चौमुखी महादेव मंदिर : चक्र में स्थापित शिवलिंग

चौमुखी महादेव मंदिर : चक्र में स्थापित शिवलिंग

मुजफ्फरपुर | महाशिवरात्रि को लेकर जिले के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ धाम समेत सभी शिव मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जा रही है। महाशिवरात्रि पर भोले बाबा के साथ देवी पार्वती का गठजोड़ कर विवाह गीतों के साथ विवाह रस्म की जाएगी। इस दिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करेंगे। मंदिर के प्रधान पुजारी पं. विनय पाठक ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 300-350 वर्ष पुराना है और स्वयंभू शिवलिंग है। एक घने जंगल में बरगद का पेड़ काटने के दौरान शिवलिंग से खून निकलने लगा था, जिसे बाद में स्थापना कर गरीबनाथ (गरीबों के नाथ) के रूप में पूजा होने लगी। पेड़ काटने वाले मजदूर ने जब वह स्थान खोदा, तो उसे एक विशाल शिवलिंग मिला। आज भी शिवलिंग पर कुल्हाड़ी के निशान हैं। सरैया के मम्मन छपरा स्थित श्रीश्री 108 विक्रमादित्य चौमुखी महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य पं. अमीर नाथ मिश्र ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित चार मुख वाला शिवलिंग आज भी रहस्यपूर्ण है। एक साथ ब्रह्मा- विष्णु-महेश के साथ सूर्य की मुखाकृति विद्यमान है। इस शिवलिंग की विशेषता है कि विश्व के सभी शिवलिंग अरघा में स्थापित हैं, जबकि चौमुखी महादेव शिवलिंग चक्र में स्थापित हैं। खेत की जुताई के दौरान यहां शिवलिंग मिला था। कहा जाता है कि यह मंदिर 350 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां जो भी श्रद्धालु विशेष सिद्धि की मनोकामना से महादेव का अभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। पुजारी जीतेंद्र तिवारी ने बताया कि मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन पचास हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा का अभिषेक करते हैं। वर्ष भर मंदिर में श्रद्धालु अभिषेक व पूजा के लिए पहुंचते हैं। भक्तों की मुराद पूरी होती है। इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तुलना में विशाल व भव्य शिवलिंग काफी पुराने समय से स्थापित है। मुजफ्फरपुर | महाशिवरात्रि को लेकर जिले के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ धाम समेत सभी शिव मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जा रही है। महाशिवरात्रि पर भोले बाबा के साथ देवी पार्वती का गठजोड़ कर विवाह गीतों के साथ विवाह रस्म की जाएगी। इस दिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करेंगे। मंदिर के प्रधान पुजारी पं. विनय पाठक ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 300-350 वर्ष पुराना है और स्वयंभू शिवलिंग है। एक घने जंगल में बरगद का पेड़ काटने के दौरान शिवलिंग से खून निकलने लगा था, जिसे बाद में स्थापना कर गरीबनाथ (गरीबों के नाथ) के रूप में पूजा होने लगी। पेड़ काटने वाले मजदूर ने जब वह स्थान खोदा, तो उसे एक विशाल शिवलिंग मिला। आज भी शिवलिंग पर कुल्हाड़ी के निशान हैं। सरैया के मम्मन छपरा स्थित श्रीश्री 108 विक्रमादित्य चौमुखी महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य पं. अमीर नाथ मिश्र ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित चार मुख वाला शिवलिंग आज भी रहस्यपूर्ण है। एक साथ ब्रह्मा- विष्णु-महेश के साथ सूर्य की मुखाकृति विद्यमान है। इस शिवलिंग की विशेषता है कि विश्व के सभी शिवलिंग अरघा में स्थापित हैं, जबकि चौमुखी महादेव शिवलिंग चक्र में स्थापित हैं। खेत की जुताई के दौरान यहां शिवलिंग मिला था। कहा जाता है कि यह मंदिर 350 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां जो भी श्रद्धालु विशेष सिद्धि की मनोकामना से महादेव का अभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। पुजारी जीतेंद्र तिवारी ने बताया कि मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन पचास हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा का अभिषेक करते हैं। वर्ष भर मंदिर में श्रद्धालु अभिषेक व पूजा के लिए पहुंचते हैं। भक्तों की मुराद पूरी होती है। इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तुलना में विशाल व भव्य शिवलिंग काफी पुराने समय से स्थापित है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *