NEET स्टूडेंट मौत-बिहार में बिना रजिट्रेशन चल रहे गर्ल्स हॉस्टल?:DM ऑफिस से शिक्षा विभाग तक भास्कर स्टिंग; शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी ऐसे ही चल रहा था

NEET स्टूडेंट मौत-बिहार में बिना रजिट्रेशन चल रहे गर्ल्स हॉस्टल?:DM ऑफिस से शिक्षा विभाग तक भास्कर स्टिंग; शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी ऐसे ही चल रहा था

पटना में NEET स्टूडेंट से रेप-मौत मामले में हॉस्टल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। केन नॉट रन…वह कभी हॉस्टल नहीं चला सकते हैं। सामान्य से सामान्य घटना की भी जानकारी थाने पर देना चाहिए, लेकिन शंभू गर्ल्स हॉस्टल ने कोई जानकारी नहीं दी है। एक्शन मोड में आकर बिहार पुलिस के मुखिया DGP विनय कुमार का यह दावा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में झूठा निकला है। जिस तरह पटना SSP ने बिना जांच पड़ताल के स्टूडेंट से रेप की बात को खारिज कर दिया था, ठीक ऐसे ही DGP ने भी घटना के 28 दिन बाद 4 फरवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर दिया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने 6 विभागों के 12 से अधिक अधिकारियों से मिलकर पड़ताल की है, जिसमें पता चला कि DGP जिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर रहे हैं, उसका लाइसेंस किसी विभाग से जारी ही नहीं हुआ था। घटना के बाद सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की, लेकिन रजिस्ट्रेशन कहां होगा, इसका भी किसी विभाग में कहीं कोई निर्देश नहीं है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए DGP विनय कुमार के दावे पर पड़ताल में विभागों ने क्या जवाब दिया…। सबसे पहले हम पटना के VIP और DGP ऑफिस कवर करने वाले शास्त्री नगर थाना पहुंचे। हॉस्टल संचालक बनकर पहुंचे अंडर कवर रिपोर्टर की मुलाकात सब इंस्पेक्टर अभय से हुई। हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन के सवाल पर सब इंस्पेक्टर ने हमें नगर निगम और DM ऑफिस का रास्ता दिखा दिया। बोले- रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी दीजिए, फिर थाने से आगे की प्रक्रिया होगी। रिपोर्टर – मुझे हॉस्टल चलाना है, रजिस्ट्रेशन का नियम आ गया है। अभय – अच्छा, आप हॉस्टल चलाते हैं? रिपोर्टर – चलाते नहीं हैं, चलाने का पूरा प्लान है। अभय – अच्छा, आपको हॉस्टल चलाना है? रिपोर्टर – जी हां, सर। अभय – प्रक्रिया है कि आप DM साहब के यहां या नगर निगम से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर – इसके बाद क्या करना होगा? अभय – इसके बाद थाने से एक फॉर्मेट दिया जाएगा, उसी के अनुसार काम करना होगा। रिपोर्टर – अच्छा, इसमें क्या होगा। अभय – उसमें यह दर्ज रहेगा कि कब लड़कियां बाहर निकल रही हैं, कब वापस आ रही हैं, कहां जा रही हैं। रिपोर्टर – जी, अब बदल गया सब। अभय – इसके अलावा CCTV लगाना होगा, थाने में सूचना के लिए एक रजिस्टर होगा। रिपोर्टर – थाने के रजिस्टर में क्या भरना होगा। अभय – इसमें छात्राओं का पर्सनल कॉन्टैक्ट नंबर, पेरेंट्स के नंबर के साथ पूरी डिटेल होगी। रिपोर्टर – ठीक है सर अभय – अब आपको अथॉरिटी से पता करना होगा कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा। रिपोर्टर – सर, आपको पता नहीं है कहां होगा रजिस्ट्रेशन? अभय – नगर निगम या जिला कार्यालय होगा वहां पता कर लीजिए। रिपोर्टर – ठीक है सर, पता कर लेते हैं। अभय – रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी हमें दीजिए, फिर हम यहां से फॉर्मेट के अनुसार काम करेंगे। शास्त्री नगर थाने के सब इन्सपेक्टर अभय से बातचीत के बाद हम DM ऑफिस पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात हेल्प डेस्क पर बैठे कर्मचारी से हुई। इसके बाद हम स्थापना शाखा पहुंचे, जहां हमारी मुलाकात प्रधान लिपिक के पद पर तैनात चंद्रभूषण कुमार आरोही से हुई। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का जो रजिस्ट्रेशन होना है, वह कहां से करना होगा? चंद्रभूषण – यह शिक्षा विभाग से जुड़ा मामला है, DEO ऑफिस जाइए। रिपोर्टर – थाने से बताया जा रहा है कि यहीं से रजिस्ट्रेशन होगा। चंद्रभूषण – यहां से ऐसा कुछ नहीं होता है। रिपोर्टर – फिर कहां जाना होगा, प्रक्रिया कहां से शुरू करें? चंद्रभूषण – यहां कोई प्रक्रिया नहीं है, यह पूरा मामला शिक्षा विभाग का है। रिपोर्टर – अब समझ में नहीं आ रहा कि कहां से होगा। चंद्रभूषण – मुझे कोई आइडिया नहीं है कि कहां से होगा, कौन करेगा। रिपोर्टर – जिलाधिकारी कार्यालय से तो सब काम होता है, बताया भी यही जा रहा है। चंद्रभूषण – आप डीडीसी कार्यालय में जाकर पता कीजिए। DM ऑफिस के प्रधान लिपिक के बताए अनुसार हम DDC ऑफिस पहुंच गए। यहां हेल्प डेस्क पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन यहां नहीं होता है। आप कहीं और जाकर देखिए। उन्होंने कहा कि डीएम कार्यालय जाइए, वहीं से होगा या फिर ऊपर जाकर प्रधान लिपिक से बात कीजिए, जो दूसरे तल्ले पर मिलेंगे। यहां हमारी मुलाकात क्लर्क मधुकर प्रसाद सिन्हा से हुई। