म में गुप्त कैविटी तैयार की गई थी, जिसमें 5 से 8 कुंतल तक गांजा आसानी से छिपाया जाता था। उसने बताया कि गांजा लोड होने के बाद ट्रक का नंबर बंद कर दिया जाता था और इंटरनेट कॉल के जरिए संपर्क रखा जाता था। अब तक वह 15 से 20 बार जीतू के लिए उड़ीसा से गांजा ला चुका है। कई जिलों में फैला था नेटवर्क मुख्य आरोपी जीतू श्रीवास्तव ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह मयंक श्रीवास्तव उर्फ सूरज, रमन, पारितोष त्रिपाठी और जसवंत शर्मा उर्फ डोरेमॉन के साथ मिलकर तस्करी का नेटवर्क चलाता था। गिरोह लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, गोण्डा, बहराइच समेत कई जिलों में मांग के अनुसार गांजा सप्लाई करता था। भुगतान क्लियर होने के बाद ट्रक और ड्राइवर की व्यवस्था कर उड़ीसा भेजा जाता था। लखनऊ सीमा में प्रवेश करते ही ड्राइवर सूचना देता था, जिसके बाद आरोपी अपनी गाड़ी से ट्रक को तय स्थान तक एस्कॉर्ट करते थे। तस्करी के पैसों से खरीदी गाड़ियां जांच में सामने आया है कि गांजा तस्करी से अर्जित धन से यूपी 32 जीएन 3834 नंबर का डाला और एक माइक्रा कार खरीदी गई थी, जिनका उपयोग सप्लाई में किया जाता था। एसटीएफ अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में गहन छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था।


