पूर्णिया में सालों से बंद पड़े गर्ल्स हॉस्टलों का मामला बिहार राज्य महिला आयोग पहुंच गया है। पूर्णिया विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग-अलग कॉलेजों में बने गर्ल्स हॉस्टलों की स्थिति से अवगत कराया है और मांग पत्र सौंपा है। डॉ. आलोक राज ने कहा कि यूजीसी फंड और सरकारी संसाधनों से तैयार किए गए छात्रावास अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप चालू नहीं किए गए हैं, जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि छात्राओं के भविष्य के साथ भी अन्याय है। महिला कॉलेज, पूर्णिया का गर्ल्स हॉस्टल वर्षों तक सुचारू रूप से चलता रहा, लेकिन जनवरी 2025 से बिना स्पष्ट कारण के उसे बंद कर दिया गया। पूर्णिया कॉलेज में यूजीसी निधि से निर्मित गर्ल्स हॉस्टल आज तक छात्रावास के रूप में शुरू नहीं किया गया है और भवन का इस्तेमाल नियमों के विपरीत अन्य कार्यों में किया जा रहा है।
असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका वहीं, मुंशी लाल आर्य कॉलेज, कस्बा और गोरेलाल मेहता कॉलेज, बनमनखी में भी वर्षों पहले बने गर्ल्स हॉस्टल अब तक चालू नहीं हो सके हैं। लंबे समय से बंद रहने के कारण ये भवन जर्जर होते जा रहे हैं और वहां असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका भी बढ़ रही है। डॉ. आलोक राज ने आगे कहा कि गर्ल्स हॉस्टल बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों की छात्राओं को हो रहा है। कई छात्राएं सुरक्षित आवास की सुविधा नहीं मिलने के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। जो छात्राएं पढ़ाई जारी रखती हैं, उन्हें निजी लॉज या असुरक्षित किराए के कमरों में रहना पड़ता है, जिससे उनके साथ छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और अन्य आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। हाल के समय में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने आश्वासन दिया है कि वह शीघ्र ही पूर्णिया के डीएम को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। इस प्रकरण के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन, संबंधित कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के बीच बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है। डॉ. आलोक राज ने यह भी कहा कि कानून विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में जनहित याचिका दायर की जाएगी। पूर्णिया में सालों से बंद पड़े गर्ल्स हॉस्टलों का मामला बिहार राज्य महिला आयोग पहुंच गया है। पूर्णिया विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के संस्थापक डॉ. आलोक राज ने अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग-अलग कॉलेजों में बने गर्ल्स हॉस्टलों की स्थिति से अवगत कराया है और मांग पत्र सौंपा है। डॉ. आलोक राज ने कहा कि यूजीसी फंड और सरकारी संसाधनों से तैयार किए गए छात्रावास अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप चालू नहीं किए गए हैं, जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि छात्राओं के भविष्य के साथ भी अन्याय है। महिला कॉलेज, पूर्णिया का गर्ल्स हॉस्टल वर्षों तक सुचारू रूप से चलता रहा, लेकिन जनवरी 2025 से बिना स्पष्ट कारण के उसे बंद कर दिया गया। पूर्णिया कॉलेज में यूजीसी निधि से निर्मित गर्ल्स हॉस्टल आज तक छात्रावास के रूप में शुरू नहीं किया गया है और भवन का इस्तेमाल नियमों के विपरीत अन्य कार्यों में किया जा रहा है।
असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका वहीं, मुंशी लाल आर्य कॉलेज, कस्बा और गोरेलाल मेहता कॉलेज, बनमनखी में भी वर्षों पहले बने गर्ल्स हॉस्टल अब तक चालू नहीं हो सके हैं। लंबे समय से बंद रहने के कारण ये भवन जर्जर होते जा रहे हैं और वहां असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की आशंका भी बढ़ रही है। डॉ. आलोक राज ने आगे कहा कि गर्ल्स हॉस्टल बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों की छात्राओं को हो रहा है। कई छात्राएं सुरक्षित आवास की सुविधा नहीं मिलने के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रही हैं। जो छात्राएं पढ़ाई जारी रखती हैं, उन्हें निजी लॉज या असुरक्षित किराए के कमरों में रहना पड़ता है, जिससे उनके साथ छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न और अन्य आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। हाल के समय में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा ने आश्वासन दिया है कि वह शीघ्र ही पूर्णिया के डीएम को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। इस प्रकरण के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन, संबंधित कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के बीच बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है। डॉ. आलोक राज ने यह भी कहा कि कानून विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में जनहित याचिका दायर की जाएगी।