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से हो रहा है? मधुकर सिन्हा – यहां से नहीं हो रहा है। रिपोर्टर – जिलाधिकारी कार्यालय से बताया गया कि यहीं होता है। मधुकर सिन्हा – यहां पर नहीं होता, किसने बताया आपको यहां के बारे में? रिपोर्टर – स्थापना शाखा से हमें यहां भेजा गया है। मधुकर सिन्हा – यहां ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है भाई। पड़ताल के दौरान विकास भवन में हमारी मुलाकात एक महिला कर्मचारी से हुई जिसने बताया कि अभी जब तय ही नहीं हुआ कि कहां किस विभाग से रजिस्ट्रेशन होगा तो शंभू गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर – हॉस्टल चलाना है, उसी का रजिस्ट्रेशन कराना है। महिला कर्मी – रजिस्ट्रेशन का अभी कोई डिसाइड ही नहीं हुआ है? रिपोर्टर – कैसे होगा, कुछ पता ही नहीं चल पा रहा है। महिला कर्मी – नहीं, कुछ तय नहीं हुआ है। रिपोर्टर – कब तक होने की संभावना है? महिला कर्मी – कहा नहीं जा सकता है। रिपोर्टर – आगे क्या होगा? महिला कर्मी – जब डीएम निर्देश देंगे, तभी तय होगा। रिपोर्टर – अभी कोई संभावना है? महिला कर्मी – अभी इसकी कोई फाइल नहीं आई तो शंभू हॉस्टल का कैसे होगा। रिपोर्टर – तब क्या किया जाए। महिला कर्मी – DM कार्यालय में जाइए वहीं होगा, नहीं तो SDM कार्यालय चले जाइए। महिला कर्मी से बातचीत के बाद हम SDM कार्यालय पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात पीयूष से हुई। वह भी कोई जानकारी नहीं दे पाए, किसी दूसरे कार्यालय में जाकर पता करने की सलाह दी। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की जानकारी चाहिए, यहां हो जाएगा क्या? पीयूष – हमें नहीं पता है कि हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर – ऊपर से हमें आपके पास भेजा गया है। पियूष – यहां से कुछ नहीं होगा, आप कहीं और देखिए, किसी दूसरे कार्यालय में पता कीजिए। रिपोर्टर – कैसे होगा फिर, यहीं तो लोग भेज रहे हैं। पियूष – यहां करने का कोई आदेश नहीं, आप पटना नगर निगम में जाकर देख लीजिए। SDM कार्यालय में पीयूष से बातचीत के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना नगर निगम पहुंची। यहां हमारी मुलाकात नगर निगम में कार्यरत बड़े बाबू संजय से हुई। संजय ने भी रजिस्ट्रेशन में हमारी कोई मदद नहीं की। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा, यहां हो पाएगा क्या? संजय – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है? रिपोर्टर – जी गर्ल्स हॉस्टल चलाने के लिए। संजय – नगर निगम में इस संबंध में कोई पेपर आया है क्या? रिपोर्टर – हमें जानकारी मिली है कि यहीं से हो रहा है, इसलिए आए हैं। संजय – ऊपर आर्य टीम है, पवन जी हैं, उनसे मिलिए, वह बताएंगे। इस दफ्तर से उस दफ्तर घुमाया, कहीं जानकारी नहीं नगर निगम के कर्मचारी संजय के बताने के बाद हम ऊपर आर्य टीम के पास पहुंचे, लेकिन यहां न पवन मिले और ना पंकज से मुलाकात हुई। वहां मौजूद लोगों ने हमें फिर नीचे दोबारा संजय के पास भेज दिया। संजय ने फिर हमें सी ब्लॉक भेज दिया। संजय – आप सी ब्लॉक जाइए, वहीं पर होगा। रिपोर्टर – हम लोग हर जगह घूम चुके हैं, सभी लोग एक-दूसरे के पास भेज रहे हैं। संजय – वही लोग यहीं भेज रहे होंगे। रिपोर्टर – हां, सब लोग यही कह रहे, नगर निगम में होगा। संजय – तब तो यह गलत जानकारी दी जा रही है आप लोगों को। रिपोर्टर – तब क्या करें सर। संजय – हां, अब याद आया, जहां नगर आयुक्त बैठते हैं, उनके सामने पीएसए बैठते हैं, वहां जाकर पूछ लीजिए। नगर निगम के बड़े बाबू संजय के बताए अनुसार भास्कर रिपोर्टर नगर निगम के अमीन रविरंजन के पास पहुंचा। रवि रंजन ने बातचीत में कहा शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े कई खुलासे कर दिए। क्योंकि नगर निगम में पता चला था कि पहले बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हो सकता है कहीं हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन भी हो जाए। रिपोर्टर – हमें गर्ल्स हॉस्टल के लिए नक्शा पास कराना है। रविरंजन – कहां का नक्शा है? रिपोर्टर – सर, बोरिंग रोड का। रविरंजन – अप्रूवल बहुत जरूरी होता है, सड़क कितनी चौड़ी है? रिपोर्टर – 16 फीट रास्ता है। रविरंजन – पहले अपना परिचय दीजिए। रिपोर्टर – हम बाहर से आए हैं, यहां हॉस्टल बना रहे हैं। रविरंजन – देखिए, रोड की चौड़ाई, ऊंचाई और आसपास की स्थिति देखी जाती है। रिपोर्टर – मुआयना होगा क्या पहले? रविरंजन – हां, इसके बाद ही नक्शा पास होता है, पहले जमीन का वेरिफिकेशन करा लीजिए, फिर आगे बढ़िए। रिपोर्टर – हम चाहते हैं कि पहले घर बनाएं और उसी में हॉस्टल चलाएं। रविरंजन – देखिए, हॉस्टल कमर्शियल होता है, कमर्शियल भवन के लिए न्यूनतम 40 फीट रास्ता चाहिए। रिपोर्टर – अच्छा, ऐसा नहीं पता था। रविरंजन – रेजिडेंशियल का अलग नक्शा होता है। रिपोर्टर – हम सोच रहे हैं कि पहले घर बनवा लें, फिर उसमें हॉस्टल चलाएं। रविरंजन – ऐसा मत कीजिए, हॉस्टल मत चलाइए। