‘रामायण’ बनाने वाले रामानंद सागर के बेटे का हुआ निधन, मुंबई में हुआ आनंद सागर चोपड़ा का अंतिम संस्कार

‘रामायण’ बनाने वाले रामानंद सागर के बेटे का हुआ निधन, मुंबई में हुआ आनंद सागर चोपड़ा का अंतिम संस्कार

Anand Ramanand Sagar Chopra Death News: टीवी जगत से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। पौराणिक धारावाहिकों के स्वर्णिम दौर को आगे बढ़ाने वाले आनंद रामानंद सागर चोपड़ा अब हमारे बीच नहीं रहे। 13 फरवरी 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। शाम 4:30 बजे मुंबई के पवन हंस स्थित हिंदू श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन के साथ ही भारतीय टेलीविजन के एक प्रतिष्ठित परिवार के युग का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।

रामानंद सागर के बेटे का निधन (Anand Ramanand Sagar Chopra Death News)

आनंद सागर, महान फिल्मकार रामानंद सागर के पुत्र थे, जिन्होंने छोटे पर्दे पर पौराणिक कथाओं को जीवंत कर इतिहास रच दिया था। परिवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके निधन की जानकारी साझा की और गहरे दुख के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की।

पिता की विरासत को संजोए रखा (Anand Ramanand Sagar Chopra Death News)

आनंद सागर ने अपने पिता की परंपरा को न केवल आगे बढ़ाया बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। जब 1980 के दशक में रामायण ने घर-घर में आस्था की अलख जगाई, तब सागर परिवार भारतीय टेलीविजन का पर्याय बन गया। बाद के वर्षों में आनंद सागर ने 2008 में ‘रामायण’ के नए संस्करण के निर्माण में योगदान दिया, जिससे आधुनिक दर्शकों को भी इस महाकाव्य से जुड़ने का अवसर मिला।

सिर्फ ‘रामायण’ ही नहीं, बल्कि पौराणिक और फैंटेसी शोज के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सागर आर्ट्स के बैनर तले कई परियोजनाओं में उन्होंने क्रिएटिव और प्रोडक्शन स्तर पर सक्रिय भागीदारी निभाई।

लॉकडाउन में फिर जगा ‘रामायण’ का जादू

साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान जब दूरदर्शन पर ‘रामायण’ का फिर से प्रसारण हुआ, तब इसने दर्शकों की संख्या के नए कीर्तिमान स्थापित किए। टेलीविजन के अलावा आनंद सागर का जुड़ाव फिल्मों से भी रहा। उन्होंने ‘आंखें’, ‘अरमान’ और ‘अलिफ लैला’ जैसे प्रोजेक्ट्स के निर्माण में भूमिका निभाई।

वहीं उनके पिता रामानंद सागर ने ‘लव कुश’, श्री कृष्णा और ‘विक्रम बेताल’ जैसे धारावाहिकों से भारतीय टेलीविजन को नई दिशा दी थी। साल 2000 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

सागर परिवार पर दुखों का पहाड़

आनंद सागर के निधन से सागर परिवार शोक में डूबा है। वो अपने पीछे एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय महाकाव्यों और परंपराओं से जोड़ती रहेगी।

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