’10 फरवरी को बेटे ने कहा था होली पर घर लौटूंगा… फिर लाश बनकर क्यों आया? मैं अब उसके बिना कैसे जिऊंगी?’ ये चीख है उस मां की जिसने अपने बड़े बेटे को 26 साल की उम्र में खो दिया। 11 फरवरी(बुधवार) की शाम युवक का शव सहरसा के सुरसर नदी में सिर कटे अवस्था में मिला था। 12 फरवरी को उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। शुक्रवार को उसकी औपचारिक पहचान हुई। मृतक की पहचान सहरसा के डरहार थाना क्षेत्र के सतौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर वार्ड चार निवासी राजेश कुमार(26) के रूप में हुई है। परिजनों ने रोते-बिलखते गांव में शुक्रवार की शाम उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, सहरसा पुलिस हत्या की पहेली सुलझाने में जुट गई है। राजेश की हत्या कैसे हुई? सिर कैसे कट गया? शव नदी तक कैसे पहुंचा? राजेश बेंगलुरु से बिहार कैसे आया? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है। घटनास्थल की देखें कुछ तस्वीरें… इस बीच दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 20KM दूर मृतक के घर पहुंची। इस दौरान टीम ने परिवार, ग्रामीण और रिश्तेदारों से बातचीत की। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… कान के पास मिले गहरे जख्म के निशान सहरसा में गुरुवार को सोनवर्षा अंचल क्षेत्र के मैना अरसी मुख्य मार्ग स्थित सुरसर नदी किनारे अज्ञात युवक का सिरकटा शव मिला था। देहद पंचायत के पमदपुर मौजा में सुरसर नदी के पूर्वी किनारे पर ग्रामीणों ने शव को देखा था। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। सोनबर्षा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। पुलिस ने शव का सिर तलाशना शुरू किया तो घटनास्थल से लगभग आधे किलोमीटर दूर पर बोरे में युवक का सिर मिला। घटना की जानकारी मिलते ही सहरसा के SP हिमांशु और सिमरी बख्तियारपुर के DSP मुकेश ठाकुर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवक के शव की तस्वीर खींच सोशल मीडिया पर वायरल कर दी ताकि उसके परिजन तक पहुंच सके। शुक्रवार को राजेश के चाचा ने शव की पहचान की। मृतक की कनपटी के पास गहरे जख्म के निशान भी मिले थे। 3 साल की उम्र में पिता का हो गया था देहांत राजेश बहुत ही गरीब परिवार से आता था। वो अपने घर में इकलौता कमाने वाला व्यक्ति था। उसके ऊपर घर के 10 लोगों की जिम्मेदारियां थी, जिसे छोड़कर वो अब इस दुनिया से जा चुका है। मृतक के सौतेले पिता दशरथ यादव बताते हैं, मैं चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। राजेश के पिता रामचंद्र भइया सबसे बड़े थे। उनका साल 1998 में देहांत हो गया था। उस समय राजेश सिर्फ 3 साल का था और उसका एक छोटा भाई भी था। घर की परिस्थितियों को देखते हुए परिवार वालों ने मेरी शादी भाभी अनीता देवी से साल 2001 में करा दी। इसके बाद मेरे चार बच्चे हुए, दो बेटा और दो बेटी। इस तरह घर में कुल छह बच्चे हो गए। मैंने सभी बच्चों को बराबर समझकर ही पाला और पढ़ाया-लिखाया। वे आगे कहते हैं, राजेश घर का सबसे बड़ा बेटा था। उसने 12वीं तक पढ़ाई की और फिर घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए मजदूरी करने साल 2023 में बेंगलुरु कमाने के लिए चला गया। घर के छोटे बच्चों की पढ़ाई से लेकर हर जरूरत का ध्यान वही रखता था। मैं खेती-बाड़ी करता था ताकि घर का खर्च चलता रहे। चाचा की नौकरी लगने के बाद आऊंगा घर दशरथ भावुक होते हुए बताते हैं, राजेश हमेशा कहता था कि जब तक छोटे चाचा घनश्याम की नौकरी नहीं लग जाती और मैं अच्छे से कमाने न लग जाऊं, तब तक घर नहीं आऊंगा। हालांकि, उसकी मां की जिद्द थी की वो इस बार होली पर घर आए। इस वजह से राजेश इस बार होली पर घर आने वाला था। 21 अक्टूबर 2025 को भी वो घर आया था। उसने अपना जन्मदिन पूरे परिवार वालों के साथ मनाया। इसके बाद बेंगलुरु के लिए निकल गया था। वह बेंगलुरु में मेहनत कर हर महीने 10 से 15 हजार रुपए घर भेजता था। उसी के पैसों से घर के सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। 4 दिन के लिए घूमने जा रहा हूं, नहीं हो पाएगी बात मृतक की मां बिलख-बिलखकर कहती हैं, मेरा बेटा अब नहीं रहा… अब मुझे खिलाने वाला कौन है? मैं कैसे जिऊंगी? वह बताती हैं कि 10 फरवरी की सुबह बेटे ने कहा था ‘मां, मैं दोस्तों के साथ कहीं घूमने जा रहा हूं। चार दिनों तक आप लोगों से बात नहीं हो पाएगी। मेरा फोन मेरे पास नहीं रहेगा। आप लोग अपना ध्यान रखना। जैसे ही बेंगलुरु वापस आऊंगा, फोन करूंगा। मां आगे बताती हैं, उसने बताया तो था कि कुछ दिनों तक वो फोन नहीं कर पाएगा, लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह हमारी आखिरी बात होगी। मैंने यह भी नहीं पूछा कि वह कहां जा रहा है और किसके साथ जा रहा है… काश पूछ लिया होता। मुझे अपने साथ बेंगलुरु ले जाना चाहता था बेटा वह याद करती हैं कि राजेश हमेशा उन्हें अपने पास ले जाने की बात करता था। कहता था, मां, थोड़ा पैसा जमा होने दो। फिर अच्छा सा घर लेकर आपको अपने साथ रखूंगा। पहले बहन की शादी कर देंगे, फिर आप मेरे साथ चलना। राजेश की बहन रीना BA पास थी। जल्द ही उसकी शादी होने वाली थी। वहीं, सौतेला भाई आदर्श 9वीं का छात्र, विक्रम 12वीं में पढ़ रहा है। छोटी बहन अर्चना 6वीं की छात्रा है। 11 फरवरी को उसने मेरा मैसेज सीन किया था मृतक के चाचा घनश्याम कुमार बताते हैं, 8 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे मेरी भतीजे से आखिरी बार फोन कॉल पर बात हुई थी। उस समय वह बिल्कुल ठीक लग रहा था। 11 फरवरी, बुधवार को मैंने उसे किसी जरूरी काम को लेकर वॉट्सएप मैसेज किया था। उसने मैसेज सीन तो कर लिया, लेकिन रिप्लाई नहीं किया। 12 फरवरी को शाम 7:42 मिनट पर मैंने उसे वॉट्सएप पर कॉल करने का मैसेज भेजा, लेकिन वह मैसेज डिलीवर ही नहीं हुआ। इसी रात हमें बेंगलुरु पुलिस से सूचना मिली कि राजेश की हत्या कर दी गई है। यह खबर मिलते ही हम लोग तुरंत बेंगलुरु के लिए निकल गए। 12 फरवरी की दोपहर वॉट्सएप पर लास्ट सीन था चाचा आगे बताते हैं, जब हम वहां पहुंचे तो देखा कि राजेश का वॉट्सएप लास्ट सीन 12 फरवरी दोपहर 1:35 बजे तक का दिख रहा था, जबकि उसकी हत्या 11 फरवरी को ही कर दी गई थी। यह साफ है कि उसके फोन के साथ छेड़छाड़ की गई है। उसका मोबाइल अब तक गायब है। आरोपी को उसके फोन और वॉट्सएप का लॉक मालूम था, तभी मेरा नंबर भी उसके फोन से ब्लॉक कर दिया गया था। अगर नंबर ब्लॉक नहीं होता तो मेरे मैसेज डिलीवर जरूर होते। आरोपी को फांसी की सजा दी जाए ‘जो भी आरोपी है, उसने बहुत चालाकी से राजेश की हत्या की है। मुझे पूरा यकीन है कि यह काम उसके किसी जानकार या दोस्त ने ही किया है।’ वे बताते हैं, 8 फरवरी को मैंने उससे बच्चों की स्कूल फीस के लिए पैसे मांगे थे। उसने कहा था कि लेबर के सभी लोगों के पैसे आ गए हैं, पहले उनका हिसाब कर दूं, फिर आपको पैसे भेज दूंगा। उसी रात उसने ऑनलाइन फोन-पे से 10 रुपए भेज दिए थे। 