उज्जैन. सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सतत शिक्षा अध्ययनशाला, पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला तथा पं. जवाहर लाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को रेडियो प्रसारण की उपयोगिता, महत्व और संभावनाओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान सभागार में रेडियो की दुनिया से जुड़ी यादों, अनुभवों और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई, जिससे विद्यार्थियों को मीडिया क्षेत्र के व्यावहारिक ज्ञान की जानकारी मिली।
आकाशवाणी उद्घोषकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में आकाशवाणी उज्जैन के उद्घोषकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए रेडियो प्रसारण की कार्यप्रणाली और उसके प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को रेडियो प्रस्तुति, आवाज की स्पष्टता, संवाद शैली और प्रसारण की तकनीकी प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
मुख्य अतिथि प्रो. धर्मेंद्र मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि रेडियो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह करियर निर्माण और सामान्य ज्ञान बढ़ाने का सशक्त साधन भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को रेडियो और जनसंचार के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
तकनीकी युग में भी रेडियो की बनी हुई है प्रासंगिकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने रेडियो के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रेडियो लंबे समय से जनसंचार का विश्वसनीय माध्यम रहा है। वहीं डॉ. अजय शर्मा ने रेडियो को समयबद्धता और अनुशासन का प्रतीक बताते हुए विद्यार्थियों को इससे सीख लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली, जिससे आयोजन प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में भी रेडियो अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और यह समाज को जागरूक करने तथा सूचना प्रसारित करने का प्रभावी माध्यम बना हुआ है।