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल भी तो ऐसे ही बना होगा ना जिसमें अभी घटना हुई है। रविरंजन – उसकी बात छोड़ दीजिए, कैसे बना है। रिपोर्टर – तो क्या शंभू गलत तरीके से बना था? रविरंजन – गलत तो बहुत लोग करते हैं, जो पकड़ा जाता है वही कुसूरवार होता है। रिपोर्टर – यानि यहां बहुत ऐसे हॉस्टल फर्जी तरीके से चल रहे हैं? रविरंजन – बोरिंग रोड में बहुत निर्माण गलत है, जब निगरानी होती है तो काम रुक जाता है। रिपोर्टर – जिसका पता नहीं चलता उसका क्या होता है? रविरंजन – जिसका पता नहीं चलता, वह बनवा लेता है। लेकिन पकड़ा गया तो इतना जुर्माना होता है। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल में भी तो ऐसा ही है। रविरंजन – इसलिए हम कह रहे हैं कि आप सोच समझकर काम कीजिए। रविरंजन ने किया शंभू गर्ल्स हॉस्टल का खुलासा शंभू गर्ल्स हॉस्टल में कैसे खेल चल रहा, रजिस्ट्रेशन के नाम पर क्या था। इसका खुलासा रविरंजन ने किया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की तरह एक दो नहीं कई हॉस्टल चल रहे हैं। कहीं रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था भी नहीं है, इसलिए सब हॉस्टल ऐसे ही चल रहा है। रविरंजन ने बताया कि अगर हॉस्टल चलाना है तो कम से कम 10 कट्ठा जमीन चाहिए, तभी नियम पूरे होंगे। पटना में किसी भी हॉस्टल के पास ऐसा नहीं है। रिपोर्टर – पटना में तो ज्यादातर हॉस्टल मकान के नक्शे पर ही चल रहे हैं। रविरंजन – बिल्कुल, बोरिंग रोड में कई हॉस्टल ऐसे हैं, जिनका अप्रूवल मकान का है और हॉस्टल चल रहा है। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल इसी वजह से फंसा है? रविरंजन – शंभू वाला बहुत बुरी तरह फंसा है। रिपोर्टर – उसका मकान का भी नक्शा पास नहीं था? रविरंजन – उसका तो किसी तरह का नक्शा पास नहीं था। देखिए, जैसे अस्पताल चलते रहते हैं, लेकिन घटना होने पर जांच शुरू होती है, वैसे ही यह मामला है। रिपोर्टर – आप सही जानकारी दे रहे हैं, इसलिए मैं आपके पास आया हूं। रिपोर्टर – हॉस्टल के लिए 40 फीट रास्ता जरूरी है? रविरंजन – नियम बहुत हैं, आगे, पीछे, बगल की दूरी, एरिया का कैटेगरी लाल, पीला, ग्रीन सब कुछ देखा जाता है। इसी आधार पर नक्शा पास होता है। नगर निगम में ही हमारी मुलाकात एक पटल के इंचार्ज अमरेश से हुई। अमरेश से जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बारे में पूछा गया तो वह भड़क गए और बोले शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बात ही मत कीजिए। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल बनाने के लिए नक्शा कैसे और कहां से पास होगा? अमरेश – बायलॉज के हिसाब से नक्शा बनवाइए, पास हो जाएगा। रिपोर्टर – फिर शंभू हॉस्टल और दूसरे लोग कैसे चला रहे हैं? अमरेश – तो आप भी कर लीजिए ना। रिपोर्टर – हम तो बस जानकारी ले रहे हैं। अमरेश – करने के लिए तो कुछ भी हो जाता है, हमारा पदाधिकारी घूमेगा, जानकारी होगी तो कार्रवाई होगी। रिपोर्टर – मैं सिर्फ जानकारी के लिए पूछ रहा था। अमरेश – आप उसका उदाहरण क्यों दे रहे हैं? पहले तो उसकी बात मत कीजिए। रिपोर्टर – क्यों क्या हो गया? अमरेश – जिसका नक्शा ही पास नहीं हुआ है तो उस घर में हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां होगा। अमरेश से बातचीत के बाद हम पटना नगर निगम के टाउन प्लानर अमित से मिले। अमित ने साफ कर दिया कि जिस घर का नक्शा नहीं पास है वहां कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। अब ऐसे में हमने सवाल किया कि जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल का कोई नक्शा ही नहीं पास है तो डीजीपी ने किस रजिस्ट्रेशन को कैंसिल करने की बात कही है। इस पर अमित ने चुप्पी साध ली। रिपोर्टर – हमें नक्शा पास कराना है कैसे और कहां होगा। अमित – जमीन के कागजात दिखाइए, अमीन से प्रक्रिया शुरू होती है। रिपोर्टर – थोड़ा प्रोसेस बता दीजिए। अमित – ऑनलाइन आवेदन करना होता है। रिपोर्टर – ठीक है। अमित – एक आर्किटेक्ट पकड़ना होता है, वही नक्शा बनाएगा। समझदार आर्किटेक्ट होना चाहिए। रिपोर्टर – ठीक है, तो बिना नक्शा से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन होगा क्या? अमित – सवाल ही नहीं है, ऐसे कैसे काम होगा नियम विरुद्ध। नगर निगम से पड़ताल के बाद हम दानापुर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। वहां हमारी मुलाकात सहायक आर्किटेक्ट सुनील से मुलाकात हुई। सुनील ने बताया कि नियम के बिना ही सब हॉस्टल