11 फरवरी की शाम 6 बजे भी उसने हमें 5 हजार रुपए पैसे भेजे थे। भावुक होते हुए घनश्याम कहते हैं, ‘बकरी की तरह मेरे भतीजे की हत्या कर दी गई। मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि आरोपी को फांसी की सजा दी जाए।’ नशे से दूर रहता था राजेश गांव के मुकेश बताते हैं, राजेश के कातिलों को सामने लाया जाए। आरोपी को सजा मिले तभी हमारे गांव के बेटे को न्याय मिलेगा। राजेश बहुत ही अच्छे स्वभाव का लड़का था। वह किसी तरह के नशे के करीब भी नहीं जाता था। हमेशा शांत रहता था और गांव में उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। राजेश के दोस्त बबलू कहते हैं, वह बहुत अच्छा लड़का था। घर में भी उसका किसी से कोई विवाद नहीं था। करीब एक महीने से मेरी उससे बात नहीं हुई थी। वह बेंगलुरु में ही काम करना चाहता था। वहां वह 15 से 18 हजार रुपए तक कमा लेता था। इस मामले में सिमरी बख्तियारपुर SDPO मुकेश कुमार ठाकुर ने बताया, सोनवर्षा थाना क्षेत्र के रहने वाले राजेश का बेंगलुरु में सुरसर नदी किनारे सिर कटा शव बरामद हुआ था। गुरुवार को पहचान संभव नहीं हो सकी थी। शुक्रवार को शव की शिनाख्त हुई। SDPO ने बताया, शुक्रवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। हत्या किस तरीके से हुई, इसके पीछे क्या कारण थे यह जानने के लिए FSL टीम घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा रही है। उन्होंने कहा, जो भी लोग इस हत्याकांड में शामिल होंगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। बहुत जल्द सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। पुलिस हर बिंदु पर तहकीकात कर रही है। ’10 फरवरी को बेटे ने कहा था होली पर घर लौटूंगा… फिर लाश बनकर क्यों आया? मैं अब उसके बिना कैसे जिऊंगी?’ ये चीख है उस मां की जिसने अपने बड़े बेटे को 26 साल की उम्र में खो दिया। 11 फरवरी(बुधवार) की शाम युवक का शव सहरसा के सुरसर नदी में सिर कटे अवस्था में मिला था। 12 फरवरी को उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। शुक्रवार को उसकी औपचारिक पहचान हुई। मृतक की पहचान सहरसा के डरहार थाना क्षेत्र के सतौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर वार्ड चार निवासी राजेश कुमार(26) के रूप में हुई है। परिजनों ने रोते-बिलखते गांव में शुक्रवार की शाम उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उधर, सहरसा पुलिस हत्या की पहेली सुलझाने में जुट गई है। राजेश की हत्या कैसे हुई? सिर कैसे कट गया? शव नदी तक कैसे पहुंचा? राजेश बेंगलुरु से बिहार कैसे आया? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है। घटनास्थल की देखें कुछ तस्वीरें… इस बीच दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 20KM दूर मृतक के घर पहुंची। इस दौरान टीम ने परिवार, ग्रामीण और रिश्तेदारों से बातचीत की। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… कान के पास मिले गहरे जख्म के निशान सहरसा में गुरुवार को सोनवर्षा अंचल क्षेत्र के मैना अरसी मुख्य मार्ग स्थित सुरसर नदी किनारे अज्ञात युवक का सिरकटा शव मिला था। देहद पंचायत के पमदपुर मौजा में सुरसर नदी के पूर्वी किनारे पर ग्रामीणों ने शव को देखा था। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। सोनबर्षा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। पुलिस ने शव का सिर तलाशना शुरू किया तो घटनास्थल से लगभग आधे किलोमीटर दूर पर बोरे में युवक का सिर मिला। घटना की जानकारी मिलते ही सहरसा के SP हिमांशु और सिमरी बख्तियारपुर के DSP मुकेश ठाकुर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवक के शव की तस्वीर खींच सोशल मीडिया पर वायरल कर दी ताकि उसके परिजन तक पहुंच सके। शुक्रवार को राजेश के चाचा ने शव की पहचान की। मृतक की कनपटी के पास गहरे जख्म के निशान भी मिले थे। 3 साल की उम्र में पिता का हो गया था देहांत राजेश बहुत ही गरीब परिवार से आता था। वो अपने घर में इकलौता कमाने वाला व्यक्ति था। उसके ऊपर घर के 10 लोगों की जिम्मेदारियां थी, जिसे छोड़कर वो अब इस दुनिया से जा चुका है। मृतक के सौतेले पिता दशरथ यादव बताते हैं, मैं चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। राजेश के पिता रामचंद्र भइया सबसे बड़े थे। उनका साल 1998 में देहांत हो गया था। उस समय राजेश सिर्फ 3 साल का था और उसका एक छोटा भाई भी था। घर की परिस्थितियों को देखते हुए परिवार वालों ने मेरी शादी भाभी अनीता देवी से साल 2001 में करा दी। इसके बाद मेरे चार बच्चे हुए, दो बेटा और दो बेटी। इस तरह घर में कुल छह बच्चे हो गए। मैंने सभी बच्चों को बराबर समझकर ही पाला और पढ़ाया-लिखाया। वे आगे कहते हैं, राजेश घर का सबसे बड़ा बेटा था। उसने 12वीं तक पढ़ाई की और फिर घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए मजदूरी करने साल 2023 में बेंगलुरु कमाने के लिए चला गया। घर के छोटे बच्चों की पढ़ाई से लेकर हर जरूरत का ध्यान वही रखता था। मैं खेती-बाड़ी करता था ताकि घर का खर्च चलता रहे। चाचा की नौकरी लगने के बाद आऊंगा घर दशरथ भावुक होते हुए बताते हैं, राजेश हमेशा कहता था कि जब तक छोटे चाचा घनश्याम की नौकरी नहीं लग जाती और मैं अच्छे से कमाने न लग जाऊं, तब तक घर नहीं आऊंगा। हालांकि, उसकी मां की जिद्द थी की वो इस बार होली पर घर आए। इस वजह से राजेश इस बार होली पर घर आने वाला था। 21 अक्टूबर 2025 को भी वो घर आया था। उसने अपना जन्मदिन पूरे परिवार वालों के साथ मनाया। इसके बाद बेंगलुरु के लिए निकल गया था। वह बेंगलुरु में मेहनत कर हर महीने 10 से 15 हजार रुपए घर भेजता था। उसी के पैसों से घर के सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। 4 दिन के लिए घूमने जा रहा हूं, नहीं हो पाएगी बात मृतक की मां बिलख-बिलखकर कहती हैं, मेरा बेटा अब नहीं रहा… अब मुझे खिलाने वाला कौन है? मैं कैसे जिऊंगी? वह बताती हैं कि 10 फरवरी की सुबह बेटे ने कहा था ‘मां, मैं दोस्तों के साथ कहीं घूमने जा रहा हूं। चार दिनों तक आप लोगों से बात नहीं हो पाएगी। मेरा फोन मेरे पास नहीं रहेगा। आप लोग अपना ध्यान रखना। जैसे ही बेंगलुरु वापस आऊंगा, फोन करूंगा। मां आगे बताती हैं, उसने बताया तो था कि कुछ दिनों तक वो फोन नहीं कर पाएगा, लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह हमारी आखिरी बात होगी। मैंने यह भी नहीं पूछा कि वह कहां जा रहा है और किसके साथ जा रहा है… काश पूछ लिया होता। मुझे अपने साथ बेंगलुरु ले जाना चाहता था बेटा वह याद करती हैं कि राजेश हमेशा उन्हें अपने पास ले जाने की बात करता था। कहता था, मां, थोड़ा पैसा जमा होने दो। फिर अच्छा सा घर लेकर आपको अपने साथ रखूंगा। पहले बहन की शादी कर देंगे, फिर आप मेरे साथ चलना। राजेश की बहन रीना BA पास थी। जल्द ही उसकी शादी होने वाली थी। वहीं, सौतेला भाई आदर्श 9वीं का छात्र, विक्रम 12वीं में पढ़ रहा है। छोटी बहन अर्चना 6वीं की छात्रा है। 