US-Iran Tension: डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन सबसे अच्छी बात होगी, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात के तुरंत बाद आई हैं। इससे पहले दिन में उन्होंने पुष्टि की थी कि वह मध्य-पूर्व (Middle East) में दूसरा विमानवाहक पोत समूह तैनात कर रहे हैं।
ईरान में इस्लामी धार्मिक शासन को उखाड़ फेंकने के बारे में पूछे गए सवाल पर ट्रम्प ने कहा, “ऐसा लगता है कि यही सबसे अच्छी बात हो सकती है। वे 47 सालों से सिर्फ बातें कर रहे हैं, कर रहे हैं और कर रहे हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। हालांकि, उन्होंने शुक्रवार को संकेत दिया कि यह उनके प्रयासों का केवल एक पहलू है, जैसा कि अमेरिका चाहता है। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप से वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को निष्क्रिय करने और हमास-हिजबुल्लाह जैसी प्रॉक्सी समूहों पर आर्थिक नियंत्रण लगाने पर जोर दे रहे हैं। दोनों राष्ट्राध्यक्षों का मानना है कि यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह मिशन का केवल एक छोटा हिस्सा होगा।
अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव
बता दें कि ईरान लंबे समय से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। पिछले साल अमेरिका और इजराइल के संघर्ष से पहले उसने यूरेनियम को 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित किया था, जो हथियार-ग्रेड स्तर के करीब है।
उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को कैरिबियन से मध्य-पूर्व की ओर भेजकर ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है। यह पोत पहले से ही क्षेत्र में मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य अमेरिकी युद्धपोतों के साथ तैनात होगा। फिलहाल, ट्रंप ने कूटनीति की संभावना के लिए दरवाजा खुला रखा है, जबकि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का काम जारी है।
ट्रंप के बयान से बढ़ सकता है टकराव
ड्रंप के हालिया बयान पर मध्य-पूर्व के जानकारों का मानना है कि ट्रम्प का ईरान को लेकर दिया गया भड़काऊ बयान न केवल अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता को भी बढ़ावा दे सकता है। ऐसे बयान अक्सर कूटनीति के विकल्पों को सीमित कर देते हैं और सैन्य कार्रवाई की संभावना पर वैश्विक चिंता पैदा करते हैं।
वहीं कुछ विशेषज्ञों की मानें तो ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताते आया है। ऐसे समय में किसी भी प्रकार के भड़काऊ बयान या सैन्य गतिविधि से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा होती है और वार्ता के दरवाजे भी सिकुड़ सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति को कूटनीति के माध्यम से सुलझाना सबसे बेहतर रास्ता होगा।