चल रहे हैं, जिस भवन का नक्शा पास नहीं है, वहां हॉस्टल चल रहा है तो वह गलत है। रिपोर्टर – हॉस्टल खोलने का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा? सुनील – यहां हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं होता है, यहां सिर्फ बिल्डिंग का नक्शा पास किया जाता है। रिपोर्टर – उसके परमिशन लेने के लिए कहां जाना होगा? सुनील – यहां नहीं होता, हॉस्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन डीएम ऑफिस जाना होगा। रिपोर्टर – अच्छा, जो बिल्डिंग होगी वह आपके यहां से पास होगी? सुनील – हां, बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हॉस्टल का काम होगा। रिपोर्टर – अच्छा। सुनील – जैसे सिनेमा हॉल खोलना हो तो हमारा स्ट्रक्चर पास हो जाएगा, उसके बाद आप बिल्डिंग बनाइए, लेकिन उसमें सिनेमा हॉल चलाने की अनुमति जिला अधिकारी ही देंगे। उसी तरह हॉस्टल में भी प्रक्रिया है। रिपोर्टर – मतलब स्ट्रक्चर के लिए आपके पास आना होगा? सुनील – हां, पहले नक्शा पास कराइए, बिल्डिंग खड़ी कीजिए, फिर हॉस्टल में बच्चियों को रखने की अनुमति जिलाधिकारी से लीजिए। रिपोर्टर – हॉस्टल के लिए क्या-क्या करना जरूरी है? सुनील – बायलॉज के हिसाब से काम कीजिए। रिपोर्टर – बायलॉज कहां मिलेगा? सुनील – सचिवालय के पास किसी दुकान पर देख लीजिए या किसी आर्किटेक्ट से मिल लीजिए। रिपोर्टर – ठीक है, हमारे पास खाली जमीन भी है और एक घर भी है। सुनील – घर रेजिडेंशियल है या हॉस्टल के लिए बना है? रिपोर्टर – नहीं, रेजिडेंशियल है। सुनील – तो उसमें हॉस्टल नहीं चल सकता। खाली जमीन पर पहले हॉस्टल बनवाइए, फिर उसका रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर – मतलब पुराने भवन में नहीं चलेगा? सुनील – हम मना नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो नियम है वही बता रहे हैं। रिपोर्टर – ठीक है। सुनील – हम लोग सिर्फ यह परमिशन देते हैं कि बिल्डिंग कैसे खड़ी करनी है। रहने की परमिशन यहां से नहीं मिलेगी। रिपोर्टर – यानी जितने लोग हैं, सब मनमाने तरीके से रह रहे हैं? सुनील – दूसरे को देखने की क्या जरूरत है, आप अपना देखिए। रिपोर्टर – मतलब सब वैसे ही रह रहे हैं? सुनील – जब प्रशासन का डंडा चलेगा तो सब ठंडे हो जाएंगे। रिपोर्टर – हां, शंभू हॉस्टल वाला देख लीजिए। सुनील – हां, जिस दिन सरकार सख्त हुई, उसी दिन मामला हो जाएगा। रिपोर्टर – यहां हॉस्टल वाले नक्शा पास कराकर बनाए हैं या नहीं? सुनील – कुछ लोगों ने बनाया होगा। आपके पास जमीन है न? रिपोर्टर – हां, है। सुनील – तो आप हॉस्टल का नक्शा पास कराइए, फिर आगे का काम कराइए। कई विभागों की पड़ताल के बाद भी कहीं हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर पटना के फायर ब्रिगेड ऑफिस पहुंचा। यहां भी हॉस्टल की कोई लिस्ट नहीं मिली। यहां भी वही पता चला कि सब हवा हवाई वाला हिसाब किताब है। शंभू हॉस्टल की भी यहां कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसा लगा कि उसकी भी यहां कोई सूचना दी ही नहीं गई थी कि पटना में कोई शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी चल रहा है। रिपोर्टर – हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है, इसके लिए क्या करना होगा? सतीश – कहां होगा यह नहीं पता हम तो सिर्फ NOC दे सकते हैं। रिपोर्टर – क्या प्रक्रिया है? सतीश – ऑनलाइन आवेदन कीजिए। रिपोर्टर – क्या-क्या चाहिए? सतीश – साइट पर जाकर सब कुछ ऑनलाइन कर दीजिए, हो जाएगा। रिपोर्टर – मतलब रूम का साइज और जिस घर में हॉस्टल खोलना है, वह कैसा होना चाहिए? सतीश – सब कुछ ऑनलाइन है, साइट पर फॉर्म भरने के दौरान जैसा-जैसा मांगा जाएगा, उसी तरह से करना होगा। जब कहीं रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं तो DGP क्यों बोल गए बड़ी बात भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में 6 विभागों में पड़ताल के दौरान कहीं भी ऐसा नहीं मिला जहां से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन लिया जाता हो। हर विभाग में बस यही बोला गया कि हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन को लेकर न पहले से कोई गाइडलाइन थी और ना ही शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाद कोई आदेश मिला है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने हर पटल पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल का नाम लिया, लेकिन उस पर कोई खुलकर बात करने को भी तैयार नहीं हुआ। इससे यह साफ हो गया कि जिस घर में शंभू गर्ल्स हॉस्टल चल रहा था, उस घर का भी नक्शा पूरी तरह से पास नहीं था। क्योंकि भास्कर की पड़ताल में कहीं कोई अधिकारी या निगमकर्मी ये नहीं बताया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का नक्शा पास था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब