भास्कर संवाददाता | उज्जैन यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (संविदा) पीयूष भार्गव का कार्यकाल 19 फरवरी को समाप्त हो रहा है। उनकी संविदा अवधि फिर से बढ़ाए जाने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इधर, नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर दो अधिकारियों को कार्यपालन यंत्री बनाया है, जो सिंहस्थ से जुड़े कार्य संभालेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि भार्गव की संविदा अवधि फिर से बढ़ना मुश्किल है। सेवानिवृत्ति के बाद पीयूष भार्गव के अलावा पीसी यादव को संविदा आधार पर एक वर्ष के लिए रखते हुए सेवाएं ली थी। दोनों की संविदा अवधि 20 फरवरी 2025 में समाप्त होने के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से आए पत्र के आधार पर एक वर्ष के लिए फिर से बढ़ा दी गई। इस आधार पर भार्गव आैर यादव की संविदा अवधि 19 मार्च को समाप्त हो रही है। इधर, इस संविदा अवधि के दौरान मार्च 2025 में एक महिला सहकर्मी ने पीयूष भार्गव पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शिकायत की। इस पर एफआईआर दर्ज की गई। बावजूद निगम के अधिकारियों ने सिंहस्थ से जुड़े सभी मुख्य कार्यों का जिम्मा भार्गव को दे दिया। वहीं पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मामले में चालान तक पेश नहीं किया जा सका है। इससे पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं।
अधिकारी भी कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नहीं भार्गव की संविदा अवधि समाप्त होने से पहले निगम में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। अनौपचारिक चर्चा में अधिकारी भी भार्गव का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। कोई पत्र व्यवहार भी अब तक नहीं हुआ है। वहीं मप्र शासन ने सिंहस्थ प्रकोष्ठ में दो अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसमें हिमांशु तिवारी और राजेंद्रकुमार जैन को प्रतिनियुक्ति पर कार्यपालन यंत्री बनाया है। दोनों अब सिंहस्थ से जुड़े विकास और व्यवस्था संबंधी कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। मामले को लेकर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। मैसेज का भी जवाब नहीं दिया।


