दो कॉरिडोर के 4 रूट पर 41.19 किमी लाइन बिछाने का राइट्स ने तैयार किया था प्रपोजल

दो कॉरिडोर के 4 रूट पर 41.19 किमी लाइन बिछाने का राइट्स ने तैयार किया था प्रपोजल

मुजफ्फरपुर व दरभंगा शहर में मेट्रो ट्रेन चलने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को बड़ा झटका लगा है। राइट्स के सर्वे और प्रेजेंटेशन के करीब सवा साल बाद मेट्रो परियोजना की फाइल नगर विकास एवं आवास विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। वजह बताई जा रही है दोनों शहर की 20 लाख से कम जनसंख्या। दोनों शहरों में सर्वे के नाम पर डेढ़ करोड़ राशि फूंक दी गई। इसमें मुजफ्फरपुर मेट्रो के सर्वे पर 70 लाख से ज्यादा खर्च हुआ। अब कम जनसंख्या का हवाला दिया जा रहा है। जनसंख्या को लेकर मेट्रो का मामला अटकने की जानकारी सांसद सह केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी निषाद के देने के बाद शहर निराश है। शहरवासियों को लगने लगा था कि अब पटना की तर्ज पर मुजफ्फरपुर भी मेट्रो के नक्शे पर आ जाएगा। ट्रैफिक जाम, बढ़ती आबादी और मुजफ्फरपुर शहर का विस्तार को देखते हुए मेट्रो को भविष्य की जरूरत माना जा रहा था। केंद्र सरकार से मुजफ्फरपुर, दरभंगा मेट्रो की सैद्धांतिक सहमति के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने सर्वे की जिम्मेवारी बिहार में राइट्स को सौंपी। लंबे समय तक शहर में सर्व करने राइट्स ने इसकी रिपोर्ट तैयार की। 14 दिसंबर 2024 को नगर भवन में राइट्स की ओर से आयोजित प्रेजेंटेशन के दौरान सांसद, विधायक, विभिन्न विभागों के अधिकारी और शहर के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में मुजफ्फरपुर मेट्रो के संबंध में तमाम जानकारी दी गई। तब मार्च 2025 में डीपीआर बनाने का काम शुरू होने व 2029 में प्रोजेक्ट पूरा होने का आश्वासन दिया गया था। उस प्रेजेंटेशन के सवा साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एक कदम भी आगे काम नहीं बढ़ पाया। अब राइट्स के प्रतिनिधि का कहना है कि हम लोग नगर विकास एवं आवास विभाग से किसी तरह का आगे का आदेश नहीं मिला है। केंद्र सरकार की नीति के अनुसार, फुल स्केल मेट्रो के लिए शहर की आबादी 20 लाख होनी चाहिए। ऐसे में मुजफ्फरपुर में मेट्रो प्रोजेक्ट तभी शुरू हो पाएगा, शहर का परिसीमन और विस्तार हो, ताकि आबादी का मानक पूरा हो सके। हालांकि, आबादी कम होने के कारण यहां मेट्रो लाइट या मेट्रो नियो विकल्प बना हुआ है, जो 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए उपयुक्त होता है। 2011 की जनसंख्या के मुताबिक, मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र की कुल आबादी 3 लाख 54 हजार 462 हैं। जबकि, डीएम सुब्रत कुमार सेन ने शहर के विस्तार का जो प्रस्ताव 13 दिसंबर 2025 को नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजा है। उसमें वर्तमान नगर निगम व विस्तारित क्षेत्र की आबादी 5 लाख 71 हजार 141 बताई गई है। पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा का कहना है कि जनसंख्या का हवाला देकर मुजफ्फरपुर मेट्रो को ठंडे बस्ते में डालना उचित नहीं है। इसी तरह की समस्या पटना मेट्रो के समय भी लाया गया था। तब पटना मेट्रो लेकर जो पहले से रूट तय था। उस रूट में बढ़ोत्तरी करने से वह बाधा दूर हुई। आज पटना मेट्रो धरातल पर उतर गया है। मुजफ्फरपुर मेट्रो का प्रस्ताव वर्तमान स्थिति को देख कर नहीं बननी चाहिए। कम से कम कांटी से सर्फुदीनपुर बोचहां, तुर्की से झपहां के आगे तक इसका रूट तय होना चाहिए। मोतीपुर में औद्योगिक क्षेत्र का बहुत विस्तार हो रहा है। इसलिए