पटना में किसी भी हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं है और ना ही पहले था तो DGP कैसे दावे के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की बात कह रहे हैं। पटना में NEET स्टूडेंट से रेप-मौत मामले में हॉस्टल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। केन नॉट रन…वह कभी हॉस्टल नहीं चला सकते हैं। सामान्य से सामान्य घटना की भी जानकारी थाने पर देना चाहिए, लेकिन शंभू गर्ल्स हॉस्टल ने कोई जानकारी नहीं दी है। एक्शन मोड में आकर बिहार पुलिस के मुखिया DGP विनय कुमार का यह दावा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में झूठा निकला है। जिस तरह पटना SSP ने बिना जांच पड़ताल के स्टूडेंट से रेप की बात को खारिज कर दिया था, ठीक ऐसे ही DGP ने भी घटना के 28 दिन बाद 4 फरवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर दिया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने 6 विभागों के 12 से अधिक अधिकारियों से मिलकर पड़ताल की है, जिसमें पता चला कि DGP जिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर रहे हैं, उसका लाइसेंस किसी विभाग से जारी ही नहीं हुआ था। घटना के बाद सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की, लेकिन रजिस्ट्रेशन कहां होगा, इसका भी किसी विभाग में कहीं कोई निर्देश नहीं है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए DGP विनय कुमार के दावे पर पड़ताल में विभागों ने क्या जवाब दिया…। सबसे पहले हम पटना के VIP और DGP ऑफिस कवर करने वाले शास्त्री नगर थाना पहुंचे। हॉस्टल संचालक बनकर पहुंचे अंडर कवर रिपोर्टर की मुलाकात सब इंस्पेक्टर अभय से हुई। हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन के सवाल पर सब इंस्पेक्टर ने हमें नगर निगम और DM ऑफिस का रास्ता दिखा दिया। बोले- रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी दीजिए, फिर थाने से आगे की प्रक्रिया होगी। रिपोर्टर – मुझे हॉस्टल चलाना है, रजिस्ट्रेशन का नियम आ गया है। अभय – अच्छा, आप हॉस्टल चलाते हैं? रिपोर्टर – चलाते नहीं हैं, चलाने का पूरा प्लान है। अभय – अच्छा, आपको हॉस्टल चलाना है? रिपोर्टर – जी हां, सर। अभय – प्रक्रिया है कि आप DM साहब के यहां या नगर निगम से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर – इसके बाद क्या करना होगा? अभय – इसके बाद थाने से एक फॉर्मेट दिया जाएगा, उसी के अनुसार काम करना होगा। रिपोर्टर – अच्छा, इसमें क्या होगा। अभय – उसमें यह दर्ज रहेगा कि कब लड़कियां बाहर निकल रही हैं, कब वापस आ रही हैं, कहां जा रही हैं। रिपोर्टर – जी, अब बदल गया सब। अभय – इसके अलावा CCTV लगाना होगा, थाने में सूचना के लिए एक रजिस्टर होगा। रिपोर्टर – थाने के रजिस्टर में क्या भरना होगा। अभय – इसमें छात्राओं का पर्सनल कॉन्टैक्ट नंबर, पेरेंट्स के नंबर के साथ पूरी डिटेल होगी। रिपोर्टर – ठीक है सर अभय – अब आपको अथॉरिटी से पता करना होगा कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा। रिपोर्टर – सर, आपको पता नहीं है कहां होगा रजिस्ट्रेशन? अभय – नगर निगम या जिला कार्यालय होगा वहां पता कर लीजिए। रिपोर्टर – ठीक है सर, पता कर लेते हैं। अभय – रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी हमें दीजिए, फिर हम यहां से फॉर्मेट के अनुसार काम करेंगे। शास्त्री नगर थाने के सब इन्सपेक्टर अभय से बातचीत के बाद हम DM ऑफिस पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात हेल्प डेस्क पर बैठे कर्मचारी से हुई। इसके बाद हम स्थापना शाखा पहुंचे, जहां हमारी मुलाकात प्रधान लिपिक के पद पर तैनात चंद्रभूषण कुमार आरोही से हुई। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का जो रजिस्ट्रेशन होना है, वह कहां से करना होगा? चंद्रभूषण – यह शिक्षा विभाग से जुड़ा मामला है, DEO ऑफिस जाइए। रिपोर्टर – थाने से बताया जा रहा है कि यहीं से रजिस्ट्रेशन होगा। चंद्रभूषण – यहां से ऐसा कुछ नहीं होता है। रिपोर्टर – फिर कहां जाना होगा, प्रक्रिया कहां से शुरू करें? चंद्रभूषण – यहां कोई प्रक्रिया नहीं है, यह पूरा मामला शिक्षा विभाग का है। रिपोर्टर – अब समझ में नहीं आ रहा कि कहां से होगा। चंद्रभूषण – मुझे कोई आइडिया नहीं है कि कहां से होगा, कौन करेगा। रिपोर्टर – जिलाधिकारी कार्यालय से तो सब काम होता है, बताया भी यही जा रहा है। चंद्रभूषण – आप डीडीसी कार्यालय में जाकर पता कीजिए। DM ऑफिस के प्रधान लिपिक के बताए अनुसार हम DDC ऑफिस पहुंच गए। यहां हेल्प डेस्क पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन यहां नहीं होता है। आप कहीं और जाकर देखिए। उन्होंने कहा कि डीएम कार्यालय जाइए, वहीं से होगा या फिर ऊपर जाकर प्रधान लिपिक से बात कीजिए, जो दूसरे तल्ले पर मिलेंगे। यहां हमारी मुलाकात क्लर्क मधुकर प्रसाद सिन्हा से हुई। