आज से बिहार में पहलवानों का जमावड़ा लगने वाला है। माटी का बल-दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और बिहार कुश्ती संघ के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। यह कुश्ती प्रतियोगिता दो दिवसीय होगी, जिसमें बिहार के कोने कोने से आए कुल 186 पहलवान हिस्सा लेंगे। इस प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ पहलवान को 72 साल पुराना चांदी का गदा भी दिया जाएगा। दंगल प्रतियोगिता का उद्घाटन बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मौजूद रहेंगी। पुरुषों के लिए चार भार वर्ग, महिलाएं का दो भार वर्ग में प्रतियोगिता बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि बिहार की पारंपरिक कुश्ती मल्लयुद्ध पर आधारित इस कुश्ती प्रतियोगिता में पुरुषों के लिए चार भार वर्ग और महिलाओं के लिए दो भार वर्ग में प्रतियोगिता होगी। पुरुष के 50- 60 किलोग्राम वर्ग में 66, 60-70 किग्रा वर्ग में 43 , 70-80 किग्रा में 22, 80-90 किग्रा वर्ग में 16 और 90 से अधिक किग्रा भार वर्ग में 13 खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं। इसी तरह महिला वर्ग के 50-60 किलोग्राम भार वर्ग में 16 और 60 किग्रा से ज्यादा भार वर्ग में 8 महिला पहलवान खिलाड़ी हिस्सा ले रही हैं। विजेताओं के मिलेगी 12.50 लाख रुपए की राशि जमुई के एस के सिंह मेमोरियल स्टेडियम में इस प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता में विभिन्न भार वर्ग के विजेताओं के बीच कुल 12.50 लाख रुपए की राशि नकद पुरस्कार के रूप में दी जाएगी। विभिन्न भार वर्ग में प्रथम स्थान के विजेता को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान वाले को 50 हजार और तृतीय स्थान को 25 हजार का नकद पुरस्कार के रूप में दिया जाएगा। 1954 में बनी थी चांदी की गदा पुरस्कार के रूप में दिया जाने वाला चांदी का गदा बिहार में पारंपरिक कुश्ती की विरासत और सम्मान का प्रतीक है। 1954 में निर्मित यह चांदी का गदा 1975 में अंतिम बार बिहार के भारतीय हेवीवेट फ्री स्टाइल पहलवान और भारतीय सेना में कार्यरत रहे विश्वनाथ सिंह को बिहार केसरी के रूप में मिली थी। सीवान जिले के डुमराहर (दरौली के पास) नामक गांव में जन्में अंतरराष्ट्रीय पहलवान विश्वनाथ सिंह के सम्मान में यह गदा एक बार फिर बिहार के सर्वश्रेष्ठ पहलवान को दी जा रही है। सोनपुर, छपरा में आयोजित 2023 के मल्लयुद्ध में कैमूर राधेश्याम और मंसूरचक, बेगूसराय में आयोजित 2024 के मल्लयुद्ध में कैमूर के ही शुभम कुमार यादव ने प्रतियोगिता का सर्वोच्च पुरस्कार चांदी का गदा जीता था। मुल्तानी मिट्टी, हल्दी, सरसों के तेल से बनाया अखाड़ा रवीन्द्रण शंकरण ने आगे बताया कि दंगल प्रतियोगिता के लिए पहलवानों की सुविधा के लिए खास तरह का अखाड़ा का निर्माण किया गया है, जिसमें उनकी सेहत और ज़ख्मी होने से नुकसान कम से कम हो इसका पूरा ध्यान रखा गया है। पारंपरिक तरीके से इस 45 फीट डायमीटर वाले अखाड़े के निर्माण में 90 ट्रैक्टर मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी, 1.5 क्विंटल (150 किग्रा) हल्दी, 60 लीटर सरसों के तेल, 1 क्विंटल (100 किग्रा) दही, 1 क्विंटल (100 किग्रा) दूध और 500 पीस नींबू का उपयोग किया गया है। आज