मोतीपुर से लेकर मुशहरी तक रूट निर्धारित होना चाहिए। मुजफ्फरपुर व दरभंगा शहर में मेट्रो ट्रेन चलने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को बड़ा झटका लगा है। राइट्स के सर्वे और प्रेजेंटेशन के करीब सवा साल बाद मेट्रो परियोजना की फाइल नगर विकास एवं आवास विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। वजह बताई जा रही है दोनों शहर की 20 लाख से कम जनसंख्या। दोनों शहरों में सर्वे के नाम पर डेढ़ करोड़ राशि फूंक दी गई। इसमें मुजफ्फरपुर मेट्रो के सर्वे पर 70 लाख से ज्यादा खर्च हुआ। अब कम जनसंख्या का हवाला दिया जा रहा है। जनसंख्या को लेकर मेट्रो का मामला अटकने की जानकारी सांसद सह केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी निषाद के देने के बाद शहर निराश है। शहरवासियों को लगने लगा था कि अब पटना की तर्ज पर मुजफ्फरपुर भी मेट्रो के नक्शे पर आ जाएगा। ट्रैफिक जाम, बढ़ती आबादी और मुजफ्फरपुर शहर का विस्तार को देखते हुए मेट्रो को भविष्य की जरूरत माना जा रहा था। केंद्र सरकार से मुजफ्फरपुर, दरभंगा मेट्रो की सैद्धांतिक सहमति के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने सर्वे की जिम्मेवारी बिहार में राइट्स को सौंपी। लंबे समय तक शहर में सर्व करने राइट्स ने इसकी रिपोर्ट तैयार की। 14 दिसंबर 2024 को नगर भवन में राइट्स की ओर से आयोजित प्रेजेंटेशन के दौरान सांसद, विधायक, विभिन्न विभागों के अधिकारी और शहर के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में मुजफ्फरपुर मेट्रो के संबंध में तमाम जानकारी दी गई। तब मार्च 2025 में डीपीआर बनाने का काम शुरू होने व 2029 में प्रोजेक्ट पूरा होने का आश्वासन दिया गया था। उस प्रेजेंटेशन के सवा साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एक कदम भी आगे काम नहीं बढ़ पाया। अब राइट्स के प्रतिनिधि का कहना है कि हम लोग नगर विकास एवं आवास विभाग से किसी तरह का आगे का आदेश नहीं मिला है। केंद्र सरकार की नीति के अनुसार, फुल स्केल मेट्रो के लिए शहर की आबादी 20 लाख होनी चाहिए। ऐसे में मुजफ्फरपुर में मेट्रो प्रोजेक्ट तभी शुरू हो पाएगा, शहर का परिसीमन और विस्तार हो, ताकि आबादी का मानक पूरा हो सके। हालांकि, आबादी कम होने के कारण यहां मेट्रो लाइट या मेट्रो नियो विकल्प बना हुआ है, जो 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए उपयुक्त होता है। 2011 की जनसंख्या के मुताबिक, मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र की कुल आबादी 3 लाख 54 हजार 462 हैं। जबकि, डीएम सुब्रत कुमार सेन ने शहर के विस्तार का जो प्रस्ताव 13 दिसंबर 2025 को नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजा है। उसमें वर्तमान नगर निगम व विस्तारित क्षेत्र की आबादी 5 लाख 71 हजार 141 बताई गई है। पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा का कहना है कि जनसंख्या का हवाला देकर मुजफ्फरपुर मेट्रो को ठंडे बस्ते में डालना उचित नहीं है। इसी तरह की समस्या पटना मेट्रो के समय भी लाया गया था। तब पटना मेट्रो लेकर जो पहले से रूट तय था। उस रूट में बढ़ोत्तरी करने से वह बाधा दूर हुई। आज पटना मेट्रो धरातल पर उतर गया है। मुजफ्फरपुर मेट्रो का प्रस्ताव वर्तमान स्थिति को देख कर नहीं बननी चाहिए। कम से कम कांटी से सर्फुदीनपुर बोचहां, तुर्की से झपहां के आगे तक इसका रूट तय होना चाहिए। मोतीपुर में औद्योगिक क्षेत्र का बहुत विस्तार हो रहा है। इसलिए मोतीपुर से लेकर मुशहरी तक रूट निर्धारित होना चाहिए।  

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