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से हो रहा है? मधुकर सिन्हा – यहां से नहीं हो रहा है। रिपोर्टर – जिलाधिकारी कार्यालय से बताया गया कि यहीं होता है। मधुकर सिन्हा – यहां पर नहीं होता, किसने बताया आपको यहां के बारे में? रिपोर्टर – स्थापना शाखा से हमें यहां भेजा गया है। मधुकर सिन्हा – यहां ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है भाई। पड़ताल के दौरान विकास भवन में हमारी मुलाकात एक महिला कर्मचारी से हुई जिसने बताया कि अभी जब तय ही नहीं हुआ कि कहां किस विभाग से रजिस्ट्रेशन होगा तो शंभू गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर – हॉस्टल चलाना है, उसी का रजिस्ट्रेशन कराना है। महिला कर्मी – रजिस्ट्रेशन का अभी कोई डिसाइड ही नहीं हुआ है? रिपोर्टर – कैसे होगा, कुछ पता ही नहीं चल पा रहा है। महिला कर्मी – नहीं, कुछ तय नहीं हुआ है। रिपोर्टर – कब तक होने की संभावना है? महिला कर्मी – कहा नहीं जा सकता है। रिपोर्टर – आगे क्या होगा? महिला कर्मी – जब डीएम निर्देश देंगे, तभी तय होगा। रिपोर्टर – अभी कोई संभावना है? महिला कर्मी – अभी इसकी कोई फाइल नहीं आई तो शंभू हॉस्टल का कैसे होगा। रिपोर्टर – तब क्या किया जाए। महिला कर्मी – DM कार्यालय में जाइए वहीं होगा, नहीं तो SDM कार्यालय चले जाइए। महिला कर्मी से बातचीत के बाद हम SDM कार्यालय पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात पीयूष से हुई। वह भी कोई जानकारी नहीं दे पाए, किसी दूसरे कार्यालय में जाकर पता करने की सलाह दी। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की जानकारी चाहिए, यहां हो जाएगा क्या? पीयूष – हमें नहीं पता है कि हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर – ऊपर से हमें आपके पास भेजा गया है। पियूष – यहां से कुछ नहीं होगा, आप कहीं और देखिए, किसी दूसरे कार्यालय में पता कीजिए। रिपोर्टर – कैसे होगा फिर, यहीं तो लोग भेज रहे हैं। पियूष – यहां करने का कोई आदेश नहीं, आप पटना नगर निगम में जाकर देख लीजिए। SDM कार्यालय में पीयूष से बातचीत के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना नगर निगम पहुंची। यहां हमारी मुलाकात नगर निगम में कार्यरत बड़े बाबू संजय से हुई। संजय ने भी रजिस्ट्रेशन में हमारी कोई मदद नहीं की। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा, यहां हो पाएगा क्या? संजय – गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है? रिपोर्टर – जी गर्ल्स हॉस्टल चलाने के लिए। संजय – नगर निगम में इस संबंध में कोई पेपर आया है क्या? रिपोर्टर – हमें जानकारी मिली है कि यहीं से हो रहा है, इसलिए आए हैं। संजय – ऊपर आर्य टीम है, पवन जी हैं, उनसे मिलिए, वह बताएंगे। इस दफ्तर से उस दफ्तर घुमाया, कहीं जानकारी नहीं नगर निगम के कर्मचारी संजय के बताने के बाद हम ऊपर आर्य टीम के पास पहुंचे, लेकिन यहां न पवन मिले और ना पंकज से मुलाकात हुई। वहां मौजूद लोगों ने हमें फिर नीचे दोबारा संजय के पास भेज दिया। संजय ने फिर हमें सी ब्लॉक भेज दिया। संजय – आप सी ब्लॉक जाइए, वहीं पर होगा। रिपोर्टर – हम लोग हर जगह घूम चुके हैं, सभी लोग एक-दूसरे के पास भेज रहे हैं। संजय – वही लोग यहीं भेज रहे होंगे। रिपोर्टर – हां, सब लोग यही कह रहे, नगर निगम में होगा। संजय – तब तो यह गलत जानकारी दी जा रही है आप लोगों को। रिपोर्टर – तब क्या करें सर। संजय – हां, अब याद आया, जहां नगर आयुक्त बैठते हैं, उनके सामने पीएसए बैठते हैं, वहां जाकर पूछ लीजिए। नगर निगम के बड़े बाबू संजय के बताए अनुसार भास्कर रिपोर्टर नगर निगम के अमीन रविरंजन के पास पहुंचा। रवि रंजन ने बातचीत में कहा शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े कई खुलासे कर दिए। क्योंकि नगर निगम में पता चला था कि पहले बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हो सकता है कहीं हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन भी हो जाए। रिपोर्टर – हमें गर्ल्स हॉस्टल के लिए नक्शा पास कराना है। रविरंजन – कहां का नक्शा है? रिपोर्टर – सर, बोरिंग रोड का। रविरंजन – अप्रूवल बहुत जरूरी होता है, सड़क कितनी चौड़ी है? रिपोर्टर – 16 फीट रास्ता है। रविरंजन – पहले अपना परिचय दीजिए। रिपोर्टर – हम बाहर से आए हैं, यहां हॉस्टल बना रहे हैं। रविरंजन – देखिए, रोड की चौड़ाई, ऊंचाई और आसपास की स्थिति देखी जाती है। रिपोर्टर – मुआयना होगा क्या पहले? रविरंजन – हां, इसके बाद ही नक्शा पास होता है, पहले जमीन का वेरिफिकेशन करा लीजिए, फिर आगे बढ़िए। रिपोर्टर – हम चाहते हैं कि पहले घर बनाएं और उसी में हॉस्टल चलाएं। रविरंजन – देखिए, हॉस्टल कमर्शियल होता है, कमर्शियल भवन के लिए न्यूनतम 40 फीट रास्ता चाहिए। रिपोर्टर – अच्छा, ऐसा नहीं पता था। रविरंजन – रेजिडेंशियल का अलग नक्शा होता है। रिपोर्टर – हम सोच रहे हैं कि पहले घर बनवा लें, फिर उसमें हॉस्टल चलाएं। रविरंजन – ऐसा मत कीजिए, हॉस्टल मत चलाइए। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल भी तो ऐसे ही बना होगा ना जिसमें अभी घटना हुई है। रविरंजन – उसकी बात छोड़ दीजिए, कैसे बना है। रिपोर्टर – तो क्या शंभू गलत तरीके से बना था? रविरंजन – गलत तो बहुत लोग करते हैं, जो पकड़ा जाता है वही कुसूरवार होता है। रिपोर्टर – यानि यहां बहुत ऐसे हॉस्टल फर्जी तरीके से चल रहे हैं? रविरंजन – बोरिंग रोड में बहुत निर्माण गलत है, जब निगरानी होती है तो काम रुक जाता है। रिपोर्टर – जिसका पता नहीं चलता उसका क्या होता है? रविरंजन – जिसका पता नहीं चलता, वह बनवा लेता है। लेकिन पकड़ा गया तो इतना जुर्माना होता है। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल में भी तो ऐसा ही है। रविरंजन – इसलिए हम कह रहे हैं कि आप सोच समझकर काम कीजिए। रविरंजन ने किया शंभू गर्ल्स हॉस्टल का खुलासा शंभू गर्ल्स हॉस्टल में कैसे खेल चल रहा, रजिस्ट्रेशन के नाम पर क्या था। इसका खुलासा रविरंजन ने किया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की तरह एक दो नहीं कई हॉस्टल चल रहे हैं। कहीं रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था भी नहीं है, इसलिए सब हॉस्टल ऐसे ही चल रहा है। रविरंजन ने बताया कि अगर हॉस्टल चलाना है तो कम से कम 10 कट्ठा जमीन चाहिए, तभी नियम पूरे होंगे। पटना में किसी भी हॉस्टल के पास ऐसा नहीं है। रिपोर्टर – पटना में तो ज्यादातर हॉस्टल मकान के नक्शे पर ही चल रहे हैं। रविरंजन – बिल्कुल, बोरिंग रोड में कई हॉस्टल ऐसे हैं, जिनका अप्रूवल मकान का है और हॉस्टल चल रहा है। रिपोर्टर – शंभू हॉस्टल इसी वजह से फंसा है? रविरंजन – शंभू वाला बहुत बुरी तरह फंसा है। रिपोर्टर – उसका मकान का भी नक्शा पास नहीं था? रविरंजन – उसका तो किसी तरह का नक्शा पास नहीं था। देखिए, जैसे अस्पताल चलते रहते हैं, लेकिन घटना होने पर जांच शुरू होती है, वैसे ही यह मामला है। रिपोर्टर – आप सही जानकारी दे रहे हैं, इसलिए मैं आपके पास आया हूं। रिपोर्टर – हॉस्टल के लिए 40 फीट रास्ता जरूरी है? रविरंजन – नियम बहुत हैं, आगे, पीछे, बगल की दूरी, एरिया का कैटेगरी लाल, पीला, ग्रीन सब कुछ देखा जाता है। इसी आधार पर नक्शा पास होता है। नगर निगम में ही हमारी मुलाकात एक पटल के इंचार्ज अमरेश से हुई। अमरेश से जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बारे में पूछा गया तो वह भड़क गए और बोले शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बात ही मत कीजिए। रिपोर्टर – गर्ल्स हॉस्टल बनाने के लिए नक्शा कैसे और कहां से पास होगा? अमरेश – बायलॉज के हिसाब से नक्शा बनवाइए, पास हो जाएगा। रिपोर्टर – फिर शंभू हॉस्टल और दूसरे लोग कैसे चला रहे हैं? अमरेश – तो आप भी कर लीजिए ना। रिपोर्टर – हम तो बस जानकारी ले रहे हैं। अमरेश – करने के लिए तो कुछ भी हो जाता है, हमारा पदाधिकारी घूमेगा, जानकारी होगी तो कार्रवाई होगी। रिपोर्टर – मैं सिर्फ जानकारी के लिए पूछ रहा था। अमरेश – आप उसका उदाहरण क्यों दे रहे हैं? पहले तो उसकी बात मत कीजिए। रिपोर्टर – क्यों क्या हो गया? अमरेश – जिसका नक्शा ही पास नहीं हुआ है तो उस घर में हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां होगा। अमरेश से बातचीत के बाद हम पटना नगर निगम के टाउन प्लानर अमित से मिले। अमित ने साफ कर दिया कि जिस घर का नक्शा नहीं पास है वहां कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। अब ऐसे में हमने सवाल किया कि जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल का कोई नक्शा ही नहीं पास है तो डीजीपी ने किस रजिस्ट्रेशन को कैंसिल करने की बात कही है। इस पर अमित ने चुप्पी साध ली। रिपोर्टर – हमें नक्शा पास कराना है कैसे और कहां होगा। अमित – जमीन के कागजात दिखाइए, अमीन से प्रक्रिया शुरू होती है। रिपोर्टर – थोड़ा प्रोसेस बता दीजिए। अमित – ऑनलाइन आवेदन करना होता है। रिपोर्टर – ठीक है। अमित – एक आर्किटेक्ट पकड़ना होता है, वही नक्शा बनाएगा। समझदार आर्किटेक्ट होना चाहिए। रिपोर्टर – ठीक है, तो बिना नक्शा से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन होगा क्या? अमित – सवाल ही नहीं है, ऐसे कैसे काम होगा नियम विरुद्ध। नगर निगम से पड़ताल के बाद हम दानापुर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। वहां हमारी मुलाकात सहायक आर्किटेक्ट सुनील से मुलाकात हुई। सुनील ने बताया कि नियम के बिना ही सब हॉस्टल चल रहे हैं, जिस भवन का नक्शा पास नहीं है, वहां हॉस्टल चल रहा है तो वह गलत है। रिपोर्टर – हॉस्टल खोलने का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा? सुनील – यहां हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं होता