से बिहार में पहलवानों का जमावड़ा लगने वाला है। माटी का बल-दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और बिहार कुश्ती संघ के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। यह कुश्ती प्रतियोगिता दो दिवसीय होगी, जिसमें बिहार के कोने कोने से आए कुल 186 पहलवान हिस्सा लेंगे। इस प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ पहलवान को 72 साल पुराना चांदी का गदा भी दिया जाएगा। दंगल प्रतियोगिता का उद्घाटन बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मौजूद रहेंगी। पुरुषों के लिए चार भार वर्ग, महिलाएं का दो भार वर्ग में प्रतियोगिता बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि बिहार की पारंपरिक कुश्ती मल्लयुद्ध पर आधारित इस कुश्ती प्रतियोगिता में पुरुषों के लिए चार भार वर्ग और महिलाओं के लिए दो भार वर्ग में प्रतियोगिता होगी। पुरुष के 50- 60 किलोग्राम वर्ग में 66, 60-70 किग्रा वर्ग में 43 , 70-80 किग्रा में 22, 80-90 किग्रा वर्ग में 16 और 90 से अधिक किग्रा भार वर्ग में 13 खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं। इसी तरह महिला वर्ग के 50-60 किलोग्राम भार वर्ग में 16 और 60 किग्रा से ज्यादा भार वर्ग में 8 महिला पहलवान खिलाड़ी हिस्सा ले रही हैं। विजेताओं के मिलेगी 12.50 लाख रुपए की राशि जमुई के एस के सिंह मेमोरियल स्टेडियम में इस प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता में विभिन्न भार वर्ग के विजेताओं के बीच कुल 12.50 लाख रुपए की राशि नकद पुरस्कार के रूप में दी जाएगी। विभिन्न भार वर्ग में प्रथम स्थान के विजेता को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान वाले को 50 हजार और तृतीय स्थान को 25 हजार का नकद पुरस्कार के रूप में दिया जाएगा। 1954 में बनी थी चांदी की गदा पुरस्कार के रूप में दिया जाने वाला चांदी का गदा बिहार में पारंपरिक कुश्ती की विरासत और सम्मान का प्रतीक है। 1954 में निर्मित यह चांदी का गदा 1975 में अंतिम बार बिहार के भारतीय हेवीवेट फ्री स्टाइल पहलवान और भारतीय सेना में कार्यरत रहे विश्वनाथ सिंह को बिहार केसरी के रूप में मिली थी। सीवान जिले के डुमराहर (दरौली के पास) नामक गांव में जन्में अंतरराष्ट्रीय पहलवान विश्वनाथ सिंह के सम्मान में यह गदा एक बार फिर बिहार के सर्वश्रेष्ठ पहलवान को दी जा रही है। सोनपुर, छपरा में आयोजित 2023 के मल्लयुद्ध में कैमूर राधेश्याम और मंसूरचक, बेगूसराय में आयोजित 2024 के मल्लयुद्ध में कैमूर के ही शुभम कुमार यादव ने प्रतियोगिता का सर्वोच्च पुरस्कार चांदी का गदा जीता था। मुल्तानी मिट्टी, हल्दी, सरसों के तेल से बनाया अखाड़ा रवीन्द्रण शंकरण ने आगे बताया कि दंगल प्रतियोगिता के लिए पहलवानों की सुविधा के लिए खास तरह का अखाड़ा का निर्माण किया गया है, जिसमें उनकी सेहत और ज़ख्मी होने से नुकसान कम से कम हो इसका पूरा ध्यान रखा गया है। पारंपरिक तरीके से इस 45 फीट डायमीटर वाले अखाड़े के निर्माण में 90 ट्रैक्टर मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी, 1.5 क्विंटल (150 किग्रा) हल्दी, 60 लीटर सरसों के तेल, 1 क्विंटल (100 किग्रा) दही, 1 क्विंटल (100 किग्रा) दूध और 500 पीस नींबू का उपयोग किया गया है।


