देवाधिदेव महादेव की आराधना का महापर्व ‘महाशिवरात्रि’ इस साल 15 फरवरी यानी रविवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। औद्योगिक नगरी कानपुर के शिवालयों में इस उत्सव की तैयारियाँ अपने चरम पर हैं। शहर के प्रमुख मंदिरों आनंदेश्वर, सिद्धनाथ, खेरेश्वर और जागेश्वर महादेव मन्दिर में महाशिवरात्रि के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। आस्था का आलम यह है, कि शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और राज्यों से भी भक्त इन पौराणिक मंदिरों में महादेव का जलाभिषेक करने पहुँचते हैं। यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर भक्तों के लिए अटूट आस्था के केंद्र हैं। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इन मंदिरों की महिमा देखते ही बनती है। आइए जानते हैं, कानपुर के उन चार प्रमुख मंदिरों के बारे में जिनका इतिहास द्वापर युग से लेकर त्रेतायुग तक फैला हुआ है।
1. बाबा आनंदेश्वर मंदिर (परमट): जहाँ दानवीर कर्ण करते थे महादेव का अभिषेक सिविल लाइंस स्थित गंगा किनारे बाबा आनंदेश्वर का मंदिर ‘छोटी काशी’ के रूप में विख्यात है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। इतिहास: मान्यता है कि यहाँ दानवीर कर्ण स्वयं गंगा स्नान के बाद महादेव का पूजन करते थे। एक बार एक ‘आनंदी’ नाम की गाय ने अपने आप शिवलिंग पर दूध चढ़ाना शुरू कर दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने खुदाई कराई और शिवलिंग प्रकट हुआ। गाय के नाम पर ही महादेव का नाम ‘आनंदेश्वर’ पड़ा। विशेषता: यहाँ लगभग प्रतिदिन भक्तों द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर में गणेश, हनुमान और विष्णु भगवान की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं। महाशिवरात्रि दर्शन एवं आरती समय: मंदिर प्रशासन (श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा) द्वारा जारी सूचना के अनुसार: 14 फरवरी (शनिवार – प्रदोष): संध्या आरती (8:00-9:00), शयन आरती (10:00-11:00)। इसके बाद गर्भगृह के पट बंद रहेंगे। 15 फरवरी (महाशिवरात्रि): मंगला आरती और पट खुलने का समय रात्रि 1:30 बजे। भोग आरती (दोपहर 12:30-1:30), संध्या भोग आरती (8:30-9:30 ) और शयन आरती (रात्रि 12:00-1:00 )।