है, यहां सिर्फ बिल्डिंग का नक्शा पास किया जाता है। रिपोर्टर – उसके परमिशन लेने के लिए कहां जाना होगा? सुनील – यहां नहीं होता, हॉस्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन डीएम ऑफिस जाना होगा। रिपोर्टर – अच्छा, जो बिल्डिंग होगी वह आपके यहां से पास होगी? सुनील – हां, बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हॉस्टल का काम होगा। रिपोर्टर – अच्छा। सुनील – जैसे सिनेमा हॉल खोलना हो तो हमारा स्ट्रक्चर पास हो जाएगा, उसके बाद आप बिल्डिंग बनाइए, लेकिन उसमें सिनेमा हॉल चलाने की अनुमति जिला अधिकारी ही देंगे। उसी तरह हॉस्टल में भी प्रक्रिया है। रिपोर्टर – मतलब स्ट्रक्चर के लिए आपके पास आना होगा? सुनील – हां, पहले नक्शा पास कराइए, बिल्डिंग खड़ी कीजिए, फिर हॉस्टल में बच्चियों को रखने की अनुमति जिलाधिकारी से लीजिए। रिपोर्टर – हॉस्टल के लिए क्या-क्या करना जरूरी है? सुनील – बायलॉज के हिसाब से काम कीजिए। रिपोर्टर – बायलॉज कहां मिलेगा? सुनील – सचिवालय के पास किसी दुकान पर देख लीजिए या किसी आर्किटेक्ट से मिल लीजिए। रिपोर्टर – ठीक है, हमारे पास खाली जमीन भी है और एक घर भी है। सुनील – घर रेजिडेंशियल है या हॉस्टल के लिए बना है? रिपोर्टर – नहीं, रेजिडेंशियल है। सुनील – तो उसमें हॉस्टल नहीं चल सकता। खाली जमीन पर पहले हॉस्टल बनवाइए, फिर उसका रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर – मतलब पुराने भवन में नहीं चलेगा? सुनील – हम मना नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो नियम है वही बता रहे हैं। रिपोर्टर – ठीक है। सुनील – हम लोग सिर्फ यह परमिशन देते हैं कि बिल्डिंग कैसे खड़ी करनी है। रहने की परमिशन यहां से नहीं मिलेगी। रिपोर्टर – यानी जितने लोग हैं, सब मनमाने तरीके से रह रहे हैं? सुनील – दूसरे को देखने की क्या जरूरत है, आप अपना देखिए। रिपोर्टर – मतलब सब वैसे ही रह रहे हैं? सुनील – जब प्रशासन का डंडा चलेगा तो सब ठंडे हो जाएंगे। रिपोर्टर – हां, शंभू हॉस्टल वाला देख लीजिए। सुनील – हां, जिस दिन सरकार सख्त हुई, उसी दिन मामला हो जाएगा। रिपोर्टर – यहां हॉस्टल वाले नक्शा पास कराकर बनाए हैं या नहीं? सुनील – कुछ लोगों ने बनाया होगा। आपके पास जमीन है न? रिपोर्टर – हां, है। सुनील – तो आप हॉस्टल का नक्शा पास कराइए, फिर आगे का काम कराइए। कई विभागों की पड़ताल के बाद भी कहीं हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर पटना के फायर ब्रिगेड ऑफिस पहुंचा। यहां भी हॉस्टल की कोई लिस्ट नहीं मिली। यहां भी वही पता चला कि सब हवा हवाई वाला हिसाब किताब है। शंभू हॉस्टल की भी यहां कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसा लगा कि उसकी भी यहां कोई सूचना दी ही नहीं गई थी कि पटना में कोई शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी चल रहा है। रिपोर्टर – हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है, इसके लिए क्या करना होगा? सतीश – कहां होगा यह नहीं पता हम तो सिर्फ NOC दे सकते हैं। रिपोर्टर – क्या प्रक्रिया है? सतीश – ऑनलाइन आवेदन कीजिए। रिपोर्टर – क्या-क्या चाहिए? सतीश – साइट पर जाकर सब कुछ ऑनलाइन कर दीजिए, हो जाएगा। रिपोर्टर – मतलब रूम का साइज और जिस घर में हॉस्टल खोलना है, वह कैसा होना चाहिए? सतीश – सब कुछ ऑनलाइन है, साइट पर फॉर्म भरने के दौरान जैसा-जैसा मांगा जाएगा, उसी तरह से करना होगा। जब कहीं रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं तो DGP क्यों बोल गए बड़ी बात भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में 6 विभागों में पड़ताल के दौरान कहीं भी ऐसा नहीं मिला जहां से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन लिया जाता हो। हर विभाग में बस यही बोला गया कि हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन को लेकर न पहले से कोई गाइडलाइन थी और ना ही शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाद कोई आदेश मिला है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने हर पटल पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल का नाम लिया, लेकिन उस पर कोई खुलकर बात करने को भी तैयार नहीं हुआ। इससे यह साफ हो गया कि जिस घर में शंभू गर्ल्स हॉस्टल चल रहा था, उस घर का भी नक्शा पूरी तरह से पास नहीं था। क्योंकि भास्कर की पड़ताल में कहीं कोई अधिकारी या निगमकर्मी ये नहीं बताया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का नक्शा पास था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब पटना में किसी भी हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं है और ना ही पहले था तो DGP कैसे दावे के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की बात कह रहे हैं।  

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