11 फरवरी को उसने मेरा मैसेज सीन किया था मृतक के चाचा घनश्याम कुमार बताते हैं, 8 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे मेरी भतीजे से आखिरी बार फोन कॉल पर बात हुई थी। उस समय वह बिल्कुल ठीक लग रहा था। 11 फरवरी, बुधवार को मैंने उसे किसी जरूरी काम को लेकर वॉट्सएप मैसेज किया था। उसने मैसेज सीन तो कर लिया, लेकिन रिप्लाई नहीं किया। 12 फरवरी को शाम 7:42 मिनट पर मैंने उसे वॉट्सएप पर कॉल करने का मैसेज भेजा, लेकिन वह मैसेज डिलीवर ही नहीं हुआ। इसी रात हमें बेंगलुरु पुलिस से सूचना मिली कि राजेश की हत्या कर दी गई है। यह खबर मिलते ही हम लोग तुरंत बेंगलुरु के लिए निकल गए। 12 फरवरी की दोपहर वॉट्सएप पर लास्ट सीन था चाचा आगे बताते हैं, जब हम वहां पहुंचे तो देखा कि राजेश का वॉट्सएप लास्ट सीन 12 फरवरी दोपहर 1:35 बजे तक का दिख रहा था, जबकि उसकी हत्या 11 फरवरी को ही कर दी गई थी। यह साफ है कि उसके फोन के साथ छेड़छाड़ की गई है। उसका मोबाइल अब तक गायब है। आरोपी को उसके फोन और वॉट्सएप का लॉक मालूम था, तभी मेरा नंबर भी उसके फोन से ब्लॉक कर दिया गया था। अगर नंबर ब्लॉक नहीं होता तो मेरे मैसेज डिलीवर जरूर होते। आरोपी को फांसी की सजा दी जाए ‘जो भी आरोपी है, उसने बहुत चालाकी से राजेश की हत्या की है। मुझे पूरा यकीन है कि यह काम उसके किसी जानकार या दोस्त ने ही किया है।’ वे बताते हैं, 8 फरवरी को मैंने उससे बच्चों की स्कूल फीस के लिए पैसे मांगे थे। उसने कहा था कि लेबर के सभी लोगों के पैसे आ गए हैं, पहले उनका हिसाब कर दूं, फिर आपको पैसे भेज दूंगा। उसी रात उसने ऑनलाइन फोन-पे से 10 रुपए भेज दिए थे। 11 फरवरी की शाम 6 बजे भी उसने हमें 5 हजार रुपए पैसे भेजे थे। भावुक होते हुए घनश्याम कहते हैं, ‘बकरी की तरह मेरे भतीजे की हत्या कर दी गई। मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि आरोपी को फांसी की सजा दी जाए।’ नशे से दूर रहता था राजेश गांव के मुकेश बताते हैं, राजेश के कातिलों को सामने लाया जाए। आरोपी को सजा मिले तभी हमारे गांव के बेटे को न्याय मिलेगा। राजेश बहुत ही अच्छे स्वभाव का लड़का था। वह किसी तरह के नशे के करीब भी नहीं जाता था। हमेशा शांत रहता था और गांव में उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। राजेश के दोस्त बबलू कहते हैं, वह बहुत अच्छा लड़का था। घर में भी उसका किसी से कोई विवाद नहीं था। करीब एक महीने से मेरी उससे बात नहीं हुई थी। वह बेंगलुरु में ही काम करना चाहता था। वहां वह 15 से 18 हजार रुपए तक कमा लेता था। इस मामले में सिमरी बख्तियारपुर SDPO मुकेश कुमार ठाकुर ने बताया, सोनवर्षा थाना क्षेत्र के रहने वाले राजेश का बेंगलुरु में सुरसर नदी किनारे सिर कटा शव बरामद हुआ था। गुरुवार को पहचान संभव नहीं हो सकी थी। शुक्रवार को शव की शिनाख्त हुई। SDPO ने बताया, शुक्रवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। हत्या किस तरीके से हुई, इसके पीछे क्या कारण थे यह जानने के लिए FSL टीम घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा रही है। उन्होंने कहा, जो भी लोग इस हत्याकांड में शामिल होंगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। बहुत जल्द सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। पुलिस हर बिंदु पर तहकीकात कर रही है।


